50 रुपये की केबल और 1000 रुपये वाली चार्जिंग केबल में क्या फर्क है, क्या सस्ती से खराब होता है फोन?

50-100 रुपये की सस्ती चार्जिंग केबल देखकर पैसे बचाना आपको भारी पड़ सकता है. यहां जानते हैं कि क्या सस्ती केबल के उपयोग से फोन में खराबी हो सकती है.

charging cable

50 रुपये की केबल और 1000 रुपये वाली चार्जिंग केबल में क्या फर्क है? (Photo-Freepik)

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स्मार्टफोन खरीदने में हम हजारों रुपये खर्च कर देते हैं, लेकिन जब चार्जिंग केबल खरीदने की बारी आती है तो अक्सर सस्ती केबल देखकर पैसे बचाने की कोशिश करते हैं. बाजार में 50-100 रुपये की लोकल केबल से लेकर 1000 रुपये या उससे ज्यादा कीमत वाली ब्रांडेड केबल मौजूद हैं. देखने में दोनों लगभग एक जैसी लग सकती है, लेकिन इनकी कीमत में इतना अंतर क्यों होता है और क्या महंगी केबल खरीदना वाकई जरूरी है? 

सस्ती और महंगी केबल में सबसे बड़ा फर्क

दोनों तरह की केबल में सबसे बड़ा अंतर इनके बनने में इस्तेमाल होने वाली चीजों का होता है. अच्छी ब्रांडेट केबल में बेहतर क्वालिटी के मोटे कॉपर वायर का इस्तेमाल किया जाता है. साथ ही इन्हें बाहरी दबाव, मुड़ने और टूटने से बचाने के लिए बेहतर शील्डिंग दी जाती है. कई केबल में एल्युमिनियम फॉयल शील्डिंग और ऊपर से ब्रेडेड नायलॉन या केलर जैसी मजबूत कोटिंग भी होती है.

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50 रुपये की केबल जल्दी क्यों खराब होती है?

लोकल और बेहद सस्ती केबल में अक्सर पतले और कम गुणवत्ता वाले एल्युमिनियम या मिलावटी तार इस्तेमाल किए जाते हैं. इनके ऊपर साधारण प्लास्टिक की कोटिंग होती है. लगातार मोड़ने और इस्तेमाल करने पर ऐसी केबल चार्जिंग पिन के पास से कट या छिल सकती है. यही वजह है कि सस्ती केबल कई बार कुछ ही हफ्तों में खराब हो जाती है.

चार्जिंग स्पीड में भी होता है अंतर

आजकल ज्यादातर स्मार्टफोन फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करते हैं. अच्छी ब्रांडेड केबल बेहतर पावर डिलीवरी और तेज चार्जिंग में मदद करती है. इनके कनेक्टर में मौजूद तकनीक फोन की जरूरत के हिसाब से पावर सप्लाई को मैनेज करने में मदद करती है. इससे चार्जिंग बेहतर तरीके से होती है और ओवरहीटिंग का खतरा कम रहता है. वहींं खराब क्वालिटी की केबल फोन को धीमी गती से चार्ज कर सकती है.

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डेटा ट्रांसफर में भी आ सकती है दिक्कत

चार्जिंग के अलावा केबल का इस्तेमाल फोन से कंप्यूटर या दूसरे डिवाइस में डेटा ट्रांसफर के लिए भी किया जाता है. सस्ती और खराब क्वालिटी की केबल में डेटा ट्रांसफर के दौरान बार-बार कनेक्शन टूटने या डिवाइस डिसकनेक्ट होने की समस्या आ सकती है. अच्छी केबल इस मामले में ज्यादा भरोसेमंद रहती है.

सस्ती केबल में सेफ्टी का खतरा

खराब क्वालिटी की केबल जल्दी गर्म हो सकती है और शॉर्ट सर्किट का खतरा भी बढ़ सकता है. ऐसी केबल पावर में होने वाले उतार चढ़ाव को सही तरीक से संभाव नहीं पाती. इसका असर फोन की बैटरी और दूसरे हार्डवेयर पर पड़ सकता है। इसलिए सिर्फ कम कीमत देखकर केबल खरीदना हमेशा समझदारी नहीं है.

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खराब केबल से फोन को क्या नुकसान

कुछ मामलों में खराब चार्जिंग केबल की वजह से फोन के अंदर मौजूद महत्वपूर्ण हार्डवेयर तक खराब हो सकते हैं. यानी कुछ रुपये बचाने के चक्कर में महंगा स्मार्टफोन खतरे में पड़ सकता है. अच्छी क्वालिटी की केबल ज्यादा समय तक चलने के साथ डिवाइस को सुरक्षित चार्ज करने में भी मदद करती है. इसलिए महंगी केबल को सिर्फ फिजूलखर्ची मानने के बजाय अपने महंगे गैजेट की सुरक्षा के लिए जरूरी निवेश के तौर पर देखा जा सकता है. 

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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