What Causes Autoimmune Disorder: देश में ऑटोइम्यून बीमारियों के मामलों में लगातार इजाफा देखा जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम के बदलाव का भी इन रोगों पर असर पड़ता है. कई अध्ययनों और क्लीनिकल ऑब्जर्वेशन में यह सामने आया है कि गर्मियों की तुलना में सर्दियों के मौसम में ऑटोइम्यून बीमारियों के मामले ज्यादा बढ़ जाते हैं. एम्स में नई दिल्ली के रूमेटोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉक्टर उमा कुमार का कहना है कि ठंड के मौसम में ऐसे मरीजों की संख्या अस्पतालों में ज्यादा देखने को मिलती है, जिनकी इम्यून सिस्टम से जुड़ी बीमारियां सक्रिय हो जाती हैं.
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ऑटोइम्यून डिजीज क्या होती है?
एक्सपर्ट उमा कुमार का कहना है कि ऑटोइम्यून रोग वह स्थिति होती है, जब शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली किसी गड़बड़ी के कारण बाहरी वायरस या बैक्टीरिया से लड़ने के बजाय खुद के स्वस्थ अंगों, ऊतकों और कोशिकाओं को ही दुश्मन समझकर उन पर हमला करने लगती है.
बच्चों को जरूरत से ज्यादा सुरक्षित ना रखें
एक्सपर्ट उमा कुमार का कहना है कि आजकल बच्चों को बहुत अधिक प्रोटेक्टिव माहौल में पाला जा रहा है, जो उनकी प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता के विकास में बाधा बन सकता है. उन्होंने सलाह दी कि जन्म के बाद बच्चों को तुरंत आरओ का पानी देने के बजाय सामान्य स्वच्छ पानी का उपयोग किया जाए और उन्हें प्राकृतिक वातावरण से पूरी तरह अलग ना रखा जाए, ताकि उनका इम्यून सिस्टम मजबूत बन सके.
ऑटोइम्यून बीमारी के सामान्य लक्षण
ऑटोइम्यून बीमारी के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि शरीर का कौन सा अंग प्रभावित है, लेकिन आमतौर पर मरीजों में लगातार थकान, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, सूजन और लालिमा, त्वचा पर रैश, बुखार, सिरदर्द और पाचन से जुड़ी दिक्कतें देखी जाती हैं.
कितने प्रकार की होती हैं ऑटोइम्यून बीमारियां?
फिलहाल दुनियाभर में 80 से अधिक तरह के ऑटोइम्यून रोग पहचाने जा चुके हैं. इनमें से कुछ के नाम नीचे बताए गए हैं-
- रूमेटोइड आर्थराइटिस- यह जोड़ों को नुकसान पहुंचाता है.
- ल्यूपस- यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है.
- टाइप 1 डायबिटीज- यह इम्यून सिस्टम अग्न्याशय की कोशिकाओं पर हमला करता है.
- क्रोहन डिजीज- यह पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारी है.
- मल्टीपल स्केलेरोसिस- यह नर्वस सिस्टम को प्रभावित करने वाला गंभीर रोग है.
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