देश की राजधानी दिल्ली में 18 अप्रैल को पिछले 14 वर्षों में अप्रैल के महीने में सबसे ज्यादा बारिश देखने को मिली. पालम वेधशाला में महज 24 घंटे के भीतर 19mm बारिश दर्ज की गई, जिसने 2012 के बाद का सबसे बड़ा रिकॉर्ड तोड़ा है. दिल्ली-एनसीआर में शुक्रवार शाम को तेज हवा के साथ भारी बारिश हुई.
गर्मी के बीच कैसे बरसे बादल?
सवाल यह है कि जब सूरज आग उगल रहा था, तब यह मूसलाधार बारिश आई कहां से? इसके पीछे दो बड़ी मौसमी ताकतों का हाथ है – ‘पश्चिमी विक्षोभ’ और ‘हीट कन्वेक्शन’. भूमध्य सागर से उठी नमी की एक पतली परत दिल्ली के आसमान तक तो पहुंच गई थी, लेकिन उसमें बरसने की ताकत नहीं थी. यहां दिल्ली की ‘हीट आइलैंड’ वाली गर्मी ने ‘स्पार्क’ का काम किया. जमीन से उठी भीषण गर्म हवा किसी लिफ्ट की तरह उस नमी को आसमान में ऊपर ले गई, जहां वह तेजी से संघनित होकर बादलों में बदल गई. इसे वैज्ञानिकों की भाषा में ‘हीट-ट्रिगर स्टॉर्म’ कहा जाता है.
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सिर्फ दिल्ली में ही बारिश क्यों?
अब सवाल यह भी है कि यह बारिश पूरे उत्तर भारत में नहीं, बल्कि दिल्ली के कुछ खास इलाकों में हुई. इसकी वजह है दिल्ली का कंक्रीट का जंगल. यहां की सड़कें, इमारतें और सघन आबादी गर्मी को सोखकर ‘हीट आइलैंड’ बना देती हैं. जहां गर्मी सबसे ज्यादा थी, नमी वहीं बारिश बनकर बरसी. यही वजह है कि यह पूरी तरह से एक ‘लोकल’ मौसमी घटना बनकर रह गई.
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लू की वापसी का अलर्ट
मौसम विभाग के मुताबिक, यह राहत थोड़े समय के लिए है. जैसे ही बारिश की नमी सूखेगी, सूरज फिर से अपना रौद्र रूप दिखाएगा. शनिवार से ही तापमान के वापस 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाने का अनुमान है. बारिश के वजह से हवा में जो नमी बची है, वह शुरू में भारी ‘उमस’ पैदा करेगी, जिससे गर्मी का अहसास और ज्यादा बढ़ जाएगा. अप्रैल के आखिरी हफ्ते में चलने वाली झुलसा देने वाली ‘लू’ अब और भी आक्रामक तरीके से वापसी करने को तैयार है.










