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देश

जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दिया, राष्ट्रपति मुर्मू को भेजा रिजाइन, कैश कांड में आया था नाम

Justice Yashwant Verma: देश के बहुचर्चित कैश कांड के आरोपी यशवंत वर्मा ने जस्टिस का पद छोड़ दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति मुर्मू को भेज दिया है। यशवंत वर्मा के खिलाफ कैश कांड केस की जांच जारी है और मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

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Edited By : Khushbu Goyal Updated: Apr 10, 2026 13:31
Justice Yashwant Verma
यशवंत वर्मा आजकल न्यायिक कामकाज से दूर थे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा है। जस्टिस वर्मा कैश कांड में नाम आने के बाद सुर्खियों में आए थे। उनके दिल्ली वाले घर में आग लग गई थी और जांच के दौरान 500-500 के जले हुए नोटों के बंडल बरामद हुए थे। घटनाक्रम के बाद विवाद खड़ा होने से उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था। लेकिन यहां उन्हें न्यायपालिका के कामकाज करने की इजाजत नहीं थी।

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यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव आया था

बता दें कि जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ कैश कांड के कारण लोकसभा सदन में महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसे उन्होंने चुनौती दी थी और दलील दी कि राज्यसभा ने प्रस्ताव का मंजूरी नहीं दी थी तो लोकसभा की जांच समिति निरर्थक और गलत है। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 7 जनवरी 2026 को जांच समिति के गठन में कमियां बताते हुए सवाल उठाए। साथ ही जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

सुप्रीम कोर्ट ने यशवंत के खिलाफ सुनाया फैसला था

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने जस्टिस यशवंत वर्मा को पार्लियामेंट्री कमेटी के सामने जवाब दाखिल करने के लिए समय देने से इनकार कर दिया। वहीं महाभियोग के खिलाफ दायर याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत लोकसभा स्पीकर को अधिकार मिला हुआ है, जिसका इस्तेमाल करते हुए ही स्पीकर ने यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए समिति गठित की है। राज्यसभा से प्रस्ताव मंजूर न होने की स्थिति में भी लोकसभा स्पीकर ऐसा कर सकते हैं।

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यशवंत के सरकारी आवास में 15 करोड़ कैश मिला था

बता दें कि 14 मार्च 2025 को दिल्ली में यशवंत वर्मा के सरकारी आवास 30 तुगलक क्रिसेंट में स्टोर रूम में आग लग गई थी, जिसे बुझाते समय फायर ब्रिगेड और पुलिस को अधजले नोटों की गड्डियां मिली थी। काउंट करने पर करीब 15 करोड़ रुपये का कैश था। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और उस समय के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय इंटरनल कमेटी बनाई थी। साथ ही यशवंत वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट शिफ्ट किया था।

First published on: Apr 10, 2026 12:25 PM

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