भारत-पाकिस्तान पर एक साथ मंडराया महासंकट! 100 करोड़ लोगों की जिंदगी दांव पर, वैज्ञानिकों की चेतावनी से हिल गई दुनिया

India Pakistan Alert: अटलांटिक महासागर के ‘कोल्ड ब्लॉब’ से भारत-पाकिस्तान का मानसून पैटर्न बदल रहा है. उत्तर-पश्चिम में भारी बारिश और मैदानी भागों में सूखे से 100 करोड़ लोगों पर संकट मंडराया.

Atlantic Ocean Cold Blob Disrupts India-Pakistan Monsoon Pattern

भारत-पाकिस्तान पर एक साथ क्यों मंडराया खतरा?

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रिसर्च से जुड़ी मुख्य जानकारियां:

  • उत्तरी अटलांटिक महासागर का ठंडा पानी (कोल्ड ब्लॉब) भारत और पाकिस्तान के मानसून पैटर्न को बिगाड़ रहा है.
  • वर्ष 1999 के बाद से उत्तर-पश्चिम भारत और पाकिस्तान के क्षेत्रों में मानसून की बारिश में 25 फीसदी का बड़ा उछाल आया है.
  • मुख्य कृषि क्षेत्र यानी इंडो-गैंगेटिक प्लेन में मानसून की कुल बारिश में 4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है.
  • ग्रीनलैंड के दक्षिण-पूर्व में स्थित इस ठंडे क्षेत्र के कारण वैश्विक समुद्री धाराओं का नेटवर्क (AMOC) धीमा हो रहा है.
  • यह नई रिसर्च जर्नल ‘AGU एडवांसेज’ में प्रकाशित हुई है जो मौसम वैज्ञानिकों को बाढ़ और सूखे का सटीक अनुमान देगी.

India Pakistan Crisis: उत्तरी अटलांटिक महासागर में असामान्य रूप से ठंडे पानी का एक विशाल हिस्सा यानी ‘कोल्ड ब्लॉब’ भारत और पाकिस्तान के मौसम चक्र को तेजी से बदल रहा है. लाइव साइंस की एक नई रिसर्च के मुताबिक इस बदलाव के कारण भारत, पाकिस्तान और दक्षिण एशिया के आसपास रहने वाले करीब 1 अरब से ज्यादा लोगों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर संकट मंडरा रहा है. भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून आमतौर पर जून से सितंबर तक सक्रिय रहता है, जो गर्म उत्तरी हिंद महासागर और भूमध्य रेखा के ठंडे समुद्री पानी के तापमान के अंतर से चलता है. लेकिन इस नए समुद्री कनेक्शन के सामने आने के बाद वैज्ञानिकों को दक्षिण एशिया में मौसम के सटीक पूर्वानुमान और जलवायु संबंधी घटनाओं को समझने में एक बहुत बड़ी मदद मिलने की उम्मीद जगी है.

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1999 के बाद मानसून के व्यवहार में आया बड़ा बदलाव

जलवायु वैज्ञानिकों की स्टडी बताती है कि वर्ष 1999 के बाद से भारतीय मानसून के पुराने ढर्रे में एक बहुत बड़ा और चिंताजनक बदलाव आया है. शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि उत्तर-पश्चिम भारत और पाकिस्तान के इलाकों में अब मानसून के मौसम में पहले के मुकाबले 25 फीसदी ज्यादा भारी बारिश रिकॉर्ड की जा रही है. इसके विपरीत देश के सबसे उपजाऊ हिस्से यानी इंडो-गैंगेटिक प्लेन (गंगा के मैदानी इलाकों) में मानसून की बारिश में तकरीबन 4 प्रतिशत की गिरावट आई है. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के जलवायु वैज्ञानिक महेंद्र निम्मकांती के अनुसार यह बदलाव भारतीय किसानों के लिए विनाशकारी साबित हो रहा है, क्योंकि यहां की मिट्टी और फसलें हजारों साल पुराने पारंपरिक वर्षा पैटर्न के हिसाब से ढली हुई थीं.

जलवायु परिवर्तन के चलते सुस्त पड़ रहा है ‘AMOC’

विशेषज्ञों ने मानसून के इस अजीब व्यवहार को अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन यानी एएमओसी में आ रहे बदलावों से जोड़ा है. एएमओसी असल में अटलांटिक महासागर में समुद्री धाराओं का एक विशाल नेटवर्क है जो पूरी दुनिया की जलवायु और उत्तरी गोलार्ध की गर्मी को नियंत्रित करता है. ग्लोबल वार्मिंग के कारण यह सिस्टम अब धीमा हो रहा है और ग्रीनलैंड के दक्षिण-पूर्व में पानी लगातार ठंडा हो रहा है, जिसे ‘कोल्ड ब्लॉब’ कहा गया है. स्टडी के सह-लेखक मैथ्यू ह्यूबर ने बताया कि इस कोल्ड ब्लॉब की वजह से यूरेशिया के ऊपर जेट स्ट्रीम हवाएं तेज हो गई हैं और रूस के यूराल पहाड़ों पर एक ब्लॉकिंग प्रेशर सिस्टम बन गया है, जो समुद्र की नमी वाली हवाओं को जबरन भारत और पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम हिस्से की तरफ खींच रहा है.

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पारंपरिक खेती के लिए खड़ी हुई बड़ी चुनौती

भारत और उसके पड़ोसी देशों की एक बहुत बड़ी आबादी पूरी तरह से खेती-किसानी पर निर्भर है. उत्तर-पश्चिम का इलाका हमेशा से कम पानी और सूखे मौसम की फसलों के लिए जाना जाता था, लेकिन वहां अब सामान्य से बहुत ज्यादा बारिश होने के कारण फसलें पूरी तरह बर्बाद हो रही हैं. दूसरी तरफ अनाज देने वाले मुख्य मैदानी इलाकों में सूखे जैसे हालात पैदा होने से पैदावार घट रही है. एजीयू एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित यह नई रिसर्च दुनिया के मौजूदा क्लाइमेट मॉडल्स की उस कमी को दूर करती है जो समुद्र की सतह के तापमान को पूरी तरह नहीं भांप पाते थे. अब इस खोज की मदद से भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में आने वाली बाढ़ और सूखे का पहले से बेहतर अनुमान लगाया जा सकेगा.

मौसम के बदलावों के बड़े प्रभाव:

  • किसानों के लिए बड़ा संकट: हजारों साल पुराने फसली पैटर्न और मिट्टी की प्रकृति के अचानक बदलने से दोनों देशों की कृषि व्यवस्था लड़खड़ा रही है.
  • हवाओं का बदला रास्ता: यूराल पहाड़ों पर बने नए प्रेशर सिस्टम के कारण मानसूनी हवाएं मैदानी भागों को छोड़कर उत्तर-पश्चिम की ओर मुड़ रही हैं.
  • ग्लोबल वार्मिंग का सीधा असर: आसपास के महासागरों के गर्म होने के बावजूद ग्रीनलैंड के पास पानी का ठंडा होना पर्यावरण असंतुलन को दर्शाता है.
  • सटीक वेदर फोरकास्ट: इस नए समुद्री कनेक्शन की मदद से भारत और पाकिस्तान में मौसम का अधिक सटीक पूर्वानुमान लगाना संभव हो सकेगा.
  • खाद्य सुरक्षा पर खतरा: गंगा के मैदानी इलाकों में बारिश घटने से अनाज उत्पादन और आर्थिक स्थिरता पर सीधा बुरा असर पड़ सकता है.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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