आज स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. लेकिन ज्यादातर यूजर्स एक बात को लेकर परेशान रहते हैं कि फोन को कितनी बार चार्ज करना सही है और बैटरी की हेल्थ लंबे समय तक कैसे बनाए रखी जाए. कई बार गलत चार्जिंग आदतें ही बैटरी की उम्र कम कर देती हैं.
बैटरी हेल्थ के लिए जानिए गोल्डन रूल

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अगर आपके फोन की बैटरी जल्दी खत्म होती है या उसकी हेल्थ कमजोर हो रही है, तो आपको स्मार्टफोन चार्जिंग का सबसे जरूरी नियम जानना चाहिए. सही चार्जिंग पैटर्न अपनाकर बैटरी की लाइफ को काफी हद तक बढ़ाया जा सकता है.
कब लगाएं और कब हटाएं चार्जर?

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जब फोन की बैटरी करीब 20% तक पहुंच जाए तो उसे चार्जिंग पर लगा देना चाहिए. वहीं, बैटरी 80% या 85% तक पहुंचने पर चार्जर हटाना बेहतर माना जाता है. बार-बार 100% तक चार्ज करने से बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जिससे उसकी उम्र प्रभावित होती है.
चार्जिंग साइकिल क्या होती है?

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स्मार्टफोन की बैटरी की लाइफ चार्जिंग साइकिल पर निर्भर करती है. आमतौर पर एक बैटरी 300 से 500 चार्जिंग साइकिल तक अपनी क्षमता बनाए रखती है. 0% से 100% तक चार्ज होना एक फुल साइकिल कहलाता है. वहीं, अगर आप 40% से 80% तक दो बार चार्ज करते हैं तो यह लगभग आधा साइकिल ही माना जाता है.
रातभर चार्ज करने से बैटरी खराब हो जाती है?

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आधुनिक स्मार्टफोन में ऑटो कट-ऑफ सिस्टम होता है, जो 100% चार्ज होने के बाद बिजली की सप्लाई रोक देता है. इसलिए फोन के फटने जैसी आशंका नहीं होती. हालांकि, लंबे समय तक चार्जर से जुड़े रहने पर बैटरी ट्रिकल चार्जिंग मोड में रह सकती है, जो बैटरी हेल्थ के लिए आदर्श नहीं माना जाता.
पहली बार 8 घंटे चार्ज करना और कोई भी चार्जर इस्तेमाल करना

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नए फोन को पहली बार इस्तेमाल करने से पहले 8 घंटे चार्ज करने की जरूरत नहीं होती. यह नियम पुरानी निकल बैटरियों के समय का था. इसके अलावा, फोन को हमेशा ओरिजिनल या किसी भरोसेमंद ब्रांड के सर्टिफाइड चार्जर से ही चार्ज करना चाहिए. सस्ते और लोकल चार्जर सही वोल्टेज नहीं दे पाते, जिससे फोन ओवरहीट होने और नुकसान होने का खतरा बढ़ सकता है. (Images Credit-Unsplash)