'अगर भारत का विकास होता है तो पड़ोसी देशों का…', बांग्लादेश से विदेश नीति पर क्या बोले विदेश मंत्री जयशंकर?

बांग्लादेश में कई दिनों से चल रहे तनाव के बीच पहली बार विदेश मंत्री जयशंकर का बयान सामने आया है। जयशंकर ने बवाल के बाद बांग्लादेश-भारत संबंध पर पहली बार बयान दिया है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

External Affairs Minister Jaishankar on Bangladesh relations

पड़ोसी देश में युवा नेता उस्मान हादी की मौत के बाद हालात बिगड़े हुए हैं। कई दिनों तक हिंसक प्रदर्शन चला था। हालांकि पूर्व पीएम खालिदा जिया की मौत के बाद कुछ शांति है लेकिन इस बीच भारत-बांग्लादेश के संबंधों में काफी खटास आई है। हाल ही विदेश मंत्री जयशंकर बांग्लादेश गए भी थे। अब एक इंटरव्यू में विदेश मंत्री ने बांग्लादेश पर बयान दिया है।

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दरअसल, विदेश मंत्री जयशंकर शुक्रवार को तमिलनाडु स्थित आईआईटी मद्रास में एक कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां बांग्लादेश में अशांति और भारत की पड़ोसी नीति के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि मैं 2 दिन पहले ही बांग्लादेश की पूर्व पीएम बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में बांग्लादेश गया था। कहा कि हमें कई तरह के पड़ोसी मिले हैं।

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कहा कि अगर आपका कोई पड़ोसी आपके साथ अच्छा व्यवहार करता है या कम से कम आपको नुकसान नहीं पहुंचाता है, तो आपकी स्वाभाविक प्रवृत्ति उस पड़ोसी के प्रति दयालु होने, उसकी मदद करने की होती है, और एक देश के रूप में हम यही करते हैं। कहा कि यही संदेश मैंने बांग्लादेश को भी दिया है।

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विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि जब आप हमारे आस-पड़ोस पर नजर डालते हैं, तो जहां भी अच्छे पड़ोसी होने का भाव है, भारत निवेश करता है, भारत मदद करता है, भारत सहयोग करता है। हम कोविड के बारे में बात कर रहे थे। हमारे अधिकांश पड़ोसी देशों को भारत से टीकों की पहली खेप मिली। कहा कि कुछ पड़ोसी देशों ने असाधारण तनाव का सामना किया, जिनमें से एक उल्लेखनीय देश श्रीलंका था, हमने वास्तव में 4 अरब डॉलर के पैकेज के साथ उनकी मदद की, उस समय जब IMF के साथ उनकी बातचीत बहुत धीमी गति से चल रही थी।

एस जयशंकर ने कहा कि जब हम ‘वसुधैव कुटुंबकम’ शब्द का प्रयोग इतनी सहजता से करते हैं, तो वास्तव में उस शब्द का संदेश क्या है? इसका अर्थ यह है कि हमने कभी भी दुनिया को शत्रुतापूर्ण या प्रतिकूल वातावरण नहीं माना है जिससे हमें रक्षात्मक रूप से खुद को बचाना पड़े।

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यदि आप सीमित संसाधनों के साथ समस्या-समाधान की स्थिति में हैं, तो आप अधिकतम प्रभाव कैसे डाल सकते हैं? यही वह समस्या है जिसका समाधान करना आवश्यक है। आज भारतीय विदेश नीति और कूटनीति में हम जो करने का प्रयास करते हैं, वह वास्तव में इसी समस्या का समाधान करना है, और हम ऐसा अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता, अपनी शक्तियों का उपयोग करके, अन्य संस्थानों और संभावनाओं का लाभ उठाकर करने का प्रयास करते हैं।

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लेखक के बारे में

Raghav Tiwari

Raghav Tiwari

राघव तिवारी न्यूज24 में शिफ्ट हेड की भूमिका निभा रहे हैं। यहां टीम प्रबंधन के साथ नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, क्राइम आदि की खबरें भी कवर करते हैं। इससे पहले ये अमर उजाला, नईदुनिया, नवभारत टाइम्स (NBT) और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में रिपोर्टिंग कर चुके हैं। देवभूमि उत्तराखंड, इंदौर, नोएडा, कानपुर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में काम करने की वजह से राघव भिन्न-भिन्न कल्चर, खानपान, व्यवहार, जरूरत की समझ रखते हैं। राघव तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की शिक्षा पूरी की है। शिकायत और सुझाव के लिए स्वागत है- Mail ID: raghav.tiwari@bagconvergence.in Contact No. 8840671098
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