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शरीर में जमा हो सकता है कॉपर, जानिए क्या है Wilson Disease और इसके खतरनाक संकेत

Wilson Disease Kya Hai: क्या आप जानते हैं शरीर में एक समस्या के कारण कॉपर बहुत ज्यादा जमा होने लगता है, जिस कारण व्यक्ति विल्सन डिजीज का शिकार हो जाता है. आइए जानते हैं क्या है ये बीमारी और कितनी खतरनाक है ये?

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अच्छी सेहत आज के वक्त में किसी वरदान से कम नहीं है. आप गौर करेंगे कि आज के वक्त बच्चों से लेकर बड़ी उम्र के लोग सभी किसी न किसी बीमारी या सेहत से जुड़ी आम या गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं. इसके पीछे क्या कारण है, यह किसी से छिपा हुआ नहीं है. (खराब खानपान, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, परिवार का इतिहास और आदि). आज हम आपको इस स्टोरी में विल्सन डिजीज Wilson Disease के बारे में बताएंगे, जो एक दुर्लभ होने के साथ-साथ काफी खतरनाक भी है. इस बीमारी को अगर हल्के में लिया जाए और सही से इलाज नहीं करा जाए, तो मरीज की मौत तक हो सकती है. आइए जानते हैं क्या है ये बीमारी और कैसे व्यक्ति हो जाता है इसका मरीज.

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क्या है विल्सन डिजीज?

विल्सन बीमारी (Wilson Disease) एक जेनेटिक (Genetic) और जानलेवा न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें लिवर सिरोसिस भी होता है. यह एक दुर्लभ, आनुवंशिक विकार (Genetic disorder) है जिसमें शरीर अतिरिक्त कॉपर को बाहर नहीं निकाल पाता है. ILBS के मुताबिक, एक खास जीन में खराबी या उसकी कमी के कारण कॉपर का पित्त के जरिए उत्सर्जन कम हो जाता है, जिससे लिवर की कोशिकाओं में जहरीला कॉपर जमा होने लगता है. इतना ही नहीं, एक खराब जीन लिवर को कॉपर को सामान्य रूप से प्रोसेस करने से रोकता है. इससे लिवर की कोशिकाओं में कॉपर जमा हो जाता है. जब जमा करने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाती है, तो कॉपर बाहर निकलकर किडनी, आंखों और दिमाग जैसे दूसरे अंगों में जमा होने लगता है. साथ ही, लिवर में कॉपर सेरुलप्लास्मिन (ceruloplasmin) में नहीं मिल पाता, जिससे खून में सेरुलप्लास्मिन (ceruloplasmin) का स्तर कम हो जाता है.

विल्सन डिजीज किसे और कैसे कर सकता है प्रभावित?

विल्सन बीमारी (Wilson Disease) का खतरा आमतौर पर बच्चों, युवा वयस्कों (Young Adult) में होता है. साथ ही, इसका खतरा पुरुष और महिला दोनों में रहता है. अगर आप सोच रहे हैं कि यह मरीज के पास बैठने से फैल जाएगा, तो ऐसा नहीं है. यह संक्रामक नहीं होता है. बात करें क्या होगा अगर शरीर में कॉपर जमा होने लगे और बाहर नहीं निकल पाए, तो इससे शरीर में कई गंभीर समस्या पैदा हो सकती है. जैसे- लिवर से जुड़ी बीमारियों में हेपेटाइटिस, फैटी लिवर, सिरोसिस, लिवर फेलियर. दिमाग और नसें से जुड़ी समस्याओं में: कंपन, बोलने में मुश्किल, तालमेल की कमी, व्यवहार में बदलाव और आंखें से जुड़ी समस्याओं में कॉर्निया के चारों ओर भूरे या हरे रंग का घेरा, जिसे काइसेर-फ्लेशर रिंग कहते हैं. इस बात तो समझ लें कि शरीर में यूं कॉपर के जमा होने से न सिर्फ लिवर बल्कि अलग-अलग इससे में इसका असर दिख सकता है और कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.

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कैसे दिखते हैं इसके संकेत?

आपको जानकर हैरानी होगी कि विल्सन डिजीज का पता लगाना मुश्किल होता है, क्योंकि इसके संकेत आम से दिखते हैं और उम्र के साथ बदलते रहते हैं.

मुख्य लक्षण: यह स्थिति लिवर की बीमारी, मानसिक बीमारी या न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर (तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्या) के रूप में सामने आ सकती है, जो समय के साथ बिगड़ती जाती है.
न्यूरोलॉजिकल मामले: न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के बढ़ने वाले कुछ मामलों में, लिवर की खराबी बहुत मामूली हो सकती है या बिल्कुल भी नहीं हो सकती है.

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मिले-जुले लक्षण: मरीजों में एक ही समय पर इन अलग-अलग तरह की बीमारियों के लक्षण एक साथ दिख सकते हैं.

उम्र के हिसाब से लक्षण: हालांकि उम्र चाहे जो भी हो, लक्षण अक्सर अस्पष्ट और सामान्य होते हैं, लेकिन बड़े मरीजों की तुलना में बच्चों और कम उम्र के युवओं में सिर्फ लिवर की बीमारी होने की संभावना ज्यादा होती है. ILBS द्वारा प्रकाशित जानकारी के अनुसार, इसके लक्षण बहुत अलग-अलग हो सकते हैं.

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  • मरीजों में कभी कोई लक्षण साफ नहीं दिख पाते हैं.
  • थकान
  • पीलिया (आंखों या त्वचा का पीला पड़ना)
  • पेट में सूजन
  • पेट में दर्द
  • हाथों का कांपना, अकड़न, या ठीक से काम न कर पाना
  • निगलने या बोलने में परेशानी
  • नींद में गड़बड़ी
  • व्यवहार में बदलाव
  • डिप्रेशन
  • मूड में उतार-चढ़ाव
  • बहुत ज्यादा बातें करना
  • आदि इसके लक्षणों में शामिल हैं.

कैसे करें इसकी पहचान

इस बीमारी की पहचान के लिए बेहतर रहेगा कि आप कोई भी असामान्य लक्षण दिखने पर या रेगुलर चेकअप के तौर पर डॉक्टर से विल्सन डिजीज की जांच कराएं और शरीर में कॉपर की मात्रा जानने के यूरीन कॉपर का टेस्ट कराएं. शुरुआत में ही इस बीमारी का पता लग जाए, तो बेहतर है, क्योंकि धीरे-धीरे बीमारी गंभीर हालात में ले जा सकती है. ज्यादा जानकारी के लिए बेहतर रहेगा कि आप लिवर और इस समस्या से जुड़े डॉक्टर से सलाह लें और इस बीमारी से बचा जा सकता है या नहीं इसके बारे में जाने.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

SOURCE: ILBS

First published on: Sep 07, 2026 04:24 PM

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About the Author

Azhar Naim

अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं और उन्हें न्यूज़ और ऑनलाइन कंटेंट लिखने का अच्छा अनुभव है. वर्तमान में वह News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं, जहां वह मुख्य रूप से न्यूज, ट्रेंडिंग, हाइपर-लोकल, वायरल, ऑटो, लाइफस्टाइल और हेल्थ बीट से जुड़ी खबरों पर स्टोरीज तैयार करते हैं. वह ट्रेनी के रूप में ट्रेंडिंग, वायरल, जनरल नॉलेज, टेक्नोलॉजी, इंटरनेशनल और लाइफस्टाइल जैसे विभिन्न विषयों पर डिजिटल कंटेंट लिखते आए हैं. अज़हर ने 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान और उसके बाद उन्हें कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अनुभव मिला, जिससे उन्हें न्यूज रिपोर्टिंग, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और पाठकों को ध्यान में रखकर कंटेंट बनाने की अच्छी समझ हासिल की. 1 साल से ज्यादा के अनुभव में अज़हर का मुख्य काम है डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स को समझना, SEO-फ्रेंडली कंटेंट लिखना और पाठकों से जुड़ी स्टोरीज तैयार करना.

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