‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर आया चीफ जस्टिस का लेटेस्ट बयान, जानिए अब क्या बोले CJI सूर्यकान्त
कॉकरोच जनता पार्टी का मामला CJI की 16 मई की टिप्पणी के बाद उठा, जब उन्होंने मीडिया रिपोर्टों पर कड़ी चिंता जताते हुए स्पष्ट किया था कि उनके शब्दों को कुछ हिस्सों ने गलत तरीके से पेश किया.
Written By: Akarsh Shukla|Updated: May 25, 2026 18:53
Edited By : Akarsh Shukla|Updated: May 25, 2026 18:53
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मुख्य न्यायाधीश ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकान्त के एक बयान से सोशल मीडिया पर शुरू हुई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को अब तक 20 मिलियन से अधिक लोग इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स मिल चुके हैं. अब कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर एक बार फिर से सीजेआई सूर्यकांत ने ताजा बयान दिया है, जिसके बाद CJP एक बार फिर से चर्चा में आ गई है. CJP) विवाद को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता से कहा, ‘इसे इतना सेंटिमेंटली मत लें.’
याचिकाकर्ता ने लगाई कोर्ट से गुहार
याचिकाकर्ता ने तत्काल सुनवाई की गुहार लगाते हुए सोशल मीडिया पर चल रहे वायरल चलन के कथित दुरुपयोग की जांच की मांग की थी. याचिका में आरोप लगाया गया है कि CJI द्वारा पहले दिए गए स्पष्टीकरण के बावजूद एक ‘दुर्भावनापूर्ण’ नैरेटिव फैल रहा है, जिससे न्याय संस्था की साख प्रभावित हो रही है. वकील ने अदालत से निवेदन किया कि कोर्टरूम के मौखिक आदान‑प्रदान को व्यावसायिक रूप से उपयोग किए जाने या चुनिंदा तरीके से प्रसारित कर के न्यायिक कार्यवाही को विकृत करने पर रोक लगाने का निर्देश दिया जाए.
साथ ही याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया की चेयरपर्सन द्वारा कथित रूप से उठाए गए ’35 से 40 प्रतिशत फर्जी कानून की डिग्रियों’ के दावे की सीबीआई से जांच की भी मांग शामिल है. सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकान्त ने कहा कि ‘कोई इतनी बड़ी आपात स्थिति नहीं है, हम इसे देखेंगे.’ उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मामले में तात्कालिक कदम की आवश्यकता के साथ‑साथ तथ्यों की ठीक तरह से पड़ताल भी आवश्यक है. बेंच ने फिलहाल याचिका पर और तफ्तीश के लिए समय लेने का संकेत दिया.
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विवाद के बाद सीजेआई ने दिया था स्पष्टीकरण
गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी का मामला CJI की 16 मई की टिप्पणी के बाद उठा, जब उन्होंने मीडिया रिपोर्टों पर कड़ी चिंता जताते हुए स्पष्ट किया था कि उनके शब्दों को कुछ हिस्सों ने गलत तरीके से पेश किया. CJI ने कहा था कि उनका निशाना नौजवानों पर नहीं, बल्कि ‘फर्जी और नकली डिग्रियों’ के जरिए कानूनी पेशे में प्रवेश करने वालों पर था.