मैसूर के Dasara का 'हीरो' अर्जुन नहीं रहा, जंगली हाथी को पकड़ने की कोशिश में गई जान, जानिए कौन था?

Mysuru Dasara Arjuna Dies: जंगली हाथी ने अर्जुन पर हमला किया। दांत अर्जुन के पेट में लगा और ज्यादा खून बहने की वजह से उसकी जान चली गई। जानिए कौन था अर्जुन?

Mysuru Dasara Arjuna Dies

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Mysuru Dasara Hero Elephant Arjuna Dies: देशभर में मशहूर मैसूर दशहरे की शान अर्जन नहीं रहा। एक रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जंगली हाथी को पकड़ने की कोशिश उसकी जान चली गई। हासन जिले के सकलेशपुरा तालुका में येसालुरू रेंज फॉरेस्ट में जंगली हाथी को पकड़ने की कोशिश चल रही थी। इस दौरान 64 वर्षीय अर्जुन और जंगली हाथी भिड़ गए। जंगली हाथी ने अर्जुन पर हमला किया। दांत अर्जुन के पेट में लगा और ज्यादा खून बहने की वजह से उसकी जान चली गई। वन अधिकारी SP महादेव ने बताया कि चिकमंगलुरू जिले से एक जंगली हाथी बैंगलुरू में आ गया था, जिसे पकड़ने के लिए सोमवार सुबह अभियान चलाया गया था, जिसमें हमने अपने अर्जुन को खो दिया। जी हां, अर्जुन मैसूर दशहरे का सबसे अहम हिस्सा एक हाथी था।

 

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करीब 6 हजार किलो वजनी था अर्जुन

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अर्जुन 22 साल मैसूर दशहरे का हिस्सा रहा। उसका इस्तेमाल गोल्डन हौदा लाने के लिए किया जाता था। 2012 से 2019 तक 8 बार अर्जुन अंबारी लेकर गया। जंबू सवारी के तौर पर भी अर्जुन का इस्तेमाल होता रहा है। यह 2.88 मीटर ऊंचा और 5800 से 6 हजार किलो वजनी था, लेकिन पिछले 11 दिन से चल रहे ऑपरेशन के दौरान हादसे में उसकी जान चली गई। यह कनार्टक में हुई पहली ऐसी घटना है। सोमवार सुबह करीब 11 बजे अर्जुन सहित 6 हाथियों के साथ जंगली हाथी को पकड़ने की कोशिश चल रही थी, लेकिन जंगली हाथी ने अर्जुन पर तब हमला किया, जब अधिकारी ट्रैंक्विलाइज़र से उसे भगाने की कोशिश कर रहे थे। दूसरे हाथी पीछे हट गए, लेकिन अर्जुन ने प्रतिरोध किया और अकेले ही जंगली हाथी से मुकाबला करने की कोशिश की।

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अपने महावत को पीट-पीट कर मार चुका

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आमने-सामने की लड़ाई में अर्जुन के दांत, पेट और पसलियों में चोटें लगीं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अर्जुन की मौत पर शोक जताया है। बता दें कि अर्जुन को 1968 में पश्चिमी घाट के केकनाकोटे के जंगलों से एक ऑपरेशन के दौरान पकड़ा गया था। इसे पालतू बनाया गया। इसके बाद अर्जुन को मैसूर दशहरे में शामिल किया गया। 1990 में सुनहरा हौदा लाने के दौरान अर्जुन के वाहक द्रोण की मौत हो गई थी। अर्जुन ने 1996 में अपने महावत अन्नैया को सोते समय पीट-पीट कर मार दिया था, हालांकि उसे हादसा बताया गया, लेकिन इसके बाद अर्जुन को नेशनल पार्क नागरहोल में कैद कर दिया गया था। उसका उत्तराधिकारी अभिमन्यु बना।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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