बच्चे के जन्म के बाद उसका शरीर वक्त के साथ धीरे-धीरे मजबूत होता जाता है, लेकिन शुरुआती सालों व महीनों में उसका इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता है, जिस कारण खतरनाक बीमारियों का खतरा बना रहता है. ऐसी स्थिति पैदा न हो, इसके लिए कुछ जरूरी टीका लगवाना बेहद जरूरी माना जाता है. रिपोर्ट बताते हैं कि टीका न लगने के कारण बच्चे को भविष्य में गंभीर बीमारी पकड़ सकती है, जिससे उसकी हेल्थ बेहद खराब हो सकती है, इसलिए जरूरी है कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही टीका वक्त पर लगाया जाए.
इसी कड़ी में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, साल 2025 में दुनिया के करीब 1.35 करोड़ बच्चों को एक भी वैक्सीन नहीं मिली है, जिन्हें जीरो डोज कहा जाता है. एक्सपर्ट कहते हैं कि नियमित टीकाकरण से पोलियो, खसरा, टिटनेस, काली खांसी, निमोनिया और हेपेटाइटिस-बी जैसी कई गंभीर बीमारियों से बचाव हो पाता है.
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जन्म से 14 हफ्तों के बीच कौन-कौन सा टीका
बच्चे के जन्म के समय ही तीन अहम टीके लगाए जाते हैं. इनमें BCG टीबी से बचाव के लिए, OPV-0 पोलियो से सुरक्षा के लिए और Hepatitis-B Birth Dose लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारी से बचाने के लिए दी जाती है. इसके बाद 6 हफ्ते की उम्र में कई जरूरी वैक्सीन की डोज दी जाती हैं. इनमें OPV-1, पेंटावेलेंट-1 (Pentavalent-1), रोटावायरस वैक्सीन (RVV)-1, इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन की आंशिक खुराक (fIPV)-1, न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (PCV)-1 शामिल हैं. वहीं, 10 से 14 हफ्तों में OPV-2, पेंटावेलेंट-2, RVV-2 और OPV-3, पेंटावेलेंट-3, fIPV-2, RVV-3, PCV-2 टिका दिया जाता है. ये टीके बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं.
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9 महीने से 6 साल तक ये वैक्सीनेशन जरूरी
इन सबके अलावा जब बच्चा 9 महीने को हो जाता है, तब उसे और भी जरूरी टीका लगवाना होता है. 9 से 12 महीने के दौरान खसरा और रुबेला (MR)-1, जेई (JE)-1, PCV-बूस्टर (PCV-Booster) लगवाना जरूरी है. वहीं, 16 महीने से 24 महीने के दौरान MR-2, JE-2, डिप्थीरिया, परटुसिस और टिटनेस (DPT)-बूस्टर-1, OPV बूस्टर जरूरी है. इतना ही नहीं, 5 से 6 साल के बीच बच्चे को DPT-बूस्टर-2 लगवाने की सलाह दी जाती है.
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एक जरूरी जानकारी
JE (Japanese Encephalitis/जापानी दिमागी बुखार) वैक्सीन सिर्फ उन जिलों में लगाई जाती है, जहां इस बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है यानी जो क्षेत्र JE के लिए स्थानिक (Endemic) माने जाते हैं. बच्चे की वैक्सीन की जरूरत उसके रहने वाले क्षेत्र और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर तय की जाती है. भारत सरकार के National Center for Vector Borne Diseases Control के नियमों के अनुसार बच्चों को इसकी 2 खुराक (Doses) दी जाती हैं.
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एक नजर में देखें सभी टीके की जानकारी
| उम्र | लगने वाली वैक्सीन |
|---|---|
| जन्म के समय | बेसिलस कैलमेट गुएरिन (BCG), ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV)-0 खुराक, हेपेटाइटिस B जन्म खुराक (Hepatitis B Birth Dose) |
| 6 हफ्ते | OPV-1, पेंटावेलेंट-1 (Pentavalent-1), रोटावायरस वैक्सीन (RVV)-1, इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन की आंशिक खुराक (fIPV)-1, न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (PCV)-1* |
| 10 हफ्ते | OPV-2, पेंटावेलेंट-2 (Pentavalent-2), रोटावायरस वैक्सीन (RVV)-2 |
| 14 हफ्ते | OPV-3, पेंटावेलेंट-3 (Pentavalent-3), fIPV-2, रोटावायरस वैक्सीन (RVV)-3, PCV-2* |
| 9 से 12 महीने | खसरा और रुबेला (MR)-1, जेई (JE)-1**, PCV-बूस्टर (PCV-Booster)* |
| 16 से 24 महीने | MR-2, JE-2**, डिप्थीरिया, परटुसिस और टिटनेस (DPT)-बूस्टर-1, OPV बूस्टर |
| 5 से 6 साल | DPT-बूस्टर-2 |
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