संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में उस समय हंगामा बढ़ गया जब राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन से अनुपस्थिति और हालिया प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर उनकी खामोशी को लेकर जोरदार हमला बोला. सदन को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने तीखे शब्दों में कहा, 'क्या किसी ने गृह मंत्री का मुंह सिल दिया है?' खरगे ने यह टिप्पणी 20 जुलाई को 'कॉकरोच जनता पार्टी' द्वारा आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुए सुरक्षा और पुलिस कार्रवाई के मामले में गृह मंत्री की लगातार बनी हुई चुप्पी को लेकर की.

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पेपर लीक विरोधी विधेयक पेश होने के बाद उच्च सदन को संबोधित करते हुए कांग्रेस सांसद खरगे ने गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों की संसद सत्र में गैरमौजूदगी पर सवाल खड़े किए. विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार से जवाब और जवाबदेही की मांग कर रहा है. खरगे ने आरोप लगाया कि देश के महत्वपूर्ण मुद्दों और सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई सख्ती पर सरकार तथा गृह मंत्रालय की खामोशी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाती है.

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'बंद कमरे में छिपकर नहीं बैठ सकते गृह मंत्री'

जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए बल प्रयोग का मुद्दा उठाते हुए खरगे ने कहा, 'गांवों और दूसरे राज्यों से आए मासूम बच्चों पर पेलेट गन चलाई जा रही हैं. किसी की आंख चली गई, किसी का कान तो किसी का हाथ. इसके लिए सीधे तौर पर गृह मंत्री जिम्मेदार हैं'. खरगे ने आगे कहा, 'गृह मंत्री शायद बंद कमरे से मुझे सुन रहे होंगे, लेकिन आप हमेशा छिपे नहीं रह सकते. एक दिन जनशक्ति आपको बाहर खींच लाएगी.'

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अपने बयान पर सफाई देते हुए खरगे ने कहा कि उन्होंने किसी असंसदीय भाषा का इस्तेमाल नहीं किया है. 'हम' से उनका मतलब देश की 'जनशक्ति' यानी जनता, छात्रों और महिलाओं से है. राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अमित शाह की चुप्पी और सदन से दूरी को लेकर सवाल खड़े किए.

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'एंटी-पेपर लीक बिल महज एक दिखावा'

लोकसभा से पास होकर राज्यसभा पहुंचे 'लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026' को खरगे ने सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि यह नया संशोधन बिल केवल एक छलावा है. खरगे ने कहा, 'पुराने कानून में सिर्फ कुछ आंकड़े बदलकर भारी जुर्माना, सख्त सजा और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसे प्रावधान जोड़ दिए गए हैं. इससे पेपर लीक नहीं रुकेंगे. असली बदलाव इस बात से आएगा कि आप परीक्षाएं कैसे कराते हैं. हमने 2024 में ही सख्त कानून की मांग की थी, जिसे तब खारिज कर दिया गया था.'

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