2 को उम्रकैद, मुख्य आरोपी बरी...Narendra Dabholkar हत्याकांड में 11 साल बाद आया अहम फैसला

Narendra Dabholkar Murder Case Update: 11 साल बाद CBI की विशेष अदालत ने महाराष्ट्र के समाजसेवी नरेंद्र दाभोलकर मर्डर केस में फैसला सुनाया है। 5 आरोपियों में से 2 को सजा सुनाते हुए जुर्माना लगाया गया है। वहीं 3 आरोपियों को सबूतों के अभाव के बरी कर दिया गया।

Social Activist Narendra Dabholkar

नरेंद्र दाभोलकर के समाज सुधार अभियान के विरोध में उनकी हत्या की गई थी।

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Narendra Dabholkar Murder Case Verdict: महाराष्ट्र के मशहूर नरेंद्र दाभोलकर (Narendra Dabholkar) मर्डर केस में 11 साल बाद अहम फैसला आया है। पुणे CBI की विशेष अदालत ने केस के 2 आरोपियों को दोषी करार देकर उम्रकैद की सजा सुनाई है, लेकिन बड़ी बात यह है कि केस का मास्टरमाइंड मुख्य आरोपी डॉ. विनोद तावड़े बरी हो गया है। उसके अलावा विक्रम भावे और संजीव पुनालकेर को भी सबूतों के अभाव में रिहा किया है।

जिन्हें उम्रकैद की सजा हुई है, उनमें शरद कालस्कर और सचिन अंडूरे शामिल हैं। इन दोनों पर 5-5 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। नरेंद्र दाभोलकर महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक थे। 20 अगस्त 2013 की सुबह पुणे में सैर करते समय गोली मारकर इनका मर्डर कर दिया गया था। केस की प्राथमिक जांच पुणे पुलिस ने की थी, लेकिन बाद में केस CBI को सौंप दिया गया था। जांच एजेंसी ने पड़ताल करके 2016 में चार्जशीट दाखिल की थी। 8 साल की सुनवाई, गवाहियों, दलीलों के बाद आज फैसला सुनाया गया।

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22 गवाहों के बयान, CBI ने की जांच पड़ताल

CBI की विशेष अदालत के जज AA जाधव ने फैसला सुनाया है। साल 2014 में केस CBI के हाथ में आया था। 11 साल में कुल 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 100 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाली। पुणे-ठाणे की जेल में बंद कैदियों से पूछताछ की। जून 2016 में हिंदू दक्षिणपंथी संगठन सनातन संस्था के मेंबर डॉ. वीरेंद्र तावड़े को CBI ने गिरफ्तार किया था। वारदात में इस्तेमाल पिस्तौल और काले रंग की बाइक भी बरामद हुई थी।

चार्जशीट में पहले विनोद तावड़े और सारंग अकोलकर को गोली चलाने वाला बताया गया। फिर सचिन अंडूरे और शरद कालस्कर को गिरफ्तार करके सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें दोनों को शूटर बताया गया। वकील संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को सहयोगियों के रूप में पकड़ा गया। विनोद तावड़े, सचिन अंडूरे और शरद कालस्कर जेल में थे। संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को जमानत मिली हुई थी।

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क्यों मारे गए थे नरेंद्र दाभोलकर?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नरेंद्र दाभोलकर की हत्या का कारण उनका अधंविश्वास के खिलाफ शुरू किया गया अभियान बना। सनातन संस्थान इस अभियान की विरोधी थी। संस्था को दाभोलकर की समिति द्वारा किए जाने वाले समाज सुधार कार्यों पर भी आपत्ति थी। अकसर दोनों के बीच टकराव होता था।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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