सर्दियों में वीरान हो जाता है कश्मीर का ये गांव, कड़ाके की ठंड से बचने को निचले इलाकों में गए ग्रामीण

Nilgrar Kashmir Ghost Village: जम्मू कश्मीर में एक गांव नीलगरार (Nilgrar) सर्दियों में पांच महीने के लिए भुतहा बन जाता है और ग्रामीण उसे छोड़ निचले इलाकों में रहने चले जाते हैं. गांदरबल जिले में समुद्र तल से 3,154 मीटर (10348 फीट) की ऊंचाई पर बसे गांव नीलगरार (Nilgrar) में हिमस्खलन के खतरे के बीच पारा माइनस 20 डिग्री तक भी पहुंच जाता है. पढ़ें कश्मीर से आसिफ सुहाफ की रिपोर्ट

neelgrar village

Nilgrar Kashmir Ghost Village: ऊंची चोटियों की छाया में और हिमस्खलन के बढ़ते खतरे के बीच, गांदरबल जिले का एक ऊंचाई पर बसा गांव नीलगरार (Nilgrar) इस सर्दी में लगभग वीरान हो गया है, क्योंकि निवासी कड़ाके की ठंड से बचने के लिए सुरक्षित निचले इलाकों में चले गए हैं. ऊपरी सिंध घाटी में समुद्र तल से 3,154 मीटर (10348 फीट) की ऊंचाई पर, सोनमर्ग से लगभग 10 किमी आगे स्थित इस गांव में भारी बर्फबारी और अचानक तूफानों के बीच तापमान माइनस 20°C तक गिर जाता है, जिसके कारण इसके 1,085 निवासियों में से ज्यादातर हर साल दिसंबर से अप्रैल तक पलायन कर जाते हैं. इस गांव में पत्थर और लकड़ी के पारंपरिक घरों से लेकर आधुनिक कंक्रीट और ईंट के घरों का मिश्रण दिखता है.

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न्यूज24 ने नीलगरार (Nilgrar) का दौरा कर देखे हालात

न्यूज24 ने कश्मीर के सबसे कठोर 40 दिवसीय सर्दियों के चरण ‘चिल्लई कलां’ के दौरान नीलगरार (Nilgrar) का दौरा किया. दिन का तापमान माइनस 3°C के आसपास रहा, जो रात में गाव में माइनस 11°C और पास के सोनमर्ग में माइनस 9.8°C तक गिर गया. कुछ ही लोग बचे थे, जो अपनी मर्ज़ी से नहीं बल्कि कर्तव्य के कारण रुके थे. गांव में आपातकालीन सेवाए्रं प्रदान करने के लिए रुके स्वास्थ्य कार्यकर्ता हाजी मोहम्मद मुख्तार से बातचीत हुई. हाजी मोहम्मद ने पिछले साल Z-मोड़ सुरंग के उद्घाटन का श्रेय लेते हुए कहा कि इस सुरंग के कारण यह सड़क खुली नजर आ रही है. पहले जब गांव सड़क से कट जाता था तो हम सभी पलायन कर जाते थे. अब, सुरंग के कारण, मैं पूरी सर्दी यहां ड्यूटी कर सकता हूं.”

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ज़ोजिला सुरंग परियोजना से बढ़ी नीलगरार (Nilgrar) की पहचान

श्रीनगर को लेह से जोड़ने वाली जोजिला सुरंग परियोजना के तहत दो प्रमुख हिस्सों, जिसमें नीलगरार (Nilgrar) के पास सुरंग एक और सुरंग दो पर काम चल रहा है, पर काम कर रहे कासिम बाल्टी ने बताया कि ज्यादातर परिवार, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, एक महीने पहले कुल्लन, गुंड और कंगन चले गए. वह ठंड और बर्फ के बीच नौकरी के लिए रुके हैं” दरअसल, ज़ोजिला परियोजना ने नीलगरार (Nilgrar) की पहचान को बढ़ाया है, जिससे हर मौसम में कनेक्टिविटी होने का वादा किया गया है. यहां सार्वजनिक और निजी बस सेवा उपलब्ध है, लेकिन निकटतम रेलवे स्टेशन दूर है.

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नीलगरार (Nilgrar) के लोगों के लिए वरदान बनी सुरंग

गांव नीलगरार (Nilgrar) की 2,679 से 4,229 मीटर तक ऊंचाई अभी भी खतरा पैदा करती है और निवासी हल्के मौसम वाले इलाकों में दूसरे घर बनाए हुए हैं. जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में, ‘चिल्लई कलां’ और तेज़ हो गया, श्रीनगर में तापमान माइनस 5.1°C और गुलमर्ग में माइनस 9.2°C रहा. मौसम विभाग ने 22 जनवरी तक ठंडे, सूखे मौसम का अनुमान लगाया है, जिसमें न्यूनतम तापमान 10 जनवरी तक और गिरेगा, जिसके बाद 1-2°C की हल्की बढ़ोतरी होगी. जम्मू में घना कोहरा यात्रा में बाधा डाल सकता है. नीलगरार (Nilgrar) के कुछ पक्के लोगों के लिए, यह सुरंग ठंड के बीच उम्मीद की किरण है, जो एक मौसमी वीरान गांव को एक महत्वपूर्ण सीमा चौकी में बदल रही है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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