क्या जानवरों को भी होती है डायबिटीज? खतरनाक इंसानी बीमारियों के शिकार हो रहे जंगली जीव, सामने आई वजह

इंसान के अलावा, क्या जानवरों को भी डायबिटीज या कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं? इसको लेकर जू बायोलॉजी पत्रिका में बताया गया है कि जानवरों को बचाने के साथ-साथ हमें उनकी मेडिकल हेल्थ पर भी ध्यान देने की जरूरत है. 

How does disease spread from animals

क्या जानवरों को सच में डायबिटीज हो सकती है? PIC CREDIT - AI

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इंसानों में डायबिटीज, कैंसर, मोतियाबिंद और दिल से जुड़ी बीमारियां आम होती जा रही हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि ऐसी कई बीमारियां जंगली जानवरों में भी देखी जा रही हैं? हाल ही में गोरखपुर के चिड़ियाघर से सामने आई कुछ घटनाओं ने इस सवाल को फिर चर्चा में लाकर खड़ा कर दिया. हैरानी की बात तो है कि यहां पर मौजूद एक तेंदुए में डायबिटीज, एक तेंदुए में कैंसर, एक शेर में दौरे और एक बाघिन में गंभीर मोतियाबिंद आदि की समस्या देखने को मिली है. हालांकि, जू बायोलॉजी में प्रकाशित एक सर्वे में अमेरिका के चिड़ियाघरों में रखे प्राइमेट्स में डायबिटीज के मामलों का अध्ययन किया गया था. इस दौरान जानवरों में कई तरह की बीमारियां देखी गई थीं. हालांकि, सीधे तौर पर यह कहना सही नहीं होगा कि जानवरों को इंसानों की बीमारियां लग रही हैं. 

इसे भी पढ़ें- क्या ट्यूमर को ही कैंसर कहते हैं? जानिए Cancer और Tumor में क्या अंतर है

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क्या जानवरों को सच में डायबिटीज हो सकती है?

गोरखपुर चिड़ियाघर में ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक शोधों में कई जानवरों में डायबिटीज या डायबिटीज जैसी मेटाबॉलिक समस्या के मामले दर्ज किए गए हैं. जू बायोलॉजी पत्रिका ने एक सर्वे किए, जिसमें जिन संस्थानों ने जवाब दिया, उनमें करीब 30% ने बताया कि उनके कलेक्शन में कम से कम एक डायबिटिक जानवर मौजूद है. इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि शुगर जैसी बीमारियां जानवरों को भी हो सकती हैं. 

तेंदुए और शेर में ऐसी बीमारी कैसे हो सकती है?

गोरखपुर चिड़ियाघर में सामने आए मामले के मुताबिक, एक तेंदुए को डायबिटीज, एक तेंदुए की कैंसर से मौत, एक शेर को दौरे और एक बाघिन की आंखों की रोशनी मोतियाबिंद की वजह से जा सकती है. ऐसा जानवरों को कैद रखने और कम चलने की वजह से हो सकता है. लेकिन यहां एक जरूरी फर्क समझना होगा कि हर बीमारी का कारण कैद या इंसानी डाइट ही हो, ऐसा वैज्ञानिक रूप से कहना सही नहीं है. 

रिसर्च में डाइट बदलने से डायबिटीज के संकेत हुए कम

पहले भी जानवरों में टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारी के संकेत मिले थे. शुरुआत में जानवरों का वजन, ब्लड ग्लूकोज, फ्रुक्टोसामाइन और कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल नहीं था. जब उनकी डाइट में बदलाव किया गया तो परेशानी को काफी हद तक हल किया जा सकता है. 

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क्या सिर्फ डायबिटीज ही नहीं, कैंसर भी होता है?

जानवरों में कैंसर जैसी बीमारी भी देखी जा रही है. चिड़ियाघरों में रखे गए जंगली जानवरों में अलग-अलग तरह के ट्यूमर और कैंसर दर्ज किए गए हैं. 2024 में Zoo Biology में प्रकाशित एक रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया कि चिड़ियाघर के जानवरों में कैंसर को समझते समय उनकी उम्र को ध्यान में रखना जरूरी है. 

क्या इंसानों जैसी बीमारियां जानवरों से इंसानों में फैल सकती हैं?

यहां डायबिटीज जैसी बीमारी को समझना जरूरी है, क्योंकि यह वायरल नहीं है. कैंसर या मोतियाबिंद जैसी बीमारियां भी फैलने वाली नहीं होती हैं. इसलिए कोई बीमारी इंसानों से जानवरों तक नहीं फैलती है. हालांकि, जानवरों को यह बीमारियां खराब लाइफस्टाइल की वजह से हो सकती हैं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source- Zoo biology journal, Zoo Biology 2023 Report 

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Shadma Muskan

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शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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