केरल में एक बीजेपी समर्थक न्यूज पेपर जन्मभूमि में कुछ ऐसा लिखा था, जिससे पढ़ने वालों के होश उड़ गए. गुरुवार सुबह को रोज की तरह जैसे ही लोग अखबार पढ़ रहे थे. लेकिन जैसे ही वो संपादकीय कॉलम पर पहुंचे तो वो एकदम से चौंक गए. अखबार में बीजेपी की बजाय मुस्लिम लीग के लेख छपे हुए थे. जैसे ही ये बात बाहर आई तो चर्चा छिड़ गई. दरअसल केरल के कोझिकोड और कन्नूर में जन्मभूमि अखबार के एडिटोरियल पेज को बिल्कुल बदल दिया गया था. उसपर मुस्लिम लीग केरल के मुखिया सैयद सादिकली शिहाब के लेख लिखे थे, जिसमें उन्होंने साल 2025 के बारे में विस्तार से लिखा था.
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साजिश या तकनीकी चूक?
अखबार में मुस्लिम लीग के प्रमुख के अलावा एम के मुनीर और मोहम्मद शाह के लेख भी छापे गए थे. पेपर का संपादकीय भी मुस्लिम लीग के मुखपत्र चंद्रिका का था. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक ये कोई साजिश नहीं थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये गलती की वजह से हुआ है. दरअसल जन्मभूमि और चंद्रिका जैसे कई अखबारों की प्रिंटिंग प्लेट्स एक ही जगह पर तैयार होती है. प्रिंटिंग के वक्त किसी चूक की वजह से चंद्रिका का संपादकीय पेज जन्मभूमि के एडिशन में छप गया.
विपक्ष ने ली चुटकी
जैसे ही जन्मभूमि अखबार में मुस्लिम लीग का संपादकीय पन्ना मिला, विपक्ष ने उसे भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. खासतौर पर माकपा (CPI-M) ने इस मामले पर खूब चुटकी ली. पार्टी के नेताओं ने सोशल मीडिया पर इसे बीजेपी और मुस्लिम लीग का गठबंधन बता दिया. विपक्षी पार्टियां लगातार ये सवाल उठा रही हैं कि बीजेपी के अखबार में अचानक कट्टर दल के नेताओं के विचार कैसे छप गए.
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केरल में एक बीजेपी समर्थक न्यूज पेपर जन्मभूमि में कुछ ऐसा लिखा था, जिससे पढ़ने वालों के होश उड़ गए. गुरुवार सुबह को रोज की तरह जैसे ही लोग अखबार पढ़ रहे थे. लेकिन जैसे ही वो संपादकीय कॉलम पर पहुंचे तो वो एकदम से चौंक गए. अखबार में बीजेपी की बजाय मुस्लिम लीग के लेख छपे हुए थे. जैसे ही ये बात बाहर आई तो चर्चा छिड़ गई. दरअसल केरल के कोझिकोड और कन्नूर में जन्मभूमि अखबार के एडिटोरियल पेज को बिल्कुल बदल दिया गया था. उसपर मुस्लिम लीग केरल के मुखिया सैयद सादिकली शिहाब के लेख लिखे थे, जिसमें उन्होंने साल 2025 के बारे में विस्तार से लिखा था.
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साजिश या तकनीकी चूक?
अखबार में मुस्लिम लीग के प्रमुख के अलावा एम के मुनीर और मोहम्मद शाह के लेख भी छापे गए थे. पेपर का संपादकीय भी मुस्लिम लीग के मुखपत्र चंद्रिका का था. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक ये कोई साजिश नहीं थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये गलती की वजह से हुआ है. दरअसल जन्मभूमि और चंद्रिका जैसे कई अखबारों की प्रिंटिंग प्लेट्स एक ही जगह पर तैयार होती है. प्रिंटिंग के वक्त किसी चूक की वजह से चंद्रिका का संपादकीय पेज जन्मभूमि के एडिशन में छप गया.
विपक्ष ने ली चुटकी
जैसे ही जन्मभूमि अखबार में मुस्लिम लीग का संपादकीय पन्ना मिला, विपक्ष ने उसे भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. खासतौर पर माकपा (CPI-M) ने इस मामले पर खूब चुटकी ली. पार्टी के नेताओं ने सोशल मीडिया पर इसे बीजेपी और मुस्लिम लीग का गठबंधन बता दिया. विपक्षी पार्टियां लगातार ये सवाल उठा रही हैं कि बीजेपी के अखबार में अचानक कट्टर दल के नेताओं के विचार कैसे छप गए.
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