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INS अरिधमान की एंट्री से बढ़ी भारत की ताकत, दुश्मनों के लिए बना ‘साइलेंट किलर’!

स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी INS अरिधमान के इंडियन नेवी में शामिल होने से भारत की समुद्री ताकत में बड़ा इजाफा हुआ है. यह अत्याधुनिक पनडुब्बी दुश्मनों के लिए 'खामोश' लेकिन बेहद घातक साबित हो सकती है.

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Written By: Pawan Mishra Updated: Apr 3, 2026 23:26
INS Aridhaman Inducted into Indian Navy
Credit: Social Media

”शब्द नहीं, शक्ति है-‘अरिधमान’!” इसी संदेश के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भारतीय नौसेना की नई ताकत का स्वागत किया. स्वदेशी तकनीक से बनी परमाणु पनडुब्बी INS अरिधमान अब आधिकारिक रूप से भारतीय नेवी के बेड़े में शामिल हो गई है. विशाखापट्टनम में आयोजित एक भव्य समारोह में रक्षा मंत्री ने इस अत्याधुनिक पनडुब्बी को नौसेना को सौंपा. इसके साथ ही भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता में एक और मजबूत कड़ी जुड़ गई है.

ये भी पढ़ें: भारतीय नौसेना की ताकत में एक और इजाफा, दुश्मन देश पर हुंकार भरने के लिए तैयार ‘तारागिरी’

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क्या है खास?

INS अरिधमान, आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत विकसित की गई है, जो भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता का एक बड़ा उदाहरण है. यह पनडुब्बी परमाणु ऊर्जा से संचालित होती है, जिससे यह लंबे समय तक समुद्र के अंदर बिना सतह पर आए ऑपरेशन कर सकती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह दुश्मन की रडार और ट्रैकिंग सिस्टम से बचने में सक्षम है, जिससे इसकी लोकेशन का पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है. गति की बात करें तो यह पनडुब्बी समुद्र के अंदर करीब 45 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकती है. इसके अलावा, इसमें K-15 और K-4 जैसी बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं, जो लंबी दूरी तक सटीक निशाना साधने में सक्षम हैं. यही वजह है कि इसे भारत की परमाणु त्रि-आयामी रक्षा (Nuclear Triad) का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है.

INS अरिधमान की प्रमुख विशेषताएं:

1.  सतह पर इसका वजन लगभग 6,000 टन है.
2.  पूरी तरह पानी में डूबने पर इसका वजन बढ़कर करीब 7,000 टन हो जाता है.
3.  इसमें लगभग 100 नौसैनिक तैनात हो सकते हैं.
4.  यह 83 मेगावाट के छोटे परमाणु रिएक्टर से संचालित होती है.
5.  इसमें इस्तेमाल किया गया रिएक्टर मौजूदा नौसैनिक तकनीक पर आधारित है, जिसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है.
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि INS अरिधमान के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ और मजबूत होगी. यह पनडुब्बी न सिर्फ निगरानी और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने में भी सक्षम है.

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First published on: Apr 03, 2026 11:26 PM

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