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भारतीयों का लाइफस्टाइल बदला, शहरियों से ज्यादा खर्चा करते ग्रामीण, कितना-किन चीजों पर, पढ़ें HCE रिपोर्ट

Household Consumption Expenditure Survey Report: पिछले 10 साल में भारतीयों ने प्रति माह कितना और किन चीजों पर खर्च किया, इस पर हुए सर्वे की रिपोर्ट सामने आई है, जिसके आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि देश में गरीबी दर जल्दी ही 5 प्रतिशत से नीचे हो गई है। सर्वे में ग्रामीण भारतीयों के मासिक खर्च को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

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Household Consumption Expenditure Survey Report: देश के नीति आयोग ने भारतीयों द्वारा किए जाने वाले मासिक प्रति व्यक्ति खर्च (MPCE) पर हुए सर्वे की रिपोर्ट जारी की है।

अगस्त 2022 से जुलाई 2023 के बीच हुए खर्चे का डाटा लेकर सर्वे किया गया था, जिस आधार पर स्टडी करके घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) रिपोर्ट तैयार की गई।

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इसमें खुलासा हुआ है कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग शहरियों की तुलना में ज्यादा घरेलू खर्च कर रहे हैं और खर्च भी 2011-12 की तुलना में 2022-23 में 10 साल में दोगुना हो गया है।

 

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मासिक खर्च में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी घटी

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राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) की रिपोर्ट के आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण भारत में औसत मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय (MPCE) में अनाज-दालों की हिस्सेदारी 2022-23 में घटकर 46.4% हो गई, जो 2011 में 52.9% थी। 2004-05 में 53.1% और 1999-2000 में 59.4% थी। अनाज-दालों के अलावा अन्य चीजों पर खर्च 47 से बढ़कर 53.6 प्रतिशत हो गया है। यह खर्च अंडा, मांस, मछली खरीदने पर किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शहरी भारत में घरेलू खर्च में अनाज-दालों जैसे खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी में गिरावट आई है, लेकिन यह गिरावट ज्यादा नहीं है। 1999-2000 में यह भागीदारी 48.1%, 2004-05 में 40.5%, 2011-12 में 42.6% थी और नई रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 में 39.2% है। वहीं खाने-पीने की चीजों के अलावा अन्य चीजों पर खर्च 57.4 से बढ़कर 60.8% हो गया है। खर्च भी कपड़ों, टेलिविजन, फ्रिज और मनोरंजन के साधनों पर किया जा रहा है।

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सर्वे में हुए 4 बड़े खुलासे

  • ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में कुल खाद्य उपभोग व्यय में अनाज और दालों की हिस्सेदारी कम हो गई है। दूध, मांस, मछली पर खर्च बढ़ गया है।
  • फलों-सब्जियों, पोषक तत्वों (विटामिन और खनिज) से भरपूर खाद्य पदार्थों पर ज्यादा खर्च किया गया। ग्रामीण और शहरी भारतीयों ने 2022-23 में पहली बार अनाज-दालों के मुकाबले फलों और सब्जियों पर ज्यादा खर्च किया।
  • सब्जियों पर खर्च अनाज से अधिक हुआ और फलों पर दालों से ज्यादा खर्च किया गया। यह खर्च भी ग्रामीण भारत में शहरियों से ज्यादा खर्च किया गया, जो 2022-23 में 10.59% और शहरी भारत में 9.11% है।
  • ग्रामीणों ने अंडे, मछली, मांस खरीदने में ज्यादा खर्च किया। शहरी बने बनाए खाद्य पदार्थों, पेय पदार्थों और पके हुए खाने पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं। 2022-23 में शहरों में यह आंकड़ा 27.16% और ग्रामीण भारत में 20.74 प्रतिशत है।

 

First published on: Feb 26, 2024 11:35 AM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के IMC&MT इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं Mphil कोर्स किया है। पिछले 12 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही हैं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के News 24 Hindi डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हैं। यहां खुशबू नेशनल, इंटरनेशनल, लाइव ब्रेकिंग, पॉलिटिक्स, क्राइम, एक्सप्लेनर आदि कवर करती हैं। इससे पहले खुशबू Amar Ujala और Dainik Bhaskar मीडिया हाउस के डिजिटल विंग में काम कर चुकी हैं।

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