सम्राट चौधरी को मंगलवार को बिहार के मुख्यमंत्री पद के लिए चुना गया. पिछले 20 साल से बिहार के मुख्यमंत्री पद पर नीतीश कुमार का कब्जा था, जो मंगलवार को खत्म हो गया. उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर यह कुर्सी सम्राट चौधरी को सौंप दी. इस घटनाक्रम के साथ ही सम्राट चौधरी की ‘मुरेठा’ को लेकर खाई गई पुरानी कसम और अयोध्या के सरयू तट की तस्वीरें सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो रही हैं.
विधानसभा में वो ‘प्रण’
इस कहानी की शुरुआत करीब तीन साल पहले हुई थी. तब नीतीश कुमार महागठबंधन (RJD-कांग्रेस-लेफ्ट) के साथ सरकार चला रहे थे. सदन में तीखी बहस के दौरान नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी की पगड़ी की ओर इशारा करते हुए पूछा था – ‘ये मुरेठा हमेशा क्यों बांधे रहते हो?’
सम्राट चौधरी ने बिना पलक झपकाए जवाब दिया था – ‘यह मेरा संकल्प है. आपको मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाने के बाद ही यह पगड़ी उतरेगी.’ उस दिन के बाद से सम्राट चौधरी बीजेपी के सबसे आक्रामक चेहरे बन गए और ‘मुरेठा’ उनके कड़े विरोध का ट्रेडमार्क बन गया.
फिर अयोध्या में पर्ण का विसर्जन
राजनीति ने करवट ली और जनवरी 2024 में नीतीश कुमार वापस NDA में आ गए. सम्राट चौधरी डिप्टी सीएम बने, लेकिन उनकी कसम आधी अधूरी थी क्योंकि नीतीश अभी भी सीएम थे.
जुलाई 2024 में सम्राट चौधरी अयोध्या पहुंचे. वहां सरयू नदी में डुबकी लगाने के बाद उन्होंने अपना सिर मुंडवाया और उस मुरेठा को भगवान रामलला के चरणों में समर्पित कर दिया. उन्होंने कहा कि उनका संकल्प पूरा हो गया है क्योंकि नीतीश ने महागठबंधन का साथ छोड़ दिया है. आरजेडी ने तब उन पर ‘रघुकुल रीति’ तोड़ने का आरोप लगाया था, लेकिन सम्राट ने साफ कर दिया था कि उनका समर्पण अपने आराध्य प्रभु राम के प्रति है.
फिर मिली ‘सम्राट’ को कमान
सम्राट चौधरी ने कसम खाने के 22 महीने बाद और नीतीश कुमार की जगह लेने के 21 महीने पहले सिर मुंडवाया था और मुरेठा को भगवान रामलला के चरणों में समर्पित कर दिया था. जिस नीतीश कुमार को सत्ता से बाहर करने के लिए उन्होंने मुरेठा बांधा था, आज उन्हीं नीतीश ने चुपचाप इस्तीफा देकर कमान सम्राट को सौंप दी.