भारतीय भुगतान परिषद ने शुक्रवार को कहा कि भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन के बावजूद उपभोक्ता और छोटे कारोबारी एकीकृत भुगतान प्रणाली यूपीआई का इस्तेमाल किसी शुल्क के बगैर करते रहेंगे. यह बयान लोकसभा में संशोधन विधेयक पारित होने के एक दिन बाद आया है, जिसमें सरकार को यूपीआई सहित अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है.
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सरकार ने क्या कहा?
पीसीआई ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि 2016 में शुरू होने के बाद से यूपीआई उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रहा है और आगे भी बिना किसी लेनदेन शुल्क के डिजिटल भुगतान जारी रहेगा. परिषद ने यह भी साफ किया कि किराना दुकानों सहित छोटे व्यापारियों को यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट शुल्क नहीं देना होगा. इसके साथ ही पीसीआई ने कहा कि भविष्य में यदि बड़े कारोबारियों पर मर्चेंट सेवा शुल्क लगाया जाता है, तब भी यूजर्स को यूपीआई इस्तेमाल करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा.
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परिषद ने साफ किया कि जहां भी लागू हो, एमडीआर शुल्क व्यापारी और भुगतान सेवा प्रदाताओं के बीच व्यावसायिक व्यवस्था होती है और इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ता है.
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वित्त मंत्री ने क्या कहा था?
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा था कि एमडीआर शुल्क ग्राहकों पर नहीं, बल्कि कारोबारियों पर लागू होता है और इससे मिलने वाली राशि का उपयोग बैंक और वित्तीय-प्रौद्योगिकी कंपनियां अवसंरचना एवं सुरक्षा सुधार में करती हैं. उन्होंने कांग्रेस नेता जयराश रमेश के उस दावे को भी खारिज किया था, जिसमें कहा गया था कि आम लोगों पर यूपीआई इस्तेमाल का बोझ बढ़ सकता है.
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