दिल्ली-एनसीआर में बीते कुछ दिनों से लगातार बारिश देखने को मिल रही है. वहीं, बीते सोमवार 10 अगस्त को भी दिल्ली-NCR में झमाझम बारिश हुई. वहीं, आज भी दिल्ली-NCR में बारिश होने की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग ने राजधानी समेत आस-पास के इलाकों में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है. अगस्त की शुरुआत में बारिश के इस बदले तेवर ने लोगों को हैरान कर दिया है. लगातार हो रही बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे मौसम में ठंडक महसूस हो रही है. हालांकि, तेज बारिश ने कई इलाकों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं. सड़कों पर पानी भरने के साथ कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ है और लोगों को लंबे जाम में भी फंसना पड़ रहा है.

बारिश ने तोड़ा 15 साल का रिकॉर्ड

दिल्ली में अगस्त 2026 के पहले सात दिनों में 127 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 2011 के बाद इस अवधि की सबसे ज्यादा बारिश है. लगातार सक्रिय मानसून और अनुकूल मौसमी परिस्थितियों के चलते राजधानी में भारी बारिश हुई. दिल्ली में हुई भारी बारिश ने पिछले 15 सालों का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अगस्त के शुरुआती दिनों में दिल्ली-एनसीआर ही नहीं, बल्कि उत्तर भारत के कई हिस्सों में इतनी ज्यादा बारिश क्यों हो रही है? इसके पीछे कौन से मौसमी सिस्टम सक्रिय हैं और लगातार बारिश का यह सिलसिला आखिर कब तक जारी रहेगा?

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सात दिनों में 127 मिमी बारिश हुई दर्ज

राजधानी दिल्ली में अगस्त की शुरुआत इस बार सामान्य से कहीं ज्यादा बारिश के साथ हुई है. महीने के पहले सात दिनों में ही सफदरजंग मौसम केंद्र पर 127 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. यह अगस्त के शुरुआती सप्ताह में साल 2011 के बाद सबसे ज्यादा बारिश है. लगातार हुई बारिश ने जहां उमस और गर्मी से राहत दी, वहीं कई इलाकों में जलभराव और यातायात की परेशानी भी सामने आई.

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मौसम विभाग ने क्या कहा?

वहीं, मौसम विभाग के अनुसार, इसके पीछे एक साथ सक्रिय हुए कई मौसमी सिस्टम जिम्मेदार हैं. इस दौरान मानसून ट्रफ सामान्य से अधिक सक्रिय रही. इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आस-पास के क्षेत्रों में कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. इस सिस्टम से जुड़े चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic circulation) ने भी वातावरण में नमी बढ़ाई है. इन परिस्थितियों के बीच अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं को भी दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत में पर्याप्त नमी मिली. नमी और अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण बादलों का निर्माण तेजी से हुआ और कई इलाकों में कम समय में तेज बारिश देखने को मिली. उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय एक पश्चिमी विक्षोभ ने भी इस मौसम प्रणाली को मजबूत करने में भूमिका निभाई.

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मौसम में बदलाव से बढ़ी बारिश

दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत में लगातार हो रही तेज बारिश के पीछे कई मौसमी सिस्टम एक साथ काम कर रहे हैं. मौसम जानकारों के मुताबिक, इस समय कई वायुमंडलीय परिस्थितियां एक साथ बनी हुई हैं, जिसकी वजह से बारिश का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है.

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NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने बताया, इस समय कई मौसम प्रणालियां एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर रही हैं. पश्चिम बंगाल और गंगा के मैदानी इलाकों के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic circulation) अब कम दबाव वाले क्षेत्र में बदल रहा है. इसके कारण बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी वाली हवाएं उत्तर-पश्चिम भारत की तरफ पहुंच रही हैं. इन हवाओं का असर दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में देखने को मिल रहा है.

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मौसम विभाग ने भी बारिश के पीछे इन मौसमी परिस्थितियों की पुष्टि की है. IMD के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और उसके आस-पास कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. इसके साथ ही एक चक्रवाती परिसंचरण भी सक्रिय है, जो समुद्र तल से करीब 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है. यही सिस्टम लगातार नमी खींच रहा है और कई इलाकों में भारी बारिश की स्थिति बना रहा है.

क्या होता है मानसून ट्रफ?

मौसम विभाग के मुताबिक, इस समय एक मानसून ट्रफ भी सक्रिय है. यह ट्रफ राजस्थान के गंगानगर से शुरू होकर दिल्ली, दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश, रांची और दीघा होते हुए बंगाल की खाड़ी तक जा रही है. इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के पास बना कम दबाव का क्षेत्र भी इस मौसम सिस्टम का हिस्सा है.

मानसून ट्रफ को आसान भाषा में समझें तो यह कम दबाव का एक लंबा क्षेत्र होता है, जहां से बारिश वाले बादलों और नमी को आगे बढ़ने में मदद मिलती है. अभी इसका एक हिस्सा दिल्ली के ऊपर से गुजर रहा है. यही वजह है कि राजस्थान से लेकर बंगाल की खाड़ी तक बने मौसम सिस्टम का असर दिल्ली-एनसीआर पर भी पड़ रहा है. ट्रफ के इस रास्ते पर होने से बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी लगातार उत्तर भारत तक पहुंच रही है. इसके चलते दिल्ली और आस-पास के इलाकों में बादल बने हुए हैं और बारिश का दौर रुक-रुककर या कई जगह लगातार जारी है.

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ने भी बढ़ाई बारिश

दिल्ली-एनसीआर में बारिश का एक कारण वेस्टर्न डिस्टर्बेंस भी है. मौसम विभाग के मुताबिक, इस समय ऊपरी वायुमंडल में एक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय है. यह करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है और इसका असर उत्तर भारत के मौसम पर पड़ रहा है.

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक तरह की मौसम प्रणाली है, जो पश्चिम से आती है और हिमालय के आस-पास के इलाकों को प्रभावित करती है. फिलहाल इसका असर दिल्ली के उत्तर में बना हुआ है. जब यह सिस्टम मानसून से आने वाली नमी वाली हवाओं के साथ मिल जाता है, तो वातावरण में बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं. यही वजह है कि कई इलाकों में बारिश सिर्फ तेज ही नहीं हो रही, बल्कि लंबे समय तक भी जारी है. वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और मानसून की हवाओं के इस मेल ने उत्तर भारत में बारिश का असर और बढ़ा दिया है.

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दिल्ली तक ही सीमित नहीं बारिश का असर

बारिश का असर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा. दिल्ली-NCR के कई हिस्सों में भारी बारिश के कारण सड़कों पर पानी भर गया और यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई. गुरुग्राम और नोएडा जैसे इलाकों में भी कई प्रमुख मार्गों पर जलभराव की स्थिति बनी. लगातार बारिश के कारण लोगों को रोजमर्रा के कामकाज और आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा.

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सफदरजंग में शनिवार को 24 घंटे के दौरान 98.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो दो साल में दिल्ली में एक दिन में हुई सबसे अधिक बारिश थी. इससे साफ है कि इस बार मानसून की गतिविधि सामान्य बारिश के बजाय कुछ ज्यादा सक्रिय रही है. मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी दिल्ली-NCR में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है.