शेषनाग ड्रोन बनेगा भारतीय सेना का नया गेमचेंजर, 1000 KM रेंज तक करेगा दुश्मन पर वार

भारत ने पोखरण में शेषनाग-150 स्वॉर्म ड्रोन का सफल परीक्षण कर अपनी सैन्य ताकत को नई दिशा दी है.
एआई और स्वॉर्म तकनीक से लैस यह ड्रोन भविष्य के युद्ध में भारतीय सेना के लिए बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है.

शेषनाग ड्रोन बनेगा भारतीय सेना का नया गेमचेंजर, 1000 KM रेंज तक करेगा दुश्मन पर वार
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मिडिल ईस्ट में ड्रोन के घातक हमलों के बीच भारतीय रक्षा मंत्रालय भी अपनी ताकत को ज्यादा से ज्यादा मजबूत कर रहा है. इसी कड़ी में शेषनाग के आकार जैसा ड्रोन बहुत जल्द सेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा. आपको बता दें कि शेषनाग ड्रोन की सफल टेस्टिंग पोखरण में कर ली गई है. अगर भविष्य में दुश्मन देश नापाक हरकत करने की कोशिश करता है तो 1000 किलोमीटर रेंज की ताकत रखने वाला शेषनाग भारतीय सेना के लिए गेमचेंजर साबित होगा.

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध ने युद्ध की पूरी रणनीति ही बदल कर रख दी थी. इस युद्ध ने पारंपरिक युद्ध को पीछे छोड़ते हुए एयर डिफेंस के जरिए एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले किए. ठीक इसी तरह मिडिल ईस्ट में शुरू हुए युद्ध ने मॉडर्न वॉर की तस्वीर ही बदल दी है. अमेरिका, ईरान और इजरायल के टकराव ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया, क्योंकि इस युद्ध में सबसे ज्यादा ड्रोन और AI आधारित हमले किए गए. यही सब देखते हुए भारतीय रक्षा मंत्रालय ने पोखरण में शेषनाग-150 स्वॉर्मिंग अटैक ड्रोन का सफल परीक्षण कर दुश्मन देशों के साथ दुनिया को भी एक रक्षा संदेश दे दिया है.

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गौर करने वाली बात यह है कि ड्रोन की ताकत के दम पर ही ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को ग्राउंड जीरो पर कड़ी चुनौती दी.

ईरान ने कम कीमत वाले ‘शाहेद’ ड्रोन का इस्तेमाल कर इजरायल को थकाने के साथ युद्ध को लंबा खींचा, वहीं इजरायल ने भी अपनी AI आधारित ‘स्वॉर्म’ ड्रोन तकनीक के जरिए एक साथ हजारों हमले कर ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया.

इसी कड़ी को देखते हुए भारतीय रक्षा मंत्रालय ने पहले से परीक्षण के इंतजार में मौजूद शेषनाग ड्रोन को ट्रायल के लिए आगे बढ़ाया.

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क्या खास है शेषनाग ड्रोन में

इस ड्रोन को NewSpace Research and Technologies ने विकसित किया है और इसकी रेंज 1000 किलोमीटर तक है. इसकी ताकत का राज इसमें मौजूद स्वॉर्म टेक्नोलॉजी है. यानी जैसा नाम, वैसा काम—जिस तरह शेषनाग के कई फन एक साथ हमला कर सकते हैं, उसी तरह कई ड्रोन मिलकर दुश्मन पर हमला करते हैं. इससे दुश्मन का एयर डिफेंस सिस्टम भ्रमित हो जाता है क्योंकि उसे समझ ही नहीं आता कि हमला कहां से हो रहा है.

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यह सेना का पहला ऐसा ड्रोन हो सकता है जो लगातार 6 घंटे तक हवा में रह सकता है और लगभग कई किलो तक पेलोड ले जाने की क्षमता रखता है.

वर्तमान में चल रहे युद्धों ने दुनिया को यह संकेत दे दिया है कि अब युद्ध जमीन, समुद्र या आसमान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि AI तकनीक आधारित होगा. भारतीय रक्षा मंत्रालय ने इसी दिशा में अपनी तैयारी तेज कर दी है.

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