---विज्ञापन---

गैजेट्स angle-right

बच्चों को सोशल मीडिया से दूर क्यों कर रही सरकारें, ऑस्ट्रेलिया से UAE तक लगा बैन, क्या भारत में भी आने वाला है ऐसा कानून?

ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, यूके और यूएई जैसे देशों ने 15 या 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन या सख्त प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत भी इसी राह पर चल सकता है? जानिए किन कारणों से देश बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखना चाहते हैं और भारत में फिलहाल क्या नियम लागू हैं.

---विज्ञापन---

आज के समय में सोशल मीडिया बच्चों और किशोरों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुका है. लेकिन इसके बढ़ते इस्तेमाल ने दुनियाभर की सरकारों की चिंता भी बढ़ा दी है. साइबरबुलिंग, मानसिक स्वास्थ्य पर असर, ऑनलाइन शोषण, अश्लील कंटेंट और सोशल मीडिया की लत जैसे मुद्दों को देखते हुए कई देशों ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सख्त प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए हैं. ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, यूके और यूएई जैसे देशों ने हाल के महीनों में ऐसे कदम उठाए हैं, जिससे यह बहस तेज हो गई है कि क्या बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखना ही सबसे बेहतर समाधान है.

आखिर बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर चिंता क्यों बढ़ी?

राउटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ सालों में हुई कई रिसर्च में सामने आया है कि सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों और किशोरों में चिंता, डिप्रेशन, नींद की समस्या और कॉन्फिडेंस में कमी जैसी परेशानियां बढ़ा सकता है. इसके अलावा साइबरबुलिंग, ऑनलाइन ठगी, अजनबियों से संपर्क और हानिकारक कंटेंट तक आसान पहुंच भी बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है. कई सरकारों का मानना है कि बच्चों को इन खतरों से बचाने के लिए सख्त नियम जरूरी हैं. 

---विज्ञापन---

ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया को दिखाया रास्ता

ऑस्ट्रेलिया दिसंबर 2025 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू करने वाला पहला देश बना. इसके तहत टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और अन्य बड़े प्लेटफॉर्म्स को नाबालिगों के अकाउंट रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने पड़े. नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माने का प्रावधान भी किया गया.

एशिया और यूरोप के कई देश भी हुए सख्त

ऑस्ट्रेलिया के बाद इंडोनेशिया ने भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू करने का फैसला लिया. वहीं यूएई ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने और इस्तेमाल करने पर रोक लगाने की घोषणा की है. प्लेटफॉर्म्स को उम्र सत्यापन (Age Verification) की व्यवस्था लागू करनी होगी.

---विज्ञापन---

इसी तरह यूनाइटेड किंगडम ने भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का ऐलान किया है. ब्रिटिश सरकार का कहना है कि यह कदम बच्चों को ऑनलाइन नुकसान और नशे जैसी आदत पैदा करने वाले एल्गोरिदम से बचाने के लिए उठाया जा रहा है.

ये भी पढ़ें- फोन को दिन में कितनी बार चार्ज करना चाहिए? 90% लोग करते हैं ये गलती और खराब हो जाती है बैटरी

---विज्ञापन---

क्या सिर्फ बैन ही समाधान है?

हालांकि सभी विशेषज्ञ इस फैसले से सहमत नहीं हैं. कुछ का मानना है कि सोशल मीडिया पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय बच्चों को डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) सिखाना और प्लेटफॉर्म्स को ज्यादा सुरक्षित बनाना बेहतर विकल्प हो सकता है. उनका तर्क है कि सोशल मीडिया बच्चों को सीखने, जानकारी पाने और दोस्तों से जुड़े रहने का भी अवसर देता है.

भारत में क्या है मौजूदा नियम?

भारत में अभी बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है. हालांकि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) नियमों के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए माता-पिता की सहमति से जुड़े प्रावधानों पर चर्चा और नियम बनाए गए हैं. कई विशेषज्ञ और बाल अधिकार संगठन बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर और सख्त नियमों की मांग भी कर रहे हैं. 

---विज्ञापन---

क्या भारत में भी लग सकता है सोशल मीडिया बैन?

फिलहाल भारत सरकार ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. लेकिन दुनिया के कई देशों द्वारा उठाए जा रहे कदमों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारत भी उम्र सत्यापन, पैरेंटल कंट्रोल और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े नियमों को और सख्त कर सकता है. हालांकि पूर्ण बैन होगा या नहीं, इस पर अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है.

आगे क्या?

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा अब केवल परिवारों की नहीं बल्कि सरकारों और टेक कंपनियों की भी बड़ी जिम्मेदारी बन चुकी है. दुनिया के कई देशों ने सोशल मीडिया पर उम्र आधारित प्रतिबंध लगाकर एक नई बहस शुरू कर दी है. अब नजर इस बात पर है कि भारत जैसे बड़े डिजिटल बाजार इस चुनौती से निपटने के लिए किस तरह का रास्ता चुनते हैं.

---विज्ञापन---

ये भी पढ़ें- दिनभर रील्स देखिए, फिर भी खत्म नहीं डेटा! बस ऑन कर दें फोन में ये फीचर

First published on: Jun 19, 2026 10:36 AM

End of Article

About the Author

Mikita Acharya

Mikita Acharya (मिकिता आचार्य): इन्होंने पत्रकारिता की डिग्री देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के स्कूल ऑफ जर्नालिज्म से 2019 में पूरी की। इसी साल अपने करियर की शुरुआत ETV Bharat के स्टेट डेस्क से की। मिकिता ने दैनिक भास्कर में 3 साल से ज्यादा समय तक काम करते हुए जमीनी रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक अपनी मजबूत पकड़ बनाई। बाद में उन्होंने पंजाब केसरी ग्रुप के साथ भी काम किया। पत्रकारिता में 5.5 साल के अनुभव के साथ वर्तमान में ये News 24 में सीनियर कॉन्टेंट राइटर हैं और यहां ऑटो व टेक बीट को कवर करती हैं। तेज रफ्तार ऑटोमोबाइल दुनिया और बदलती टेक्नोलॉजी को सरल भाषा में पेश करना इनकी खासियत है।

Read More

Mikita Acharya

Mikita Acharya (मिकिता आचार्य): इन्होंने पत्रकारिता की डिग्री देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के स्कूल ऑफ जर्नालिज्म से 2019 में पूरी की। इसी साल अपने करियर की शुरुआत ETV Bharat के स्टेट डेस्क से की। मिकिता ने दैनिक भास्कर में 3 साल से ज्यादा समय तक काम करते हुए जमीनी रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक अपनी मजबूत पकड़ बनाई। बाद में उन्होंने पंजाब केसरी ग्रुप के साथ भी काम किया। पत्रकारिता में 5.5 साल के अनुभव के साथ वर्तमान में ये News 24 में सीनियर कॉन्टेंट राइटर हैं और यहां ऑटो व टेक बीट को कवर करती हैं। तेज रफ्तार ऑटोमोबाइल दुनिया और बदलती टेक्नोलॉजी को सरल भाषा में पेश करना इनकी खासियत है।

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola