बागी सांसदों और विधायकों की वापसी को लेकर क्या कहता कानून? वापस लौटना चाहते हैं ममता बनर्जी की TMC के MP-MLA

अप्रैल-मई में हुए विधानसभा चुनाव में BJP ने ममता बनर्जी का किला ऐसे ध्वस्त किया कि TMC के सांसद और विधायक बागी हो गए. पार्टी टूट गई और ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर पर दाग लग गया. अब वही बागी सांसद और विधायक वापसी करना चाहते हैं.

Mamata Banerjee

विधानसभा चुनाव 2026 में ममता बनर्जी की पार्टी TMC की बुरी हार हुई थी.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद दोफाड़ हुई ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. TMC नेता कुणाल घोष ने बागी गुट को लेकर बड़ा चौंकाने वाला दावा करके सियासी पारा फिर चढ़ा दिया है. कुणाल घोष कहते हैं कि बागी हुए 6 सांसद और बागी हुए आधे से ज्यादा विधायक वापसी करना चाहते हैं और इसके लिए वे ममता बनर्जी के संपर्क में हैं. वापसी की इच्छा रखने वाले नेताओं का नाम नहीं बताऊंगा, लेकिन इतना कह सकता हूं कि बागी सांसदों और विधायकों को वापस लौटने से रोकने के हरसंभव प्रयास भी किए जा रहे हैं.

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पार्टी प्रमुख की रजामंदी पर निर्भर करेगी वापसी

ऐसे में अगर किसी राजनीतिक दल के सांसद या विधायक बागी होते हैं तो क्या वे पार्टी में वापसी कर सकते हैं? इसका जवाब यह है कि हां बागी सांसद और विधायक वापसी कर सकते हैं. राजनीति में दल-बदलुओं के लिए पार्टियों के दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं, बशर्ते पार्टी हाईकमान उन्हें लेने के लिए राजी हो. इसी तरह अगर बागी सांसद और विधायक वापसी करना चाहें तो उन्हें वापस लेना है या नहीं लेना है, यह भी उस पार्टी के प्रमुख की रजामंदी पर निर्भर करेगा कि वह उन्हें माफ करेंगे या नहीं. पार्टी प्रमुख ही तय करेंगे कि वे पुराने पद पर बने रहेंगे या सामान्य कार्यकर्ता की तरह काम करेंगे.

अयोग्यता वाली याचिका वापस हो तो लौट सकते

बगावत होते ही पार्टी की ओर से बागी सांसदों और विधायकों के जाते ही उनकी सदस्यता को रद्द करने के लिए याचिका डाल दी जाती है. बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष और बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष के पास होता है, लेकिन अगर बागी सांसद-विधायक वापस लौटना चाहें और पार्टी उनके खिलाफ दायर अयोग्यता की याचिका वापस ले तो वे वापस लौट सकते हैं. इसके अलावा अकसर राजनीतिक दल समझौता करके या शर्तों के तहत बागी विधायकों और संसदों को वापस ले लेते हैं, मर्जी से उनसे काम लेते हैं.

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संविधान की 10वीं अनुसूची में वापसी के नियम

बता दें कि बागी सांसदों और विधायकों की पुरानी पार्टी में वापसी संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के अनुसार संभव हो सकती है. दलबदल विरोधी कानून 1985 के अनुसार, अगर किसी बागी सांसद या विधायक को पार्टी ने खुद निष्कासित कर दिया है तो उनकी संसद या विधानसभा की सदस्यता रद्द नहीं होती. ऐसे में वे कानूनी रूप से अयोग्य साबित हुए बिना भी पुरानी पार्टी में वापस लौट सकते हैं, लेकिन काम-जिम्मेदारी पार्टी प्रमुख ही तय करेंगे.

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अगर बागी होकर सांसद, विधायक या नेता खुद पार्टी छोड़ देते हैं या सदन में पार्टी के व्हिप के खिलाफ वोट करते हैं तो अयोग्य करार दिए जा सकते हैं, तब उनकी पार्टी के वापसी संभव नहीं होगी. इसके अलावा अगर बागी सांसद या विधायक ग्रुप में दूसरे दल में जाते हैं और फिर वापस आना चाहते हैं तो उनके पास अपनी कुल संख्या का कम से कम दो-तिहाई (2/3) बहुमत होना चाहिए. अगर बहुमत नहीं है तो उनकी सदस्यता रद्द हो सकती है और वे वापसी नहीं कर पाएंगे.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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