जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से पैलेट गन के इस्तेमाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है. इस दौरान SC ने रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के गोला-बारूद संबंधी पूरे रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है.
अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल केवल असाधारण परिस्थितियों (Extraordinary circumstances) में ही किया जा सकता है. इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि घटना से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड सुरक्षित रहें ताकि मामले की निष्पक्ष जांच प्रभावित न हो.
बता दें कि मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें जंतर-मंतर और संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने का आरोप लगाया गया है. सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि किसी कार्रवाई में पैलेट गन का उपयोग हुआ है, तो उससे संबंधित प्रत्येक कारतूस और गोला-बारूद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाना चाहिए. अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए इस संबंध में विस्तृत जवाब भी मांगा है.
पैलेट गन लगने के कई मामले सामने आए- याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों को पैलेट गन लगने से गंभीर चोटें आईं, जबकि कुछ मामलों में आंखों की रोशनी प्रभावित होने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं.
दूसरी ओर केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी. हालांकि सरकार ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान सुरक्षा बलों पर भी हमले हुए थे और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए थे.
पहले भी दिए थे SC ने ये निर्देश
इससे पहले अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट प्रदर्शन से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी-वॉर्न कैमरों की रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार और अन्य डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने के निर्देश दे चुका है. अदालत ने यह भी कहा था कि प्रदर्शनकारियों का निजी और डिजिटल डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाए और जिन छात्रों का कोई क्रिमिनल बैकग्राउंड नहीं है, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई ना की जाए.
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UN की गाइडलाइंस में दी गई है चेतावनी- SC
उन्होंने आगे कहा कि कानून लागू करने में ‘कम घातक हथियारों’ (less lethal weapons) के इस्तेमाल पर संयुक्त राष्ट्र की गाइडलाइंस भीड़ पर ऐसे हथियारों का इस्तेमाल न करने की चेतावनी देती हैं. गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए प्रोजेक्टाइल-एक्टिवेटेड गन, आंशिक या पूरी तरह से धातु के छर्रों (pellets) वाली पैलेट गन का इस्तेमाल संवैधानिक पैमानों पर खरा नहीं उतरता है.
आजाद के अलावा, 25 साल के कलाकार प्रशांत कुमार सिंह भी याचिकाकर्ता हैं, जो 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च में शामिल थे. सिंह ने कहा कि उनकी तरफ से बिना किसी उकसावे या आक्रामकता के बावजूद, कथित तौर पर RAF कर्मियों की पैलेट गन फायरिंग में वे घायल हो गए थे. एक और याचिकाकर्ता, शेख इरशाद मंसूरी (26) का दावा है कि वह वीजा से जुड़े कुछ काम के बाद कनॉट प्लेस में थे और पैलेट फायरिंग में घायल हुए थे.