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चुनाव में बंगाल पुलिस ने नहीं किया CRPF का सहयोग, बस की जगह दिए गए ट्रक – सूत्र

सीआरपीएफ के जवान जानवरों की तरह आर्म्स के साथ ट्रक भर-भर के निकल पड़ते थे. सीआरपीएफ का सिर्फ एक ही मकसद था कि परेशानी चाहे कितनी भी आ जाये, सुरक्षा में कोई कोताही नहीं बरतनी है, और ग्राउंड जीरो पर हुआ भी कुछ ऐसा ही.

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Written By: Pawan Mishra Updated: Apr 29, 2026 22:51

बंगाल विधानसभा चुनाव की जंग आज खत्म हो गई है. अब सभी सियासी पार्टियां नतीजों का इंतजार कर रही हैं. पैरा मिलिट्री की सबसे बड़ी बटालियन की तैनाती की गई है. बंगाल में जैसे ही पैरा मिलिट्री फोर्स की इंट्री होती है, राज्य सरकार इनका कड़ा विरोध करना शुरू कर देती है. कई विधानसभा इलाके में हिंसक झड़प की खबरें सामने आईं. लेकिन पैरा मिलिट्री ने सूझ-बूझ दिखाते हुए शांतिपूर्ण तरीके से मतदान करवा दिया. खुफिया एजेंसियों ने पहले से ही अति संवेदनशील बूथों को पैरा मिलिट्री बलों के हवाले कर दिया था, यह साफ संदेश था कि किसी भी तरह से कोई अप्रिय घटना ना हो पाए.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पैरा मिलिट्री का खुल कर विरोध किया था. लेकिन चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण तरीके से मतदान निपटाने का हवाला देते हुए पैरा मिलिट्री की तैनाती को ठीक बताया.

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इस बीच सीआरपीएफ के शीर्ष सूत्रों ने बताया कि पश्चिम बंगाल में ड्यूटी के दौरान पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस की तरफ से कोई सहयोग या सुरक्षा को लेकर साझा तरीके से काम नहीं किया. यहां तक कि राज्य सरकार की दोनों पुलिस का सिर्फ एक ही मकसद रहा कि सीआरपीएफ को ड्यूटी के दौरान ज्यादा से ज्यादा परेशानी हो. ड्यूटी में जाने के लिए बस की जगह ट्रक मुहैया कराया गया, हालांकि, कुछ जगहों पर बंगाल पुलिस की तरफ से बस मुहैया कराई गई, लेकिन वह कागजी पन्नों तक ही सिमट कर रह गई.

सीआरपीएफ के जवान जानवरों की तरह आर्म्स के साथ ट्रक भर-भर के निकल पड़ते थे. सीआरपीएफ का सिर्फ एक ही मकसद था कि परेशानी चाहे कितनी भी आ जाये, सुरक्षा में कोई कोताही नहीं बरतनी है, और ग्राउंड जीरो पर हुआ भी कुछ ऐसा ही.

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149 कस्बा कोलकाता में तैनात सीआरपीएफ के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी उन्हें कोलकाता पुलिस से हुई. उनकी तरफ से कोई सहयोग नहीं मिला.

बता दें, जब किसी राज्य में पैरा मिलिट्री को भेजा जाता है तो उनके सभी तरह का इंतजाम राज्य पुलिस की तरफ से किया जाता है, साथ ही जब पैरा मिलिट्री फ्लैग मार्च के लिए निकलती है तो इनके साथ लोकल पुलिस के अधिकारी भी जवानों के साथ रहते हैं, क्योंकि पैरा मिलिट्री बाहर से आती है तो उनके लोकल सपोर्ट के लिए इनकी भी ड्यूटी लगाई जाती है. लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव में किसी भी तरह की मदद ना तो पश्चिम बंगाल पुलिस और ना ही कोलकाता पुलिस ने सीआरपीएफ की. सीआरपीएफ सूत्रों ने यह भी जानकारी दी कि कई बार उन्हें विधानसभा इलाकों की गलत जानकारी भी दे दी जाती थी.

क्या अंतर है पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस में?

पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस में मुख्य अंतर वर्दी के रंग, क्षेत्राधिकार और प्रशासनिक नियंत्रण का है. कोलकाता पुलिस सफेद वर्दी पहनती है और केवल कोलकाता शहर में काम करती है. जबकि, पश्चिम बंगाल पुलिस खाकी वर्दी में पूरे राज्य के ग्रामीण और दूसरे शहरी इलाकों की सुरक्षा संभालती है. कोलकाता पुलिस की सफेद वर्दी उन्हें एक अलग पहचान देती है, जो ब्रिटिश काल यानी 1845 की परंपरा है. कोलकाता पुलिस का दायरा लगभग 91 पुलिस थानों तक सीमित है.

दोनों ही बल पश्चिम बंगाल सरकार के गृह विभाग को रिपोर्ट करते हैं, लेकिन उनकी कार्यप्रणाली और प्रशासनिक शाखाएं अलग-अलग हैं. और यही वजह है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दौरान कोलकाता और राज्य के अन्य हिस्सों में CRPF (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) और राज्य पुलिस के बीच समन्वय में कमी और टकराव की खबरें सामने आ रही हैं.

First published on: Apr 29, 2026 10:51 PM

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