CWG 2026: कौन हैं भारत को 7 गोल्ड मोडल दिलाने वाले खिलाड़ी? बॉक्सिंग रिंग में दम दिखा कॉमनवेल्थ गेम्स में रचा इतिहास
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सात स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं. जानिए साक्षी चौधरी से लेकर अंकुश पंघाल तक उन सात खिलाड़ियों के बारे में, जिन्होंने भारत को गौरवान्वित किया.
Edited By : Versha Singh|Updated: Aug 2, 2026 12:14
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने पूरे खेल जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है. 1 अगस्त का दिन भारत के लिए बेहद सफल दिन साबित हुआ. ग्लास्गो में कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष और महिला वर्ग में भारत के बॉक्सरों ने शानदार खेल दिखाते हुए कुल सात स्वर्ण पदक अपने नाम किए. तेज आक्रामकता, बेहतरीन तकनीक के दम पर भारतीय खिलाड़ियों ने कई मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को मात दी. इसके अलावा जूडोका और पैरा ट्रैक एंड फील्ड एथलीटों ने भी शानदार प्रदर्शन किया.
फाइनल मुकाबलों से पहले तक भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 13 स्वर्ण, 17 रजत और 8 कांस्य पदक सहित कुल 38 पदक अपने नाम कर लिए हैं. इस प्रदर्शन के दम पर भारतीय दल मेडल लिस्ट में चौथे स्थान पर पहुंच गया है. भारत की इस शानदार सफलता में सबसे बड़ा योगदान मुक्केबाजों का रहा, जिन्होंने रिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए सात स्वर्ण पदक जीतकर ग्लासगो में नया इतिहास रच दिया. आइए जानते हैं उन सात भारतीय बॉक्सरों के बारे में, जिन्होंने अपने दमदार खेल से देश का गौरव बढ़ाया.
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जैस्मिन लंबोरिया
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के फाइनल में जैस्मिन लंबोरिया को अपनी प्रतिद्वंद्वी वॉल्श से कड़ी चुनौती मिली, लेकिन मुकाबला आगे बढ़ने के साथ भारतीय मुक्केबाज ने अपने अनुभव और तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया. मौजूदा विश्व चैंपियन जैस्मिन ने एक शानदार पंच लगाते हुए मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत की और गोल्ड मैडल अपने नाम किया. इस जीत के साथ उन्होंने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स के कांस्य पदक से आगे बढ़ते हुए गोल्ड मैडल भी जीत लिया है.
बता दें कि जैस्मिन लंबोरिया हरियाणा के भिवानी की रहने वाली हैं और उनकी उम्र 24 साल है. जैस्मिन का बॉक्सिंग से एक पुराना रिश्ता रहा है. जानकारी के अनुसार, जैस्मिन एशियाई खेलों में दो बार स्वर्ण पदक जीतने वाले महान मुक्केबाज हवा सिंह की पड़पोती हैं. उनके परिवार के कई सदस्य लंबे समय से इस खेल से जुड़े रहे हैं.
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जैस्मिन ने कई मौकों पर बताया है कि बचपन में अपने चाचा संदीप लंबोरिया और परमिंदर लंबोरिया को अभ्यास करते देख उनके अंदर भी मुक्केबाजी के प्रति रुचि पैदा हुई. बाद में महान भारतीय मुक्केबाज मैरी कॉम और विजेंदर सिंह की उपलब्धियों ने उन्हें इस खेल में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया.
पेरिस ओलंपिक 2024 में शुरुआती दौर में मिली निराशाजनक हार के बाद जैस्मिन ने अपने खेल का गंभीर विश्लेषण किया और कोचिंग टीम के साथ मिलकर अपनी तकनीक और बॉक्सिंग स्टाइल में अहम बदलाव किए. इसका सकारात्मक असर जल्द ही देखने को मिला, जब उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर शानदार वापसी की.
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प्रीति पवार
महज 23 वर्ष की प्रीति पवार भारतीय महिला मुक्केबाजी की उभरती हुई सितारों में शामिल हैं. उन्होंने एक और उपलब्धि तब हासिल की, जब उन्हें सीधे भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर नियुक्त किया गया. प्रीति के बॉक्सिंग सफर की शुरुआत 14 साल की उम्र में हुई थी. उनके चाचा विनोद पवार, जो स्वयं राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेता मुक्केबाज रह चुके हैं, ने उन्हें इस खेल की बारीकियां सिखाईं और रिंग तक पहुंचने का रास्ता दिखाया.
प्रीति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है. उनके नाम एशियाई खेलों का कांस्य पदक पहले से दर्ज है. इसके बाद उन्होंने 2025 के वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी दावेदारी और मजबूत की. साल 2026 की शुरुआत में आयोजित एशियन एलीट बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने तीन बार की विश्व चैंपियन और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता हुआंग शियाओ-वेन को हराकर बड़ा उलटफेर किया. प्रीति ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया और भारत के लिए गोल्ड मैडल जीता.
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अंकुश पंघाल
महज 22 साल की उम्र में अंकुश पंघाल ने भारतीय मुक्केबाजी में अपनी अलग पहचान बना ली है. हरियाणा के इस युवा मुक्केबाज ने जूनियर और यूथ स्तर पर लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन करने के बाद सीनियर वर्ग में भी शानदार शुरुआत की. कम समय में उन्होंने अपनी तकनीक, फिटनेस और आक्रामक खेल के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत दावेदारी पेश की.
अंकुश ने साल 2026 की राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप का खिताब जीतकर अपनी बेहतरीन फॉर्म का परिचय दिया. इससे पहले वह वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में रजत पदक जीत चुके थे, जिसने उन्हें बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया. इन लगातार सफलताओं ने उन्हें भारतीय टीम के भरोसेमंद मुक्केबाजों में शामिल कर दिया.
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अंकुश ने अपने पहले ही कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक अपने नाम किया है. इस उपलब्धि ने उन्हें भारतीय मुक्केबाजी के उभरते सितारों में शामिल कर दिया है. खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उनका प्रदर्शन इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले सालों में वह विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर भी भारत के लिए पदक जीतने की प्रबल दावेदारी पेश कर सकते हैं.
अरुंधति चौधरी
राजस्थान के कोटा की 23 वर्षीय अरुंधति चौधरी का खेल सफर बॉक्सिंग से नहीं, बल्कि बास्केटबॉल से शुरू हुआ था. करीब 15 साल की उम्र तक वह जूनियर राज्य स्तरीय बास्केटबॉल खिलाड़ी रहीं. बाद में उनके पिता ने उनकी खेल क्षमता और स्वभाव को देखते हुए उन्हें मुक्केबाजी अपनाने की सलाह दी. उनका मानना था कि बॉक्सिंग अरुंधति के व्यक्तित्व और जुझारूपन के अधिक अनुकूल साबित होगी.
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अरुंधति बचपन से ही बेबाक और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाली खिलाड़ी रही हैं. उन्होंने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि जब भी उन्हें किसी तरह का भेदभाव या पक्षपात महसूस होता था, तो वह उसका खुलकर विरोध करती थीं. उनकी दूसरों से लड़ाई भी हो जाती थी. उनके अनुसार, बचपन से ही गलत बात के खिलाफ खड़े होने का यही स्वभाव आगे चलकर रिंग में भी उनकी सबसे बड़ी ताकत बना.
अरुंधति चौधरी ने साल 2021 में विश्व युवा चैंपियनशिप का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया था. वह किसी भी आयु वर्ग में विश्व चैंपियन बनने वाली राजस्थान की पहली महिला मुक्केबाज बनीं. इसके बाद 2025 के बॉक्सिंग वर्ल्ड कप में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित की और खुद को भारत की शीर्ष मुक्केबाजों में शामिल किया.
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उनका सबसे चुनौतीपूर्ण मुकाबला सेमीफाइनल माना गया. इस मुकाबले में उनका सामना वेल्स की मौजूदा चैंपियन रोजी एक्लेस से हुआ, जो अपने करियर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेल रही थीं. कड़े संघर्ष के बावजूद अरुंधति ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक्लेस को मात दी और फाइनल का टिकट हासिल किया. इससे पहले भी उन्होंने इंग्लैंड की विश्व रैंकिंग में शीर्ष पांच में शामिल अनुभवी मुक्केबाज रीड को हराकर अपनी दावेदारी मजबूत की थी.
प्रिया गंगहास
महज 20 साल की प्रिया गंगहास भारतीय बॉक्सिंग दल की सबसे युवा स्वर्ण पदक विजेताओं में शामिल हैं. हरियाणा के भिवानी से ताल्लुक रखने वाली प्रिया का मुक्केबाजी से गहरा पारिवारिक रिश्ता है. वह भारतीय मुक्केबाज साक्षी चौधरी की चचेरी बहन हैं और दोनों ने अपनी शानदार उपलब्धियों से परिवार के साथ-साथ देश का नाम भी रोशन किया है.
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम रखते ही प्रिया ने अपनी प्रतिभा का दमदार परिचय दिया. उनके प्रदर्शन ने खेल विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा और उन्हें भविष्य की बड़ी स्टार के रूप में देखा जाने लगा. साल 2026 की शुरुआत में आयोजित एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने 60 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की. इस अभियान के दौरान उन्होंने चीन की पूर्व विश्व चैंपियन चेंग्यू यांग जैसी अनुभवी मुक्केबाज को हराकर बड़ा उलटफेर किया.
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भी प्रिया ने अपनी शानदार खेल बरकरार रखा और स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय बॉक्सिंग की नई पीढ़ी की ताकत का परिचय दिया.
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साक्षी चौधरी
हरियाणा के भिवानी की रहने वाली 25 वर्षीय साक्षी चौधरी की सफलता के पीछे संघर्ष और दृढ़ संकल्प की लंबी कहानी है. जूनियर स्तर पर लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन करने के बाद उन्होंने 2021 एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर सीनियर सर्किट में अपनी मजबूत पहचान बनाई. हालांकि, इसके तुरंत बाद कंधे की गंभीर चोट ने उनके करियर की रफ्तार थाम दी. इसी कारण वह 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2023 एशियाई खेलों में हिस्सा नहीं ले सकीं.
मूल रूप से 54 किलोग्राम वर्ग की मुक्केबाज साक्षी को टीम में जगह बनाने के लिए बड़ा जोखिम उठाना पड़ा. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का टिकट हासिल करने के उद्देश्य से उन्होंने अपना वजन घटाकर 51 किलोग्राम वर्ग में खेलने का फैसला किया. इस नए वर्ग में भी उन्होंने एक के बाद एक कठिन मुकाबले जीतकर अपनी क्षमता साबित की. चयन ट्रायल में उन्होंने ज्योति गुलिया, निखत जरीन और मौजूदा विश्व चैंपियन मीनाक्षी हुड्डा जैसी मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को हराते हुए ग्लासगो के लिए क्वालिफाई किया.
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क्वालिफिकेशन के दौरान साक्षी ने स्वीकार किया था कि यह उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण अवसर था. उनके अनुसार, पिछली बार बड़े टूर्नामेंटों से बाहर रह जाने के बाद इस बार चयन हासिल करना उनके लिए किसी भी कीमत पर जरूरी था. उन्होंने पूरी मेहनत और समर्पण के साथ वापसी की तैयारी की और उसका परिणाम कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में देखने को मिला. अपने पहले ही राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर साक्षी ने न केवल शानदार वापसी की, बल्कि भारतीय मुक्केबाजी के इतिहास में अपना नाम भी दर्ज करा दिया.
सचिन सिवाच
हरियाणा के भिवानी निवासी 26 साल के सचिन सिवाच ने महज 10 साल की उम्र में मुक्केबाजी की दुनिया में कदम रखा था. किसान परिवार से आने वाले सचिन को उनके पिता किशन कुमार और मां निर्मला देवी ने बचपन से ही इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.
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Many congratulations to Sachin Siwach on clinching Gold in the Men's 60Kg Boxing event at the #CWG2026. The nation salutes your perseverance, discipline and remarkable talent.
जूनियर और युवा स्तर पर सचिन ने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया. उन्होंने यूथ कॉमनवेल्थ और विश्व युवा चैंपियनशिप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में सफलता हासिल की. हालांकि, सीनियर वर्ग में प्रवेश के बाद शुरुआती सालों में वह अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके और कुछ समय तक सुर्खियों से दूर रहे.
पिछले दो सालों में सचिन ने अपने खेल में उल्लेखनीय सुधार किया है. साल 2025 के वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्होंने 2026 की एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक अपने नाम किया. इन उपलब्धियों ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी. अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का स्वर्ण पदक उनके करियर की सबसे बड़ी सफलताओं में शामिल हो गया है.