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‘राज्य की हैंड बुक से ऊपर है संसद का कानून’, मैटरनिटी लीव पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

दो साल में 2 बार मिलेगा मातृत्व अवकाश, मैटरनिटी लीव पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

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Edited By : Raghav Tiwari Updated: Apr 22, 2026 08:06

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मैटरनिटी लीव पर बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि संसद ने मातृत्व लाभ अधिनियम बनाया कानून है। यह नियम किसी कार्यपालिका निर्देश या वित्तीय हैंडबुक के प्रावधानों से ऊपर रहेंगे। सुनवाई 2 साल में 2 बार मैटरनिटी लीव का चल रहा था।

दरअसल, हाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में एक केस आया। इसमें याचिका कर्ता मनीषा यादव ने 4 अप्रैल 2026 के आदेश को चुनौती दी थी। उस आदेश में मनीषा के दूसरे मातृत्व अवकाश की मांग को अस्वीकार कर दिया गया था। लखनऊ में सुनवाई के दौरान वकील ने दलील दी कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 लाभकारी कानून है। इसके प्रावधानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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जबकि सामने वाले पक्ष का तर्क था कि राज्य की ओर से वित्तीय हैंडबुक के नियम 153 (1) का हवाला देते हुए कहा गया कि दो प्रसूति अवकाश के बीच कम से कम दो वर्ष जरूरी हैं।

सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि मातृत्व लाभ अधिनियम संसद द्वारा बनाया कानून है। यह किसी कार्यपालिका निर्देश या वित्तीय हैंडबुक के प्रावधानों से ऊपर है। कहा कि अगर दोनों में विरोधाभास हो, तो अधिनियम के प्रावधान ही प्रभावी होंगे। स्पष्ट करते हुए कोर्ट ने कहा कि पहला मातृत्व अवकाश लेने के दो वर्ष के भीतर दूसरे मातृत्व अवकाश पर रोक नहीं लगाई जा सकती।

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First published on: Apr 22, 2026 08:01 AM

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