हमारा शरीर हमें कई बार ऐसे संकेत देता है, जो काफी असामान्य होते हैं. लेकिन लोग इसे दूसरी किसी समस्या जैसे-खाना कम खाने, गर्मी, सर्दी आदि से जोड़कर उसे नजरअंदाज कर देते हैं. उनकी यही गलती उन्हें आगे चलकर बड़ी मुसीबतों में धकेल देती हैं. ऐसा ही कुछ लोगों में दिल की धड़कनों को लेकर है. कभी-कभी दिल का अचानक तेज धड़कना, फड़फड़ाहट महसूस होना या एक पल के लिए धड़कन रुक-सी जाना ऐसा महसूस होता है, जिसे कई लोग आम बात समझ लेते हैं. लोग इसे थकान, तनाव या ज्यादा चाय-कॉफी पीने का असर मानकर टाल देते हैं.
लेकिन अगर यह स्थिति बार-बार हो रही है, तो यह शरीर की गंभीर चेतावनी हो सकती है. दिल की धड़कन से जुड़ी यह गड़बड़ी एक खास समस्या, 'एरिदमिया' (Arrhythmia) नाम की बीमारी का संकेत हो सकती है, जो समय रहते न संभाली जाए तो हार्ट अटैक, स्ट्रोक या अचानक बेहोशी जैसी गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है.
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एरिदमिया क्या है और यह कैसे असर डालता है?
एरिदमिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें दिल सामान्य लय में नहीं धड़कता है. कभी यह बहुत तेज हो जाता है, कभी बहुत धीमा और कभी अनियमित. सामान्य रूप से दिल की धड़कन 60 से 100 बीट प्रति मिनट के बीच होती है. हालांकि, जब बिना किसी वजह यह इससे कम या ज्यादा हो जाए, तो शरीर में खून और ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित होने लगती है. इसका असर दिमाग, फेफड़ों और बाकी अंगों पर पड़ता है, जिससे व्यक्ति कमजोर और असहज महसूस करने लगता है.
एक्सपर्ट क्या कहते हैं इस बीमारी को लेकर?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर दिल की धड़कन बार-बार अनियमित हो रही है, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि कई बार मरीज को शुरुआत में ज्यादा लक्षण महसूस नहीं होते, लेकिन अंदर ही अंदर दिल पर असर पड़ रहा होता है. इस तरह की स्थिति बनने पर सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लें और उनके अनुसार बताए गए टेस्ट करवाएं, ताकि वक्त रहते इसका सही इलाज किया जा सके.
एरिदमिया के लक्षण क्या हैं
कुछ लोगों में एरिदमिया के लक्षण साफ दिखते हैं, जबकि कुछ में यह चुपचाप बढ़ता रहता है. इसके संकेतों में सीने में फड़फड़ाहट, अचानक तेज या बहुत धीमी धड़कन, सांस फूलना, सीने में दर्द, घबराहट, ज्यादा पसीना, बहुत ज्यादा थकान, चक्कर आना और सिर हल्का लगना शामिल है. गंभीर मामलों में व्यक्ति को बेहोशी या बेहोश होने जैसा एहसास भी हो सकता है. इसलिए इस समस्या को हल्के में न लें और डॉक्टर से जल्द से जल्द संपर्क करें. आपके द्वारा की गई देरी आपको बड़ी दिक्कतों में उलझा सकती हैं.
यह भी पढ़ें: Propose Day 2026: आज है प्रपोज डे, जानिए वैलेंटाइन वीक का यह दूसरा दिन क्यों है खास
हमारा शरीर हमें कई बार ऐसे संकेत देता है, जो काफी असामान्य होते हैं. लेकिन लोग इसे दूसरी किसी समस्या जैसे-खाना कम खाने, गर्मी, सर्दी आदि से जोड़कर उसे नजरअंदाज कर देते हैं. उनकी यही गलती उन्हें आगे चलकर बड़ी मुसीबतों में धकेल देती हैं. ऐसा ही कुछ लोगों में दिल की धड़कनों को लेकर है. कभी-कभी दिल का अचानक तेज धड़कना, फड़फड़ाहट महसूस होना या एक पल के लिए धड़कन रुक-सी जाना ऐसा महसूस होता है, जिसे कई लोग आम बात समझ लेते हैं. लोग इसे थकान, तनाव या ज्यादा चाय-कॉफी पीने का असर मानकर टाल देते हैं.
लेकिन अगर यह स्थिति बार-बार हो रही है, तो यह शरीर की गंभीर चेतावनी हो सकती है. दिल की धड़कन से जुड़ी यह गड़बड़ी एक खास समस्या, ‘एरिदमिया’ (Arrhythmia) नाम की बीमारी का संकेत हो सकती है, जो समय रहते न संभाली जाए तो हार्ट अटैक, स्ट्रोक या अचानक बेहोशी जैसी गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है.
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एरिदमिया क्या है और यह कैसे असर डालता है?
एरिदमिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें दिल सामान्य लय में नहीं धड़कता है. कभी यह बहुत तेज हो जाता है, कभी बहुत धीमा और कभी अनियमित. सामान्य रूप से दिल की धड़कन 60 से 100 बीट प्रति मिनट के बीच होती है. हालांकि, जब बिना किसी वजह यह इससे कम या ज्यादा हो जाए, तो शरीर में खून और ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित होने लगती है. इसका असर दिमाग, फेफड़ों और बाकी अंगों पर पड़ता है, जिससे व्यक्ति कमजोर और असहज महसूस करने लगता है.
एक्सपर्ट क्या कहते हैं इस बीमारी को लेकर?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर दिल की धड़कन बार-बार अनियमित हो रही है, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि कई बार मरीज को शुरुआत में ज्यादा लक्षण महसूस नहीं होते, लेकिन अंदर ही अंदर दिल पर असर पड़ रहा होता है. इस तरह की स्थिति बनने पर सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लें और उनके अनुसार बताए गए टेस्ट करवाएं, ताकि वक्त रहते इसका सही इलाज किया जा सके.
एरिदमिया के लक्षण क्या हैं
कुछ लोगों में एरिदमिया के लक्षण साफ दिखते हैं, जबकि कुछ में यह चुपचाप बढ़ता रहता है. इसके संकेतों में सीने में फड़फड़ाहट, अचानक तेज या बहुत धीमी धड़कन, सांस फूलना, सीने में दर्द, घबराहट, ज्यादा पसीना, बहुत ज्यादा थकान, चक्कर आना और सिर हल्का लगना शामिल है. गंभीर मामलों में व्यक्ति को बेहोशी या बेहोश होने जैसा एहसास भी हो सकता है. इसलिए इस समस्या को हल्के में न लें और डॉक्टर से जल्द से जल्द संपर्क करें. आपके द्वारा की गई देरी आपको बड़ी दिक्कतों में उलझा सकती हैं.
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