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भारत अपनी समुद्री सीमा की सुरक्षा और सामरिक ताकत को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए तैयार है. भारतीय नौसेना जल्द ही अपनी तीसरी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS Aridhaman को बेड़े में शामिल करने जा रही है. 7,000 टन वजनी यह घातक शिकारी K-4 मिसाइलों से लैस है; ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सालगिरह पर कमीशनिंग की तैयारी है. रक्षा सूत्रों के मुताबिक, सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो अप्रैल या मई 2026 तक यह ‘साइलेंट किलर’ समंदर की गहराइयों में अपनी तैनाती दे देगा. इससे भारत की परमाणु त्रि-आयामी क्षमता (थल, जल, वायु से जवाब देने की ताकत) और मजबूत होगी.

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क्यों खास है INS अरिधमन?

भारत के गुप्त एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल प्रोग्राम के तहत बनी यह पनडुब्बी अपनी पिछली दो बहनों INS अरिहंत और INS अरिघात से कहीं ज्यादा बड़ी और घातक है. इसका वजन लगभग 7,000 टन है, जो इसे पहले की पनडुब्बियों के मुकाबले अधिक मारक क्षमता प्रदान करता है. वर्तमान में यह अपने अंतिम समुद्री परीक्षणों से गुजर रही है. हथियारों और प्रणालियों की जांच लगभग पूरी हो चुकी है. INS अरिधमन लंबी दूरी की K-4 बैलिस्टिक मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है, जो दुश्मन के ठिकानों को हजारों किलोमीटर दूर से ही तबाह कर सकती हैं.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की वर्षगांठ के आसपास कमीशनिंग

भारत की तीसरी परमाणु पनडुब्बी INS अरिधमन पनडुब्बी की कमीशनिंग ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सालगिरह के आसपास होने की उम्मीद है. इसे एक बड़े रणनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जो हिंद महासागर में भारत के बढ़ते दबदबे को दर्शाता है. नौसेना प्रमुख ने भी पहले ही संकेत दे दिए थे कि 2026 भारत की समुद्री ताकत के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष होने वाला है. कुल मिलाकर, INS अरिधमन का शामिल होना भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है.

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First published on: Feb 20, 2026 09:52 PM

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