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जहाज को गिरफ्तार करने का क्या मतलब है? आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश से समझिए पूरा गणित

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कानूनी विवाद के एक मामले में विशाखापट्टनम पोर्ट पर खड़े विदेशी जहाज MV Polar Star को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है. जहाज पर करोड़ों रुपये का बकाया भुगतान ना करने का आरोप है.

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Edited By : Varsha Sikri Updated: Mar 7, 2026 17:41
Andhra Pradesh High Court
Credit: AI

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में विशाखापट्टनम पोर्ट पर खड़े विदेशी कार्गो जहाज MV Polar Star को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है. ये कार्रवाई एक कानूनी विवाद की वजह से की गई है. जहाज से जुड़ी कंपनी पर करोड़ों रुपये का बकाया भुगतान ना करने का आरोप लगाया गया है. मामले के मुताबिक, एक शिप मैनेजमेंट कंपनी ने अदालत में शिकायत की थी कि उसने जहाज के संचालन और प्रबंधन से जुड़ी सेवाएं दी थीं, लेकिन इसके बदले उसे तय भुगतान नहीं मिला. कंपनी का कहना है कि जहाज के मालिकों ने करीब 8 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 7 से 8 करोड़ रुपये) का भुगतान अभी तक नहीं किया है. जब कई बार भुगतान की मांग करने के बाद भी पैसा नहीं मिला, तब कंपनी ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में मामला दर्ज कराया. इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई की और जहाज को बंदरगाह से बाहर जाने से रोकने का आदेश दे दिया.

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जहाज को गिरफ्तार करने का क्या मतलब है?

ये सुनकर कई लोगों को लगता है कि जैसे किसी इंसान को गिरफ्तार किया जाता है, वैसे ही जहाज को भी पकड़ लिया गया है. लेकिन समुद्री कानून में इसका मतलब थोड़ा अलग होता है. किसी जहाज को गिरफ्तार करने का मतलब होता है कि उसे बंदरगाह पर रोक दिया जाता है. यानी जहाज तब तक वहां से नहीं जा सकता जब तक मामला सुलझ नहीं जाता या बकाया रकम का भुगतान नहीं हो जाता. इस दौरान जहाज के मालिक को अदालत के आदेश का पालन करना पड़ता है. अगर वो पैसा जमा कर देता है या उतनी राशि की बैंक गारंटी दे देता है, तो जहाज को जाने की इजाजत मिल सकती है.

विदेशी जहाज पर भी लागू होता है भारत का कानून

भले ही MV Polar Star एक विदेशी जहाज है, लेकिन जब कोई जहाज भारत के किसी बंदरगाह पर आता है तो उस पर भारत के कानून लागू होते हैं. इसलिए भारतीय अदालत को ऐसे मामलों में फैसला देने का अधिकार होता है. समुद्री व्यापार में इस तरह के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, जहां भुगतान विवाद या बाकी कानूनी मामलों में जहाज को रोक दिया जाता है. अब जहाज के मालिकों के पास दो विकल्प हैं. पहला, वो कंपनी को बकाया रकम का भुगतान कर दें. दूसरा, वो अदालत में उतनी राशि की बैंक गारंटी जमा कर दें. अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो जहाज को विशाखापट्टनम पोर्ट पर ही रोके रखा जा सकता है. इससे जहाज के संचालन और व्यापार पर भी असर पड़ सकता है.

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First published on: Mar 07, 2026 05:27 PM

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