सुप्रीम कोर्ट ने देश में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि बिना वैध ‘थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस’ वाली गाड़ियों को पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल या डीजल न दिया जाए. इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय के ‘वाहन’ (VAHAN) डेटाबेस को पेट्रोल पंपों के ऑटोमेटेड सिस्टम और नंबर प्लेट रीडर कैमरों (ANPR) से जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है, ताकि बिना बीमा दौड़ रही गाड़ियों की पहचान कर तुरंत तेल रिफ्यूलिंग पर रोक लगाई जा सके.
प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) की तर्ज पर अब इंश्योरेंस की वैधता को भी ईंधन भराई की अनिवार्य शर्त बनाया जाएगा. पेट्रोल पंपों पर लगे सीसीटीवी कैमरों और ‘वाहन’ पोर्टल के इंटीग्रेशन से नंबर प्लेट स्कैन होते ही बीमा स्टेटस स्क्रीन पर आ जाएगा. सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों (DGP) को इस आदेश का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं.
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सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लिया यह सख्त फैसला?
भारत में मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 146 के तहत हर वाहन का थर्ड-पार्टी बीमा होना अनिवार्य है. हालांकि, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश की सड़कों पर दौड़ रही लगभग 50% से अधिक गाड़ियां बिना किसी वैध इंश्योरेंस के चल रही हैं.
जब ऐसी अन-इंश्योर्ड गाड़ियों से कोई दुर्घटना होती है, तो पीड़ित परिवार को वर्षों तक अदालतों के चक्कर काटने के बावजूद कोई आर्थिक मुआवजा नहीं मिल पाता. इसी गंभीर समस्या को देखते हुए जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय एस. ओका की पीठ ने यह सख्त रुख अपनाया है.
वाहन चालकों पर क्या होगा सीधा असर?
यदि आपके पास भी कार, बाइक या कोई अन्य वाहन है तो इस नए नियम के लागू होने के बाद आप पर क्या होगा असर?
- पेट्रोल पंप पर रिफ्यूलिंग से इनकार: यदि ‘वाहन’ सर्वर पर आपकी गाड़ी का बीमा लैप्स दिखाएगा तो ऑटोमैटिक नोजल लॉक हो सकता है या पंप कर्मचारी तेल भरने से मना कर देगा.
- ऑन-द-स्पॉट ई-चालान: पेट्रोल पंप के कैमरे द्वारा नंबर प्लेट रीड होते ही सिस्टम अपने आप यातायात पुलिस को सूचित कर देगा और धारा 196 के तहत 2,000 रुपए का ऑटो-चालान कट जाएगा.
- डिजिटल इंश्योरेंस कॉपी आवश्यक: वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने वाहन का बीमा समय पर रिन्यू करवाएं और ‘एम-परिवहन’ या ‘डिजिलॉकर’ में अपडेटेड कॉपी रखें.
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