Spinal Fracture: बाली में हुए एक्सीडेंट से नुसरत भरूचा (Nushrratt Bharuccha) की रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया है जिसके बाद नुसरत को बाली से मुंबई तक एयर एंबुलेंस में लाया गया. नुसरत हॉलिडे और वर्क ट्रिप के चलते बाली में थीं. हादसे के कारण रीढ़ की हड्डी टूटने पर नुसरत को पहले बाली के अस्पताल में भर्ती किया गया था और इसके बाद एयर एंबुलेंस से मुंबई लाया गया था. नुसरत की टीम के अनुसार, मुंबई में ही डॉक्टर नुसरत की रीढ़ की सर्जरी करेंगे. स्पाइनल फ्रैक्चर का मतलब है रीढ़ की हड्डी यानी एक या उससे ज्यादा वर्टिब्रे में आई चोट. स्पाइनल फ्रैक्चर के कारण दर्द होता है और हिलने-डुलने की क्षमता कम हो जाती है. ऐसे में यहां जानिए रीढ़ की हड्डी के टूटने के और कौन से कारण हो सकते हैं, इसके क्या लक्षण (Spinal Fracture Symptoms) होते हैं और किस तरह रीढ़ का इलाज होता है.
किन कारणों से हो सकता है रीढ़ का फ्रैक्चर
स्पाइन हेल्थ फाउंडेशन के अनुसार ऐसे कुछ कारण हैं जो रीढ़ की हड्डी के फ्रैक्चर की वजह बन सकते हैं, जैसे कार एक्सीडेंट, गिरने या स्पॉर्ट इंजरी के चलते हुए ट्रॉमा, ऑस्टोपोरोसिस बीमारी जिसमें हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, कैंसर जो रीढ़ तक फैल सकता है, रीढ़ को कमजोर कर सकता है और रीढ़ की हड्डी में हुए इंफेक्शंस के कारण स्पाइनल फ्रैक्चर हो सकता है.
रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के क्या लक्षण होते हैं
- एकदम से तेज और असहनीय दर्द होता है
- दर्द होता है जो हिलने-डुलने या किसी भी मूवमेंट से बढ़ जाता है
- हाथ-पैरों में झनझनाहट महसूस होती है और सुन्न महसूस होता है
- हाथ-पैर कमजोर पड़ने लगते हैं
- लंबाई कम हो जाती है और पोस्चर सामने की तरफ झुकने लगता है.
रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के लिए कौन सा टेस्ट होता है
फिजिकल एग्जाम – डॉक्टर दर्द, रीढ़ की टेंडरनेस और स्थिति के अलावा नर्व डैमेज को देखकर फ्रैक्चर की जांच करते हैं
एक्सरे – रीढ़ का एक्सरे देखा जाता है जिससे फ्रैक्चर सुनिश्चित होता है
MRI या CT स्कैन – इससे रीढ़ की हड्डी की डिटेल्ड इमेज दिखती है जिसमें फ्रैक्चर के साथ ही स्पाइनल कोर्ड और नर्व्स में हुए डैमेज का पता चलता है
बोन डेंसिटी टेस्ट – DXA या बोन डेंसिटी टेस्ट से ओस्टोपोरॉसिस का पता चलता है
रीढ़ के फ्रैक्चर का इलाज कैसे होता है
रीढ़ के फ्रैक्चर के लिए नॉन-सर्जिकल और सर्जिकल ऑप्शंस चुने जा सकते हैं –
रेस्ट – आराम करने के लिए कहा जाता है जिससे रीढ़ को ठीक होने का समय मिलता है.
ब्रेसिंग – रीढ़ को सपोर्ट करने के लिए ब्रेस पहनाया जाता है और सही पॉजीशन में सेट होने के लिए सेट किया जाता है
दवा – दर्द कम करने वाली और हड्डियों को मजबूत करने वाली दवा दी जाती है
फिजिकल थेरेपी – एक्सरसाइज करने के लिए कहा जाता है जिससे मोबिलिटी बढ़ सके.
सर्जिकल ऑप्शन में रीढ़ की सर्जरी की जाती है. इसमें वर्टेब्रे को स्टेबलाइज किया जाता है और रीढ़ में कम से कम दिक्कत हो इसके लिए हड्डियों के छोटे हिस्से हटाए जा सकते हैं.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.