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गैस किल्लत का सबसे ज्यादा प्रभाव डिफेंस सेक्टर पर, रसायन-प्लास्टिक उत्पादन में आई गिरावट

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रुकने का नाम नहीं ले रहा है. इसी बीच भारत में प्राकृतिक गैस की भी भारी किल्लत होना शुरू हो चुकी है. रेस्टोरेंट, ढाबा के बंद होने के संकट के बीच अब औद्योगिक उत्पादन, विशेष तौर पर डिफेंस सेक्टर में भी अब संकट के बादल छाने शुरु हो चुके हैं.

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Written By: Pawan Mishra Updated: Mar 20, 2026 21:59

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रुकने का नाम नहीं ले रहा है. इसी बीच भारत में प्राकृतिक गैस की भी भारी किल्लत होना शुरू हो चुकी है. रेस्टोरेंट, ढाबा के बंद होने के संकट के बीच अब औद्योगिक उत्पादन, विशेष तौर पर डिफेंस सेक्टर में भी अब संकट के बादल छाने शुरु हो चुके हैं.

कच्चे माल की कीमत में लगातार बढ़ोत्तरी और सप्लाई में देरी के कारण कई फैक्ट्री बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं. जबकि अन्य क्षेत्रों में उत्पादन 30-50% तक कम हो गया है.

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न्यूज 24 को जानकारी देते हुए रक्षा उद्योग से जुड़े कुछ लोगों ने बताया कि गैस कि किल्लत का सबसे ज्यादा प्रभाव डिफेंस सेक्टर पर भी पड़ रहा है क्योंकि रसायन और प्लास्टिक उत्पादन लगभग अब बंद होने के कगार पर हैं. ईंधन की कमी के कारण रसायन और प्लास्टिक उत्पादन या तो बंद हो गया हैं या अपनी क्षमता से कम काम कर रहा है.

भारत के एलएनजी आयात का 55-65% और एलपीजी का लगभग 90% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है, लड़ाई के कारण जितना डिमांड है वह पूरा नहीं हो पा रहा है. आपको बता दें कि पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड ने कतर से आपूर्ती बंद होने के बाद फोर्स मेज्योर लागू किया है, जिससे देश की 40% LNG सप्लाई प्रभावित हुई है.

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First published on: Mar 20, 2026 09:59 PM

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