महेंद्रगिरि, जो प्रोजेक्ट 17ए की 7-जहाजों वाली श्रृंखला का छठा जहाज है, इसे शुक्रवार मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई ने भारतीय नौसेना को सौंप दिया है. बता दे, प्रोजेक्ट 17ए का पहला जहाज, आईएनएस नीलगिरि , दिसंबर 2024 में नौसेना को सौंपा गया था. छठे जहाज महेंद्रगिरि की डिलीवरी, लीड शिप (नीलगिरि) के 17 महीने से भी कम समय के भीतर की गई है.
इसकी विशेष खासियत यह है कि यह युद्धपोत उन्नत हथियारों, सेंसर और 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री से लैस हैं. यह डिलीवरी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.
प्रोजेक्ट 17ए फ्रिगेट चौतरफा मिशन प्लेटफॉर्म हैं जिन्हें समुद्री क्षेत्र में वर्तमान और उभरती चुनौतियों का समाधान करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह अत्याधुनिक युद्धपोत नौसैनिक डिजाइन, गोपनीयता, मारक क्षमता, स्वचालन और उत्तरजीविता में एक भविष्य के युद्ध के लिए तैयार कर रहा है.
युद्धपोत निर्माण में भविष्य में सेना की आत्मनिर्भरता को नई राह दिखा रहा है, यानी जॉब के साथ-साथ शत प्रतिशत आत्मनिर्भर भारत की तरफ सेना आगे बढ़ रही है. एक ऐसा भी समय था जब एक सुई की जरूरत सेना को पड़ती थी तो हमारी सेना विदेशों पर निर्भर रहा करती है. आज यह भी समय है कि हमारी तीनों सेना अत्याधुनिक आर्म्स का बड़े पैमाने पर निर्माता बन गई है.
बता दें, वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने इसे डिजाइन किया है और वॉरशिप ओवरसीइंग टीम (मुंबई) की देखरेख किए जाने वाले, P17A फ्रिगेट स्वदेशी जहाज डिजाइन, और बेहद गुप्त तरीके से युद्ध क्षमता को तब्दील कर दिया है.
P17A जहाज P17 (शिवालिक-क्लास) की तुलना में अत्याधुनिक हथियार और सेंसर सूट से बनाया गया हैं. इन जहाजों को संयुक्त डीजल या गैस (सीओडीओजी) से कॉन्फिगर किया गया है, जिसमें एक डीजल इंजन और एक गैस टरबाइन शामिल है जो हर एक शॉफ्ट पर एक नियंत्रणीय पिच प्रोपेलर (सीपीपी) और एक अत्याधुनिक एकीकृत प्लेटफार्म प्रबंधन प्रणाली (आईपीएमएस) चलाता है.
शक्तिशाली हथियार और सेंसर सूट में सतह-रोधी, हवा-रोधी और पनडुब्बी-रोधी युद्ध प्रणालियां शामिल हैं. महेंद्रगिरि की डिलीवरी राष्ट्र के डिजाइन, जहाज निर्माण और इंजीनियरिंग कौशल को प्रदर्शित करती है, और जहाज डिजाइन और जहाज निर्माण दोनों में आत्मनिर्भरता पर नौसेना के अविश्वसनीय फोकस को दर्शाती है.
75% की स्वदेशी सामग्री के साथ, इस परियोजना में एमडीएसएल में 200 से अधिक एमएसएमई शामिल हैं और इसने लगभग 4,000 कर्मियों को प्रत्यक्ष रूप से और 10,000 से अधिक कर्मियों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजन करने में सक्षम बनाया है.
महेंद्रगिरि, जो प्रोजेक्ट 17ए की 7-जहाजों वाली श्रृंखला का छठा जहाज है, इसे शुक्रवार मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई ने भारतीय नौसेना को सौंप दिया है. बता दे, प्रोजेक्ट 17ए का पहला जहाज, आईएनएस नीलगिरि , दिसंबर 2024 में नौसेना को सौंपा गया था. छठे जहाज महेंद्रगिरि की डिलीवरी, लीड शिप (नीलगिरि) के 17 महीने से भी कम समय के भीतर की गई है.
इसकी विशेष खासियत यह है कि यह युद्धपोत उन्नत हथियारों, सेंसर और 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री से लैस हैं. यह डिलीवरी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.
प्रोजेक्ट 17ए फ्रिगेट चौतरफा मिशन प्लेटफॉर्म हैं जिन्हें समुद्री क्षेत्र में वर्तमान और उभरती चुनौतियों का समाधान करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह अत्याधुनिक युद्धपोत नौसैनिक डिजाइन, गोपनीयता, मारक क्षमता, स्वचालन और उत्तरजीविता में एक भविष्य के युद्ध के लिए तैयार कर रहा है.
युद्धपोत निर्माण में भविष्य में सेना की आत्मनिर्भरता को नई राह दिखा रहा है, यानी जॉब के साथ-साथ शत प्रतिशत आत्मनिर्भर भारत की तरफ सेना आगे बढ़ रही है. एक ऐसा भी समय था जब एक सुई की जरूरत सेना को पड़ती थी तो हमारी सेना विदेशों पर निर्भर रहा करती है. आज यह भी समय है कि हमारी तीनों सेना अत्याधुनिक आर्म्स का बड़े पैमाने पर निर्माता बन गई है.
बता दें, वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने इसे डिजाइन किया है और वॉरशिप ओवरसीइंग टीम (मुंबई) की देखरेख किए जाने वाले, P17A फ्रिगेट स्वदेशी जहाज डिजाइन, और बेहद गुप्त तरीके से युद्ध क्षमता को तब्दील कर दिया है.
P17A जहाज P17 (शिवालिक-क्लास) की तुलना में अत्याधुनिक हथियार और सेंसर सूट से बनाया गया हैं. इन जहाजों को संयुक्त डीजल या गैस (सीओडीओजी) से कॉन्फिगर किया गया है, जिसमें एक डीजल इंजन और एक गैस टरबाइन शामिल है जो हर एक शॉफ्ट पर एक नियंत्रणीय पिच प्रोपेलर (सीपीपी) और एक अत्याधुनिक एकीकृत प्लेटफार्म प्रबंधन प्रणाली (आईपीएमएस) चलाता है.
शक्तिशाली हथियार और सेंसर सूट में सतह-रोधी, हवा-रोधी और पनडुब्बी-रोधी युद्ध प्रणालियां शामिल हैं. महेंद्रगिरि की डिलीवरी राष्ट्र के डिजाइन, जहाज निर्माण और इंजीनियरिंग कौशल को प्रदर्शित करती है, और जहाज डिजाइन और जहाज निर्माण दोनों में आत्मनिर्भरता पर नौसेना के अविश्वसनीय फोकस को दर्शाती है.
75% की स्वदेशी सामग्री के साथ, इस परियोजना में एमडीएसएल में 200 से अधिक एमएसएमई शामिल हैं और इसने लगभग 4,000 कर्मियों को प्रत्यक्ष रूप से और 10,000 से अधिक कर्मियों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजन करने में सक्षम बनाया है.