क्या स्वेटर पहनकर सोना ठीक है? यहां जानिए जैकेट, Sweater या जुराब पहनकर सोने पर क्या होता है

जाड़े के दिन जितने ठंडे होते हैं उससे कई ज्यादा ठंडी रातें होती हैं. बहुत से लोग सर्दी से बचने के लिए रात में मोटे ऊनी स्वेटर पहनकर सोते हैं. यहां जानिए सर्दियों में रात के समय स्वेटर पहनकर सोना चाहिए या नहीं.

Sleeping with sweater

क्या सोते समय स्वेटर पहनना अच्छा है?

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Sleeping With Sweater: सर्दियों के मौसम में रात के समय सोते समय अक्सर ही ठंड महसूस होती है जिस चलते लोग स्वेटर, जैकेट और जुराब वगैरह पहनकर सोते हैं. स्वेटर या जैकेट पहनने पर शरीर गर्म महसूस करता है लेकिन कई बार इस तरह सोने से कंफर्टेबल महसूस नहीं होता है. इस आदत से शरीर पर कई तरह के प्रभाव भी पड़ते हैं. ऐसे में यहां जानिए स्वेटर, जैकेट या जुराब पहनकर सोना चाहिए या नहीं और इसका सेहत या शरीर पर क्या असर होता है.

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रात को स्वेटर पहनकर सोना चाहिए या नहीं

रात को सोते समय सेहत के लिहाज से स्वेटर पहनकर सोना सही नहीं है. कड़कड़ाती ठंड हो तो बात अलग है लेकिन रोजाना मोटे स्वेटर या जैकेट पहनकर सोने पर सेहत को नुकसान भी हो सकता है.

ब्लड फ्लो में दिक्कत – ऊनी कपड़े शरीर से चिपक जाते हैं जिससे रक्त संचार यानी ब्लड फ्लो बाधित हो सकता है. इससे घबराहट और बेचैनी महसूस होती है.

स्किन प्रॉब्लम्स – स्वेटर के ऊनी रेशे रूखे होते हैं. इससे त्वचा पर खुजली या रैशेज हो सकते हैं, एक्जिमा की दिक्कत हो सकती है या त्वचा की नमी कम होती है.

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शरीर का तापमान बढ़ना – ऊन शरीर के अंदर की गर्मी रोकता है. इससे शरीर का तापमान जरूरत से ज्यादा बढ़ सकता है, पसीना आने लगता है, बार-बार नींद खुलती है और ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) के मरीजों को घबराहट हो सकती है या मरीजों को चक्कर आने लगता है.

सांस लेने में दिक्कत – ऊनी या मोटे कपड़े सीने पर दबाव डालते हैं. ऊन के बारीक रेशे सांस के जरिए नाक में घुस सकते हैं जिससे एलर्जी और सांस संबंधी समस्या हो सकती है. अस्थमा के मरीजों को खासतौर से नुकसान हो सकता है.

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सर्दियों में कैसे कपड़े पहनकर सोना चाहिए

  • सर्दियों के मौसम में रात के समय बहुत ज्यादा मोटे या भारी कपड़े पहनकर नहीं सोना चाहिए. हल्के कपड़ों को लेयर करके पहनना चाहिए. पतले सूती के कपड़े के ऊपर हल्का थर्मल पहनकर सोया जा सकता है.
  • बहुत मोटे जुराब पहनकर नहीं सोना चाहिए. इससे बेचैनी होने लगती है. पतले सूती के जुराब पहनना बेहतर ऑप्शन है.
  • मोटे स्वेटर या जैकेट (Jacket) पहनने के बजाए मोटा और गर्म कंबल या रजाई लेकर सोना सही है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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