प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में 33,500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करते हुए पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित अपमान को लेकर तीखा प्रहार किया. उन्होंने इसे न केवल राष्ट्रपति पद की गरिमा का उल्लंघन बताया, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की भावना पर भी चोट ठहराया.
राष्ट्रपति मुर्मू का हुआ अपमान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनके ‘दिल को गहरी चोट लगी है’. उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कल पश्चिम बंगाल में संथाल आदिवासी समुदाय के महत्वपूर्ण उत्सव में राष्ट्रपति मुर्मू को जानबूझकर बहिष्कृत किया गया. स्वयं आदिवासी पृष्ठभूमि से आने वाली राष्ट्रपति जी का इस तरह अपमान नारी शक्ति और आदिवासी समाज के सम्मान पर सीधा प्रहार है.
क्या है विवाद की जड़?
शनिवार को राष्ट्रपति मुर्मू उत्तर बंगाल के बागडोगरा हवाई अड्डे के निकट गोशाईपुर में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में पहुंचीं, जो मूल रूप से सिलीगुड़ी के बिधाननगर में होना था. कार्यक्रम स्थल पर कम भीड़, अपर्याप्त व्यवस्था और प्रोटोकॉल उल्लंघन पर उन्होंने खुली नाराजगी जताई. उन्होंने दुख व्यक्त किया कि न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उपस्थित हुईं, न ही कोई मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी ने उनका स्वागत किया. केंद्रीय सरकार ने राज्य से शाम पांच बजे तक प्रोटोकॉल, स्थल और मार्ग व्यवस्था संबंधी उल्लंघनों पर स्पष्टीकरण मांगा है.
टीएमसी पर सीधी चोट
पीएम मोदी ने टीएमसी सरकार पर अहंकार का आरोप लगाते हुए कहा कि संथाल समुदाय के लिए राष्ट्रपति की चिंता को उन्होंने बदइंतजामी का शिकार बना दिया. ‘यह संविधान की स्प्रिट, लोकतंत्र की परंपरा और संघर्षशील महिलाओं का अपमान है. पश्चिम बंगाल की जनता, आदिवासी समाज और नारी शक्ति टीएमसी को कभी माफ नहीं करेगी.’ उन्होंने आह्वान किया कि ऐसी गंदी राजनीति जल्द चूर-चूर हो जाएगी.
ममता का पलटवार
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर राष्ट्रपति को राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि चुनावी दौर में बार-बार दौरे राजनीति से प्रेरित लगते हैं, लेकिन राज्य सरकार आदिवासी कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है. केंद्र ने शौचालय में पानी की कमी और काफिले मार्ग पर कचरे जैसे मुद्दों पर भी नाराजगी जताई है.