डायबिटीज के मरीजों को हाथ-पैरों की सिकाई करनी चाहिए या नहीं? डॉक्टर ने दी शुगर पेशेंट्स को यह सलाह

What To Avoid In Diabetes: सर्दियों के मौसम में अक्सर ही लोग ठंड से बचने के लिए हाथ-पैर की सिकाई करने लगते हैं. लेकिन, क्या डायबिटीज के मरीजों को ऐसा करना चाहिए? इसी बारे में बता रही हैं डॉ. प्रीति सल्हान. यहां जानिए शुगर पेशेंट्स के लिए सिकाई सही है या नहीं.

Diabetes Patients

यहां जानिए डायबिटीज में सिकाई करें या नहीं.

Diabetes Management: सर्दियों का मौसम हो और कड़कड़ाती ठंड हो तो हाथ-पैरों की सिकाई करना बेहद अच्छा लगता है. आग या हीटर के आगे बैठकर हाथ-पैर सेंकने पर गर्माहट का एहसास होता है जिससे ठंड को झेलना आसान हो जाता है. लेकिन, डायबिटीज होने पर हाथ-पैरों की नर्व्स डैमेज होने लगती हैं. ऐसे में क्या शुगर पेशेंट्स (Sugar Patients) के लिए सिकाई करना सही है? इसी बारे में बता रही हैं MD मेडिसिन डॉ. प्रीति सल्हान. डॉक्टर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट शेयर करके बताया है कि डायबिटीज के मरीजों को हाथ-पैरों की सिकाई करनी चाहिए या नहीं. आप भी जानिए.

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डायबिटीज में हाथ-पैरों की सिकाई करनी चाहिए या नहीं

डॉक्टर बताती हैं कि डायबिटीज के पेशेंट्स को हाथ-पैरों पर सिकाई नहीं करनी चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि डायबिटीज के मरीजों के हाथ-पैरों की नसें पहले ही कमजोर होती हैं. उन्हें गर्माहट का सही तरह से पता नहीं चलता है. ऐसे में कितनी सिकाई कर दी है या हाथ-पांव कितने गर्म कर दिए हैं इसका अंदाजा नहीं हो पाता. इससे हाथ-पैरों की उंगलियां खराब होने की संभावना बढ़ जाती है. इससे छाले भी पड़ सकते हैं, डायबेटिक फुट होने के चांसेस होते हैं. इसीलिए शुगर के पेशेंट्स यानी डायबिटीज के मरीजों को अपने हाथ-पैरों को सेंकना नहीं चाहिए.

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सिकाई करने के ये नुकसान भी हो सकते हैं

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जल सकती है त्वचा – हाथ-पैरों की सिकाई अगर बहुत ज्यादा देर तक की जाए तो इससे त्वचा जल सकती है.

सूजन बढ़ना – कई बार सिकाई करने से सूजन बढ़ सकती है. खासकर अगर हाथ-पांव में किसी तरह का घाव हो तो इंफ्लेमेशन बढ़ती है.

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डिहाइड्रेशन– अगर हॉट वॉटर बैग से बहुत देर तक सिकाई की जाए तो इससे पसीना ज्यादा आता है और शरीर में डिहाइड्रेशन हो सकती है.

डायबिटीज में हाथ-पैरों पर क्या प्रभाव पड़ता है

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  • डायबिटीज में हाथ-पैरों पर कई तरह के प्रभाव पड़ते हैं, जैसे नर्व डैमेज (Nerve Damage In Diabetes), ब्लड सर्कुलेशन का ठीक ना होना या दाने निकल जाना.
  • पैर सुन्न पड़ जाते हैं और किसी तरह की सेनसेशन फील नहीं होती है.
  • कोई घाव हो जाए तो उसे भरने में समय लगता है.
  • पैरों में इंफेक्शन हो जाता है. यह इंफेक्शन ठीक नहीं होता तो पैर काटने तक की नौबत आ जाती है.
  • डायबिटीज हैंड सिंड्रोम हो सकता है जिसमें हाथों के जॉइंट्स में दर्द होता है, स्किन वैक्सी हो जाती है और उंगलियों को मूव करने में दिक्कत आती है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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