---विज्ञापन---

देश angle-right

राजस्थान के रेगिस्तान में बरसे बादल, तो महाराष्ट्र क्यों है प्यासा? जानें मानसून के इस अनोखे चक्रव्यूह की वजह

यह अजीब विरोधाभास किसानों और मौसम विशेषज्ञों को हैरान कर रहा है कि आखिर क्यों अरब सागर के मुहाने पर बसा राज्य प्यासा है और मरुभूमि में बादल मेहरबान हैं.

---विज्ञापन---

भारत इस समय दक्षिण-पश्चिम मानसून के दोबारा रफ्तार पकड़ने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है. इसी बीच भारत का सबसे सूखा राज्य और थार रेगिस्तान का घर माना जाने वाला राजस्थान जून में सामान्य से कहीं अधिक बारिश से सराबोर हो चुका है. दूसरी ओर, पारंपरिक रूप से मानसून का गढ़ माने जाने वाला महाराष्ट्र इस समय पानी की भारी कमी और सूखे जैसे हालात से जूझ रहा है.

यह अजीब विरोधाभास किसानों और मौसम विशेषज्ञों को हैरान कर रहा है कि आखिर क्यों अरब सागर के मुहाने पर बसा राज्य प्यासा है और मरुभूमि में बादल मेहरबान हैं.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें : Delhi Monsoon 2026: दिल्ली में मॉनसून की एंट्री में देरी, जानें अब कब बरसेंगे बादल? जानिए IMD का अपडेट

जब मानसून ने अपनी ही लय बदल दी

सामान्य परिस्थितियों में जून के महीने में मानसून अरब सागर की शाखा से नमी लेकर केरल, कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में भारी बारिश करता है. इसके विपरीत, राजस्थान को व्यापक बारिश के लिए जून के अंत या जुलाई की शुरुआत तक का इंतजार करना पड़ता है.

---विज्ञापन---

लेकिन साल 2026 के इस मानसून सीजन में मौसम का चक्र पूरी तरह खंडित हो चुका है. इंडिया टुडे ने एक्सपर्ट्स के हवाले से लिखा है, इस बार अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की शाखाएं आपस में तालमेल नहीं बना पा रही हैं. मानसून का यह बिखराव निरंतर प्रवाह बनाने के बजाय हवाओं को टुकड़ों में तोड़ रहा है, जिससे जून के उत्तरार्ध में भी सामान्य पश्चिमी हवाएं हावी हैं.

यह भी पढ़ें : भारत-पाकिस्तान पर एक साथ मंडराया महासंकट! 100 करोड़ लोगों की जिंदगी दांव पर, वैज्ञानिकों की चेतावनी से हिल गई दुनिया

---विज्ञापन---

वो 4 बड़े कारण

‘पश्चिमी विक्षोभ’ का विलन बनना – आमतौर पर सर्दियों में उत्तर भारत और हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और बारिश लाने वाले पश्चिमी विक्षोभ इस साल जून के महीने में भी लगातार सक्रिय हैं. उत्तर भारत से गुजरते हुए इन सिस्टम्स ने अरब सागर से उठने वाली नमी को अपनी ओर खींच लिया. इस वजह से मध्य भारत में जाने वाली नमी का रुख उत्तर-पश्चिम की ओर मुड़ गया और राजस्थान, पंजाब व हरियाणा में आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश दर्ज की गई.

अरब सागर की हवा का खेल – भारतीय मानसून की मुख्य ताकत उन हवाओं की धारा होती है, जो हिंद महासागर से नमी को एक कन्वेयर बेल्ट की तरह भारतीय तटों तक धकेलती है. इस साल यह इंजन अपनी पूरी ताकत हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा है. सैटेलाइट तस्वीरों से साफ है कि पश्चिमी तट पर घने बादलों की वो पट्टियां गायब हैं जो महाराष्ट्र में मूसलाधार बारिश कराती हैं.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें : बारिश में नहीं सूख रहे कपड़े? अपनाएं ये 5 टिप्स, मिनटों में दूर होगी बदबू

मानसून ट्रफ का उत्तर की ओर पलायन – बारिश लाने वाली प्रणालियों का ‘रेलवे ट्रैक’ कही जाने वाली कम दबाव की पट्टी यानी मानसून ट्रफ इस बार अपनी सामान्य स्थिति से खिसककर उत्तर की ओर चली गई है. जब यह ट्रैक उत्तर की ओर शिफ्ट होता है, तो बारिश का पूरा सिस्टम भी हिमालय की तलहटी, पंजाब और राजस्थान की ओर शिफ्ट हो जाता है, जिससे मध्य भारत खाली हाथ रह जाता है.

---विज्ञापन---

शुष्क हवाओं का अभेद्य पहरा – उत्तर-पश्चिम से आने वाली सूखी और गर्म हवाओं ने इस समय मध्य भारत और महाराष्ट्र के ऊपर एक ढक्कन की तरह काम किया है. यह शुष्क हवा सतह पर मौजूद हल्की-फुल्की नमी को भी सोख लेती है और बादलों को ऊंचाई तक बढ़ने नहीं देती, जिससे महाराष्ट्र और गुजरात के ऊपर आसमान पूरी तरह साफ और बादल-मुक्त बना हुआ है.

यह भी पढ़ें : 19 राज्यों में क्यों नहीं बरस रहे बादल? 11 दिन से एक ही जगह अटका मॉनसून; जानें- कौन हैं मॉनसून के 5 ‘विलेन’

---विज्ञापन---

खेतों से लेकर शहरों तक मंडराया संकट

इस मौसमी उलटफेर के परिणाम बेहद गंभीर हैं. महाराष्ट्र देश का एक प्रमुख कृषि राज्य है जो गन्ना, सोयाबीन, कपास और दालों के उत्पादन के लिए जाना जाता है. बारिश में देरी से बुआई का पूरा चक्र प्रभावित हो रहा है. इसके अलावा, मायानगरी मुंबई ने शुरुआती सुस्ती को देखते हुए अभी से जल कटौती और जल प्रबंधन जैसे कड़े उपाय लागू कर दिए हैं, जो पानी के बड़े संकट की ओर इशारा करते हैं.

First published on: Jun 21, 2026 04:08 PM

End of Article
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola