ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना ने कैसे चुना अपना टार्गेट? जितेंद्र मिश्रा ने किया था खुलासा, देखें वीडियो
जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि सरकार के निर्देश बिल्कुल क्लियर थे कि आतंकवादियों, उनके हैंडलरों और उन्हें समर्थन देने वालों को निशाना बनाया जाए, आम पाकिस्तानी नागरिकों को नहीं. जितेंद्र मिश्रा के मुताबिक, टार्गेट्स पर हमला करने के लिए समय का चयन भी इसी सोच के तहत किया गया.
सोशल मीडिया पर जितेंद्र मिश्रा का एक पॉडकास्ट भी वायरल. (Photo: ANI)
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यूपी के अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ (CEO) जितेंद्र मिश्रा को नियुक्त किया गया है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ स्थल ट्रस्ट ने बुधवार को हुई बैठक में एयरफोर्स के रिटायर्ड मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त किया साथ ही ट्रस्ट के तीन नए सदस्यों के नाम का भी ऐलान किया. राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ बनाए जाने के बाद जितेंद्र मिश्रा ने इस जिम्मेदारी को इमानदारी से निभाने की बात कही. इस बीच सोशल मीडिया पर जितेंद्र मिश्रा का एक पॉडकास्ट भी वायरल हो रहा है, जो उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ किया था. पॉडकास्ट के दौरान जितेंद्र ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने आम नागरिकों के बीच आतंकी ठिकानों की पहचान कैसे की.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना ने कैसे चुना टार्गेट?
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर का मकसद सिर्फ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना था कि आम नागरिकों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे. यही वजह रही कि लक्ष्य, समय और हथियार का चुनाव बेहद सटीक तरीके से किया गया. जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि कार्रवाई के लिए सबसे पहले संबंधित ठिकानों के बारे में विस्तृत खुफिया जानकारी जुटाई गई. सेना यह पता लगाने की कोशिश कर रही थी कि किसी परिसर में कितने लोग मौजूद हैं, वहां किस तरह की गतिविधियां चल रही हैं और उनमें से कौन आतंकवादी या उनके हैंडलर हैं.
जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि सरकार के निर्देश बिल्कुल क्लियर थे कि आतंकवादियों, उनके हैंडलरों और उन्हें समर्थन देने वालों को निशाना बनाया जाए, आम पाकिस्तानी नागरिकों को नहीं. जितेंद्र मिश्रा के मुताबिक, टार्गेट्स पर हमला करने के लिए समय का चयन भी इसी सोच के तहत किया गया. उन्होंने बताया कि जिन स्थानों पर आम लोगों के मौजूद होने की आशंका थी, वहां कार्रवाई से बचने की कोशिश की गई. उदाहरण के तौर पर, कुछ ठिकानों पर नमाज के समय को ध्यान में रखते हुए हमला नहीं किया गया, जिससे वहां मौजूद नागरिकों के हताहत होने की संभावना कम से कम रहे.
#WATCH | Glimpses from an episode of ANI Podcast with Smita Prakash in which Air Marshal Jeetendra Mishra (Retd) was a guest.
He is now the first CEO of Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust, Ayodhya. pic.twitter.com/GpV7WhQCwz
जितेंद्र मिश्रा आगे बताते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एक्शन के लिए रात करीब एक बजे का समय चुना गया. इसके पीछे वजह यह थी कि उस समय संदिग्ध इलाके में आम लोगों के मौजूद होने की संभावना बेहद कम थी. हालांकि, अंतिम फैसला सिर्फ समय के आधार पर नहीं लिया गया. सेना को जब पुख्ता खुफिया जानकारी मिली कि संबंधित इमारत में आतंकी या उनके हैंडलर मौजूद हैं, तभी उसे निशाना बनाया गया.
रिटायर्ड एयर मार्शल ने बताया कि करीब 100 से 150 किलोमीटर दूर स्थित टार्गेट्स पर सटीक हमला करना अपने आप में बड़ी चुनौती थी. सेना के पास ऐसे हथियार मौजूद थे जो एक बड़े एरिया को तबाह कर सकते थे, लेकिन सेना का मकसद ज्यादा नुकसान पहुंचाना नहीं था. इसके बजाय ऐसे हथियार और उनकी क्षमता का इस्तेमाल किया गया, जिनसे सिर्फ आतंकियों की इमारत को निशाना बनाया जा सके.