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राहुल गांधी को कैसे मिली पूर्व आर्मी चीफ की अनपब्लिश्ड बुक? जिससे संसद में मचा हंगामा

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने 2020 और 2024 के बीच 35 किताबों को मंजूरी दी है, 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' अकेली ऐसी किताब है, जिसे मंजूरी नहीं दी गई.

Author Edited By : Arif Khan
Updated: Feb 9, 2026 19:49
इस किताब का प्रकाशक 'पेंगुइन रैंडमहाउस इंडिया' है.

पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर संसद में हंगामा मचा हुआ है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी, उस किताब का जिक्र अपने भाषण में करना चाहते हैं, जबकि स्पीकर और सत्ता पक्ष का कहना है कि जो किताब पब्लिश ही नहीं हुई, उसका जिक्र नियमों के मुताबिक नहीं किया जा सकता.

बजट सत्र के दौरान, जब प्रधानमंत्री मोदी बजट के बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ पेश करने वाले थे, तब राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की किताब पर आधारित मैगजीन में छपे एक लेख का जिक्र लोकसभा में किया. इस पर लोकसभा में जमकर हंगामा हुआ. राहुल गांधी को बोलते हुए बमुश्किल पांच मिनट ही हुए थे कि गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उस कंटेंट को लेकर ऐतराज जताया था. उन्होंने कहा कि जो बुक पब्लिश ही नहीं हुई, उसके कंटेंट का जिक्र नहीं कर सकते.

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फिर दो दिनों के भीतर, राहुल गांधी जनरल नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ की एक कॉपी लहराते हुए संसद पहुंचे और कहा कि वह इसे प्रधानमंत्री को गिफ्ट में देंगे.

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस किताब को साल 2024 में रिलीज किया जाना था. इसके लिए प्री-ऑर्डर लिए जा रहे थे, ऑनलाइन प्री-बुकिंग की जा रही थी. हालांकि, इसके लॉन्च को रोक दिया गया था. इसके बाद से किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है. अभी इस किताब की टाइपस्क्रिप्ट या मैन्युस्क्रिप्ट रक्षा मंत्रालय के पास मंजूरी के लिए लंबित है. अब सवाल है कि कोई किताब जब रक्षा मंत्रालय के पास मंजूरी के लिए लंबित है, तो फिर प्रकाशित कैसे हुई और आखिर राहुल गांधी को इसकी पब्लिश कॉपी कैसे मिल गई.

यह भी पढ़ें : राहुल गांधी ने कौन सा नियम तोड़ा? संसद में किताब ‘कोट’ करने के कड़े नियम, गलती पड़ सकती है सदस्यता पर भारी

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने साल 2020 और 2024 के बीच 35 किताबों को मंजूरी दी है, ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ अकेली ऐसी किताब है, जिसे मंजूरी नहीं दी गई.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि हो सकता है कि किताब पहले पब्लिश हो गई हो और उसे बुकस्टोर्स पर पहुंचा दिया गया, जिसे बाद में वापस मंगवा लिया गया. रिपोर्ट में यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या पब्लिशर ने रक्षा मंत्रालय से अप्रूवल लेकर जनरल नरवणे की किताब प्रिंट करके बुकस्टोर्स को भेजी थी? या रक्षा मंत्रालय की तरफ से कोई चूक हुई, जिसके बाद पब्लिशर से कॉपी वापस मंगाने को कहा गया?

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बता दें, पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने सेना में अपने चार दशक के अनुभव को इस किताब में लिखा है. उन्होंने अपने सेकंड लेफ्टिनेंट से लेकर जनरल तक के सफर के बारे में इस किताब में बताया है. इस किताब का प्रकाशक ‘पेंगुइन रैंडमहाउस इंडिया’ है.

First published on: Feb 09, 2026 07:18 PM

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