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PM आवास के बाहर राहुल गांधी के धरने में अचानक कैसे पहुंच गए थे अखिलेश यादव? सपा चीफ ने खुद बताया

अखिलेश यादव ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए बताया कि वो अचानक पीएम आवास के बाहर धरने पर बैठे कांग्रेस नेताओं का साथ देने क्यों पहुंचे थे.

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मंगलवार को जो पीएम आवास के बाहर हंगामा हुआ, वो सभी ने देखा. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के कई दिग्गज नेता वहां अचानक धरना देने के लिए इकट्ठा हो गए. उनका साथ देने के लिए समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी पहुंचे. जिसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव समेत कई नेताओं को कुछ घंटे के लिए हिरासत में लिया गया और बाद में उन्हें रिहा कर दिया. अखिलेश यादव ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए बताया कि वो अचानक वहां क्यों आए थे.

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क्या बोले अखिलेश?

समाजवादी पार्टी चीफ अखिलेश यादव ने कहा- ”ये सच है कि हमें जानकारी नहीं दी गई थी, लेकिन जब कांग्रेस ने बुलाया, तो हमने अपना सारा काम छोड़ दिया और जो भी सांसद जा सकते थे, वो साथ गए. हम तालमेल बेहतर करेंगे. इसे और बेहतर होना चाहिए. सोचिए सरकार कितनी कमज़ोर है कि वो अपने ही मंत्रियों और सहयोगियों से इस्तीफा भी नहीं ले पा रही है. कम से कम सरकार को ये तो मानना ​​ही चाहिए कि हां, गलती हुई है.”

संसद में अखिलेश ने क्या कहा?

संसद के मानसून सत्र के दौरान अखिलेश यादव ने नीट पेपर लीक मामले पर आवाज़ बुलंद की. उन्होंने कहा- ”ये मुद्दा समाजवादी पार्टी, कांग्रेस या बीजेपी का नहीं है. ये मुद्दा युवाओं और छात्रों का है. क्या सरकार हमारी बेटियों से बदसलूकी करेगी? आप सदन में युवाओं के लिए आवाज़ क्यों नहीं उठा सकते?” उन्होंने आगे कहा- ”हमें प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा. हम महिलाओं के सम्मान के लिए सड़कों पर उतरेंगे.”

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‘कांग्रेस से कोई कड़वाहट नहीं’

अखिलेश यादव ने अपने एक और बयान में कहा- ”जो सरकारें इतने सालों से सत्ता में हैं, अगर वो एक भी मेडिकल कॉलेज को ठीक से नहीं चला सकतीं, तो वो छात्रों को क्या भरोसा दिला सकती हैं? हमारे सामने विपक्षी दलों के बीच तालमेल का मुद्दा है. आज के सोशल मीडिया के दौर में जानकारी तुरंत फैल जाती है, जिससे उसे वापस लेने या सुधारने की कोई गुंजाइश नहीं रहती. विधानसभा चुनावों को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच मतभेदों की कुछ अटकलें हो सकती हैं, लेकिन कोई कड़वाहट नहीं है. पर्सनल सोच अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मुद्दे वही रहते हैं. युवाओं, छात्रों, NEET परीक्षा, बेरोजगारी, महंगाई और किसानों से जुड़ी चिंताएं हम सभी के लिए एक जैसी हैं.”

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First published on: Jul 22, 2026 04:36 PM

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