डिजिटल इंडिया के इस दौर में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, दस्तावेजों को सुरक्षित रखने या रोजमर्रा के बिलों का भुगतान करने के लिए मोबाइल ऐप्स हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. गूगल प्ले स्टोर पर आज लगभग हर सरकारी सेवा का आधिकारिक ऐप उपलब्ध है. हालांकि, इस बढ़ती निर्भरता के बीच साइबर अपराधियों ने भी अपना जाल बिछा दिया है. प्ले स्टोर पर असली ऐप्स से हूबहू मिलते-जुलते कई फर्जी ऐप्स मौजूद हैं, जो आम यूजर्स को भ्रमित कर रहे हैं.
इन नकली ऐप्स को डाउनलोड करने का अंजाम बेहद गंभीर हो सकता है. इससे न केवल आपका बेहद निजी डेटा चोरी हो सकता है, बल्कि पलक झपकते ही आपका बैंक खाता भी खाली हो सकता है. तकनीकी जानकारों और साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, किसी भी ऐप को इंस्टॉल करने से पहले तीन बेहद आसान लेकिन महत्वपूर्ण पैमानों पर उसे जरूर परखना चाहिए.
कैसे करें असली और नकली ऐप्स की पहचान?
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डेवलपर का नाम और आधिकारिक डोमेन
जब भी आप प्ले स्टोर पर कोई ऐप खोजते हैं, तो ऐप के नाम के ठीक नीचे उसके डेवलपर का नाम दर्ज होता है. असली सरकारी ऐप के नीचे हमेशा संबंधित मंत्रालय, राज्य सरकार या 'नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC)' लिखा होगा. इसके अतिरिक्त, ऐप की विस्तृत जानकारी (Details) में जाकर डेवलपर की वेबसाइट और ईमेल आईडी जरूर देखें. आधिकारिक सरकारी वेबसाइट्स के अंत में हमेशा .gov.in या .nic.in लगा होता है. यदि किसी कथित सरकारी ऐप का डेवलपर कोई निजी कंपनी या किसी व्यक्ति की सामान्य जीमेल आईडी है, तो वह निश्चित रूप से एक फर्जी ऐप है.
ऐप द्वारा मांगी जाने वाली परमिशन
आधिकारिक सरकारी ऐप्स केवल वही परमिशन मांगते हैं जो उनकी कार्यप्रणाली के लिए अनिवार्य होती हैं, जैसे स्थान (Location) या कैमरा. यदि कोई साधारण ऐप, जो केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी देने का दावा करता है, आपके फोन के कॉन्टैक्ट्स, गैलरी या पर्सनल मैसेज (SMS) को पढ़ने की अनुमति मांगता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं. ये फर्जी ऐप्स परमिशन मिलते ही आपके संवेदनशील डेटा और बैंकिंग ओटीपी (OTP) को स्कैमर्स तक पहुंचा देते हैं.
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डाउनलोड नंबर और रिव्यू
महत्वपूर्ण सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (जैसे उमंग या डिजिलॉकर) को करोड़ों की संख्या में लोग इस्तेमाल करते हैं. यदि किसी बड़े सरकारी ऐप के डाउनलोड्स की संख्या केवल कुछ हजार या लाख दिखाई दे, तो उसकी प्रामाणिकता संदिग्ध है. इसके अलावा, केवल 'स्टार रेटिंग' देखकर ऐप डाउनलोड न करें, क्योंकि रेटिंग्स को फर्जी तरीके से भी बढ़ाया जा सकता है. ऐप के कमेंट सेक्शन में जाकर लिखित रिव्यू पढ़ें, जहां ठगे जा चुके यूजर्स अक्सर 'फ्रॉड' या 'फर्जी' जैसी चेतावनियां दर्ज करते हैं.
डिजिटल इंडिया के इस दौर में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, दस्तावेजों को सुरक्षित रखने या रोजमर्रा के बिलों का भुगतान करने के लिए मोबाइल ऐप्स हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. गूगल प्ले स्टोर पर आज लगभग हर सरकारी सेवा का आधिकारिक ऐप उपलब्ध है. हालांकि, इस बढ़ती निर्भरता के बीच साइबर अपराधियों ने भी अपना जाल बिछा दिया है. प्ले स्टोर पर असली ऐप्स से हूबहू मिलते-जुलते कई फर्जी ऐप्स मौजूद हैं, जो आम यूजर्स को भ्रमित कर रहे हैं.
इन नकली ऐप्स को डाउनलोड करने का अंजाम बेहद गंभीर हो सकता है. इससे न केवल आपका बेहद निजी डेटा चोरी हो सकता है, बल्कि पलक झपकते ही आपका बैंक खाता भी खाली हो सकता है. तकनीकी जानकारों और साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, किसी भी ऐप को इंस्टॉल करने से पहले तीन बेहद आसान लेकिन महत्वपूर्ण पैमानों पर उसे जरूर परखना चाहिए.
कैसे करें असली और नकली ऐप्स की पहचान?
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डेवलपर का नाम और आधिकारिक डोमेन
जब भी आप प्ले स्टोर पर कोई ऐप खोजते हैं, तो ऐप के नाम के ठीक नीचे उसके डेवलपर का नाम दर्ज होता है. असली सरकारी ऐप के नीचे हमेशा संबंधित मंत्रालय, राज्य सरकार या ‘नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC)’ लिखा होगा. इसके अतिरिक्त, ऐप की विस्तृत जानकारी (Details) में जाकर डेवलपर की वेबसाइट और ईमेल आईडी जरूर देखें. आधिकारिक सरकारी वेबसाइट्स के अंत में हमेशा .gov.in या .nic.in लगा होता है. यदि किसी कथित सरकारी ऐप का डेवलपर कोई निजी कंपनी या किसी व्यक्ति की सामान्य जीमेल आईडी है, तो वह निश्चित रूप से एक फर्जी ऐप है.
ऐप द्वारा मांगी जाने वाली परमिशन
आधिकारिक सरकारी ऐप्स केवल वही परमिशन मांगते हैं जो उनकी कार्यप्रणाली के लिए अनिवार्य होती हैं, जैसे स्थान (Location) या कैमरा. यदि कोई साधारण ऐप, जो केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी देने का दावा करता है, आपके फोन के कॉन्टैक्ट्स, गैलरी या पर्सनल मैसेज (SMS) को पढ़ने की अनुमति मांगता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं. ये फर्जी ऐप्स परमिशन मिलते ही आपके संवेदनशील डेटा और बैंकिंग ओटीपी (OTP) को स्कैमर्स तक पहुंचा देते हैं.
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डाउनलोड नंबर और रिव्यू
महत्वपूर्ण सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (जैसे उमंग या डिजिलॉकर) को करोड़ों की संख्या में लोग इस्तेमाल करते हैं. यदि किसी बड़े सरकारी ऐप के डाउनलोड्स की संख्या केवल कुछ हजार या लाख दिखाई दे, तो उसकी प्रामाणिकता संदिग्ध है. इसके अलावा, केवल ‘स्टार रेटिंग’ देखकर ऐप डाउनलोड न करें, क्योंकि रेटिंग्स को फर्जी तरीके से भी बढ़ाया जा सकता है. ऐप के कमेंट सेक्शन में जाकर लिखित रिव्यू पढ़ें, जहां ठगे जा चुके यूजर्स अक्सर ‘फ्रॉड’ या ‘फर्जी’ जैसी चेतावनियां दर्ज करते हैं.