---विज्ञापन---

गैजेट्स angle-right

सोशल मीडिया पर अब सिर्फ 120 मिनट में हटेगा विवादित कंटेंट! Instagram, YouTube और X यूजर्स पर क्या होगा असर?

सोशल मीडिया यूजर्स के लिए बदलाव होने जा रहा है. नए नियमों के तहत Instagram, YouTube और X जैसे प्लेटफॉर्म को गंभीर और गैरकानूनी कंटेंट पर पहले से कहीं तेजी से कार्रवाई करनी होगी. जानते हैं इसकी डिटेल्स.

---विज्ञापन---

सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट वायरल होने में कुछ ही मिनट लगते हैं लेकिन नए नियमों के बाद उसे हटाने में भी ज्यादा समय नहीं लगेगा. केंद्र सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्मे के लिए नियमों को और सख्त कर दिया है. जिसमें अब Instagram, X और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म को गंभीर, गैरकानूनी या विवादित कंटेट पर पहले से ज्यादा तेज कार्रवाई करनी होगी. अब कुछ खास तरह के विवादित कंटेट को शिकायत मिलने के बाद सिर्फ 120 मिनट यानी 2 घंटे केे अंदर हटाना होगा. इतना ही नहीं AI से बनाए गए फोटो, वीडियो और ऑडियो को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं.

सोशल मीडिया पर अब तेजी से होगी कार्रवाई

नए नियमों के लागू होने के बाद सोशल मीडियो प्लेटफॉर्मे पर मौजूद कंटेंट को लेकर कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है. सरकार का मकसद डिजिटल क्राइम, डीपकेफ, ऑनलाइन अब्यूज और ऐसे कंटेट पर जल्दी रोक लगाना है जिससे किसी व्यक्ति को गंभीर नुकसान हो सकता है. हालांकि, इन नियमों के साथ इंटरनेट पर कंटेंट की निगरानी और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर बहस भी शुरू हो गई है.

---विज्ञापन---

24 घंटे की जगह अब सिर्फ 120 मिनट

नए नियमों के सबसे बड़ बदलाव कंटेंट हटाने की टाइम लिमिट को लेकर हुआ है. पहले शिकायत मिलने के बाद सोशिल मीडिय कंपनियों के पास कुछ मामलों में कार्रवाई के लिए 24 घंटे तक का समय होता था. अब यह टाइम घटकर सिर्फ 2 घंटे कर दिय गया है. इसका मकसद गंभीर मामलों में तत्काल कार्रवाई में तेजी लाने के लिए है.

किन मामलों में जल्दी हटेगा कंटेंट?

हर सोशल मीडियो पोस्ट इस नियम के दायरे में नहीं आएगी. सरकार के मुताबिकि ऐसा कंटेट जो किसी व्यक्ति को गंभी नुकसान पहुंचा सकता है. इसमें बिना परमिशन शेयर की गई पर्सनल तस्वीरें या वीडियो, AI से बनाए गए डीपफेक, किसी का चेहरा या आवाज बदल कर बनाया गया फर्ची कंटेट और कोर्ट या सरकार की ओर से अवैध घोषित चीजें शामिल है.

---विज्ञापन---

डीपफेक और निजी तस्वीरों पर खास नजर

अगर किसी व्यक्ति की निजी फोटो वीडियो उसकी परमिश के बिना सोशल मीडिया पर शेयर की जाती है या डीप फेक कंटेट को शेयर किया जाता है तो शिकायत के बाद प्लेटफॉर्म को तेज के एक्शन लेना होगा. सरकार का मानना है कि ऐसे कटेंट को शुरुआत में ही रोकने से उसके बड़े स्तर पर वायरल होने और नुकसान पहुंचाने की संभावना को कम किया जा सकता है.

AI से बने कंटेंट की देनी होगी जानकारी

नए नियम के मुताबिक AI की मदद से तैयार किया गए फोटो, वीडियो और ऑडियो को लेकर भी जानकारी साझा करना जरूरी होगा. यानी यूजर को साफ बताना होगा कि ये कंटेट AI है या AI की मदद से बनाया गया है या इसमें कुछ कुछ जगहों पर AI कंटेट का उपयोग किया गया है.

---विज्ञापन---

प्लेटफॉर्म खुद भी लगा सकते हैं वॉटरमार्क

अगर कोई यूजर AI से बने कंटेट की जानकारी नहीं देता तो प्लेटफॉर्म ऐसे कंटेट की पहचान करके उस पर वॉटरमार्क लगा सकता है. जरूरत पड़ने पर संबंधित कंटेट को हटाया भी जा सकता है. हालांकि, सामान्य फोटो एडिटिंग, कैमरा फिल्टर और रोजमर्रा के इमेज एन्हांसमेंट को इस नियम से बाहर रखा गया है.

नए नियमों के बाद Meta, Google और X जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर भी दबाव बढ़ेगा. अगर कोई प्लेटफॉर्म तय समय के भीतर जरूरी कार्रवाई नहीं करता है, तो उसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा खोने का जोखिम हो सकता है.

---विज्ञापन---

ये भी पढ़ें- Apple Event 2026: iPhone 18 सीरीज से लेकर AI Siri तक, सितंबर में हो सकते हैं ये बड़े लॉन्च

क्या है सेफ हार्बर सुरक्षा?

सेफ हार्बर वह कानूनी सुरक्षा है, जिसमें सोशल मीडिया कंपनियां यूजर्स के द्वारा पोस्ट किए गए कंटेट के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं मानी जाती है. ऐसे अगर कोई कंपनी इस सुरक्षा को खो देती है तो उस विवादित कंटेट को लेकर कंपनी और उसके अधिकारियों पर भी कानूनी कार्रवाी का जोखिम बढ़ सकता है.

---विज्ञापन---

आम यूजर्स पर क्या पडे़गा असर?

इन नियमों का असर आम यूजर्स को अपनी सोशल मीडिया टाइमलाइन पर भी दिखाई दे सकता है. डीपफेक वीडियो फर्जी ऑडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरें और बिना सहमति शेयर किया गया कंटेंट पहले के मुकाबले तेजी से हटाया जा सकता है. इससे ऑनलाइन उत्पीड़न या निजी कंटेंट के गलत इस्तेमाल के मामलों में पीड़ितों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है.  वहीं इस नियम से सिर्फ 2 घंटे में कार्रवाई होगी. ऐसे में कोई वीडियो या फोटो लाखों लोगों तक पहुंचने से पहले ही हटाया जा सकता है। यानी सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट की उम्र भी पहले से कम हो सकती ह

अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर उठे सवाल

नए नियमों का दूसरा पहलू अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ा है. दो घंटे के अंदर बड़ी संख्या में शिकायतों पर फैसला लेने के लिए प्लेटफॉर्म को AI बेस्ड मॉडरेशन सिस्टम पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ सकता है. ऐसे सिस्टम कई बार व्यंग्य, राजनीतिक टिप्पणी, पत्रकारिता या सामान्य चर्चा को भी गलती से नियमों का उल्लंघन मान सकते हैं. इसलिए आने वाले समय में डिजिटल सुरक्षा और अभिव्यक्ति की आजादी के बीच संतुलन बनाना इन प्लेटफॉर्म्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है.

---विज्ञापन---

ये भी पढ़ें- अपडेट के बाद पुराना iPhone क्यों हो जाता है स्लो? Apple ने खुद बताया असली कारण, जानिए कैसे बढ़ाएं स्पीड

First published on: Aug 07, 2026 01:41 PM

End of Article

About the Author

Mikita Acharya

Mikita Acharya (मिकिता आचार्य): इन्होंने पत्रकारिता की डिग्री देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के स्कूल ऑफ जर्नालिज्म से 2019 में पूरी की। पत्रकारिता में 6 साल के अनुभव के साथ वर्तमान में ये News 24 में सीनियर कॉन्टेंट राइटर हैं और यहां ऑटो व टेक बीट को कवर करती हैं। तेज रफ्तार ऑटोमोबाइल दुनिया और बदलती टेक्नोलॉजी को सरल भाषा में पेश करना इनकी खासियत है।

Read More

Mikita Acharya

Mikita Acharya (मिकिता आचार्य): इन्होंने पत्रकारिता की डिग्री देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के स्कूल ऑफ जर्नालिज्म से 2019 में पूरी की। पत्रकारिता में 6 साल के अनुभव के साथ वर्तमान में ये News 24 में सीनियर कॉन्टेंट राइटर हैं और यहां ऑटो व टेक बीट को कवर करती हैं। तेज रफ्तार ऑटोमोबाइल दुनिया और बदलती टेक्नोलॉजी को सरल भाषा में पेश करना इनकी खासियत है।

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola