मुख्य बिंदु
- अंडरग्राउंड टनल बनाने का काम 5 जुलाई, 2026 को शुरू होगा.
- पहली TBM मशीन विक्रोली-BKC सेक्शन में खुदाई करेगी.
- टनल की कुल लंबाई 20.37 KM है, जिसमें समुद्र के नीचे का 7 KM का हिस्सा भी शामिल है.
- 2 TBM मशीनें मिलकर हर महीने लगभग 600 मीटर की खुदाई कर सकती हैं.
- मुंबई-अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेनें 320 kmph तक की रफ्तार से चलेंगी.
Underground Tunnelling for Mumbai Ahmedabad Bullet Train: केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव 5 जुलाई, 2026 को मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए सुरंग बनाने का काम आधिकारिक तौर पर शुरू करने वाले हैं. यह भारत के पहले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की दिशा में एक और अहम कदम होगा. इस समारोह में मुंबई के विक्रोली साइट पर पहली टनल बोरिंग मशीन (TBM) को चालू किया जाएगा.
सुरंग की गहराई
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के मुताबिक, TBM को जमीन के नीचे लगभग 56.6 मीटर की गहराई पर लगाया गया है, जिससे 65 मीटर गहरी सुरंग की खुदाई होगी. ये मशीन विक्रोली को बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) से जोड़ने वाले अंडरग्राउंड रूट की खुदाई शुरू करेगी, जो इस प्रोजेक्ट के सबसे लंबे अंडरग्राउंड हिस्से का हिस्सा है.
सुरंग की लंबाई
ये अंडरग्राउंड कॉरिडोर 20.37 किलोमीटर लंबा है, जिसमें ठाणे क्रीक के नीचे से गुजरने वाला तकरीबन 7 किलोमीटर का समुद्र के नीचे का हिस्सा भी शामिल है. इस मुश्किल हिस्से को बनाने की जिम्मेदारी एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की है, जो जर्मनी में बनी 2 खास तौर पर डिजाइन की गई टनल बोरिंग मशीनों का इस्तेमाल करेगी. इन विशाल मशीनों को इस साल की शुरुआत में समुद्र के रास्ते भारत लाया गया था.
हर मशीन का अलग काम
पहली TBM विक्रोली और BKC के बीच तकरीबन 5.8 किलोमीटर की खुदाई करेगी. दूसरी TBM, जिसे अभी सावली में असेंबल किया जा रहा है, उसके जल्द ही काम शुरू करने की उम्मीद है. ये मशीन बाकी बचे 9.7 किलोमीटर के हिस्से को बनाएगी, जिसमें समुद्र के नीचे का हिस्सा भी शामिल है. हर मशीन हर महीने लगभग 300 मीटर खुदाई करने में सक्षम है, जिससे दोनों मशीनों के चालू होने पर प्रोजेक्ट हर महीने तकरीबन 600 मीटर आगे बढ़ सकेगा.
एक ट्यूब में 2 ट्रैक
सुरंग की कुल लंबाई में से 15.4 किलोमीटर की खुदाई TBM से की जाएगी, जबकि बाकी 4.8 किलोमीटर का काम ड्रिल-एंड-ब्लास्ट तरीके से पहले ही पूरा हो चुका है. इस सुरंग में एक ही ट्यूब के अंदर 2 रेलवे ट्रैक होंगे, साथ ही ऑपरेशन में मदद के लिए एक्सेस शाफ्ट और इक्विपमेंट रूम भी होंगे.
घट जाएगा ट्रैवल टाइम
508 किलोमीटर लंबा मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर 12 स्टेशनों को जोड़ेगा और 320 किलोमीटर प्रति घंटे तक की ट्रेन स्पीड को सपोर्ट करेगा. इसके पूरा होने पर, लिमिटेड-स्टॉप सर्विस से मुंबई और अहमदाबाद के बीच ट्रैवल टाइम घटकर तकरीबन 2 घंटे 7 मिनट रह जाने की उम्मीद है, जिससे रीजनल कनेक्टिविटी में काफी सुधार होगा.
निष्कर्ष
अंडरग्राउंड टनल बनाने का काम शुरू होना मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए एक बड़ी अचीवमेंट है. एडवांस्ड टनल बोरिंग मशीनों और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल भारत की बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमताओं को दिखाता है. पूरा होने पर, यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर दो बड़े आर्थिक केंद्रों के बीच तेज, सुरक्षित और बेहतर यात्रा की सुविधा देगा. उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा, आर्थिक विकास में मदद करेगा और वर्ल्ड-क्लास टेक्नोलॉजी के साथ बड़े पैमाने पर ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में भारत की तरक्की को दिखाएगा.