Period Problems: महिलाओं में पीरियड्स होना एक आम बात है लेकिन महिलाएं अपने पीरियड्स की दिक्कतों को अक्सर ही आम समझकर इग्नोर कर देती हैं जो एक बड़ी गलती साबित होती है. पीरियड्स के दौरान होने वाली या पीरयड्स से जुड़ी ऐसी कई दिक्कतें हैं जो किसी बीमारी का लक्षण (Disease Symptom) भी हो सकती हैं. इसीलिए इन समस्याओं को आम समझकर इग्नोर नहीं करना चाहिए बल्कि इनकी जड़ तक जाकर परेशानी का पता लगाना जरूरी है. यहां जानिए पीरियड्स से जुड़ी ऐसी 5 दिक्कतें कौन सी हैं जिन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिए.
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कभी इग्नोर ना करें ये दिक्कतें | Period Problems You Should Never Ignore
7 दिनों से ज्यादा पीरियड आना
अगर 7 दिनों से ज्यादा पीरियड्स आते हैं तो इस दिक्कत को नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से मिलना जरूरी है.
स्पॉटिंग होना
अगर 2 पीरियड्स के बीच में स्पॉटिंग होती है या पीरियड्स खत्म होने के बाद और शुरू होने से पहले ब्लड नजर आता है तो यह किसी दिक्कत के चलते हो सकता है. यह नॉर्मल नहीं है.
हैवी फ्लो
पीरियड्स अगर इतने ज्यादा हो रहे हैं कि हर घंटे पैड बदलना पड़े तो इसे इग्नोर ना करें. इतना हैवी फ्लो (Heavy Flow) सभी को नहीं होता है.
बहुत ज्यादा दर्द
आपको पीरियड्स में अगर इतना दर्द होता है कि आपकी नॉर्मल डेली लाइफ ही रुक जाए तो इस दिक्कत को हल्के में ना लें.
पीरियड मिस होना
प्रेग्नेंसी के अलावा अगर पीरिड्स कई महीनों तक नहीं आ रहे हैं तो यह स्ट्रेस के चलते नहीं है बल्कि इसका कारण पता लगाना जरूरी है.
पीरियड्स की दिक्कतें किन बीमारियों का लक्षण हो सकती हैं
PCOS – पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम हार्मोनल इंबैलेंस, पीरियड्स ना होने, बहुत कम पीरियड्स होने या कभी-कभी पीरियड्स होने जैसी दिक्कतों की वजह हो सकता है.
थायराइड डिसोर्डर – थाइराइड की दिक्कतों में पीरियड साइकिल बिगड़ सकती है. इसमें बहुत ज्यादा या बहुत कम पीरियड आ सकता है.
एंडोमेट्रिओसिस – गर्भाशय की दीवार पर नॉन-कैंसरस ग्रोथ होने लगती है जिस कारण हैवी पीरियड्स हो सकते हैं या पीरियड्स के दौरान जरूरत से ज्यादा दर्द महसूस हो सकता है.
पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज – यह एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है जो रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स को प्रभावित करता है. इससे पेल्विक फ्लोर में दर्द होता है और पीरियड्स में एब्नॉर्मल ब्लीडिंग हो सकती है.
कैंसर – यूट्राइन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और ओवेरियन कैंसर सीधेतौर पर महिला के पीरियड को प्रभावित करते हैं. कैंसर के कारण स्पॉटिंग, दो पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग, हैवी फ्लो, इर्रेग्यूलर पीरियड्स, एब्नॉर्मल डिस्चार्च या बहुत ज्यादा दर्द जैसी दिक्कतें होने लगती हैं.
HIV/AIDS – एचआईवी या एड्स होने पर पीरियड्स में बदलाव नजर आते हैं. पीरियड्स इर्रेग्यूलर हो सकते हैं या कई महीनों तक पीरियड ना आना या बहुत ज्यादा हैवी फ्लो होना भी इसका लक्षण हो सकता है.
इस बात का ध्यान रखें कि आपको किसी भी लक्षण को देखकर निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना है बल्कि गाइनोकोलॉजिस्ट की सलाह लेकर और जांच कराकर समस्या का पता लगाना है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.