एक अपमानजनक टिप्पणी और फिर देखते ही देखते शुरू हुआ एक जनआंदोलन. किसने सोचा होगा कि एक कॉकरोच शब्द किसी आंदोलन को भी जन्म दे सकता है? शनिवार को देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत को भी धन्यवाद दिया.
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने अपने बयान में कॉकरोच शब्द का इस्तेमाल किया था. इस शब्द के बाद ही इस जन्म हुआ कॉकरोच जनता पार्टी का और धीरे-धीरे कॉकरोच ने सोशल मीडिया पर भी एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया. अचानक इंस्टाग्राम पर कॉकरोच से जुड़े मीम, कार्टून, पोस्टर्स, टिप्पणियां और मीम्स की भरमार हो गई. जिसके बाद दिपके ने बनाई अपनी पार्टी… कॉकरोच जनता पार्टी. सबसे पहले इसकी शुरूआत इंस्टाग्राम से ही हुई और लाखों लोगों ने इसके ऑफिशियल पेज को फॉलो करना शुरू कर दिया. इन लोगों में लाखों छात्र GEN Z ही थे.
फिर अचानक भारत में कॉकरोच जनता पार्टी का इंस्टाग्राम अकाउंट बंद कर दिया गया, लेकिन ये सफर यही नहीं रुका बल्कि इसका एक और पेज बनाया गया और उसका नाम रखा गया ‘Cockroach is back’ और इसका नारा था ‘कॉकरोच कभी नहीं मरते’.
6 जून को फ्लॉप शो से हुई थी अभियान की शुरुआत
बता दें कि जब 6 जून को बोस्टन (अमेरिका) से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे अभिजीत दिपके के हाथ में संविधान की प्रति और डॉ. बी.आर. आंबेडकर की ऑटोबायोग्राफी थी. जिसके बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट X पर एक पोस्ट किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि, ‘लैंडिंग हो गई है, जंतर मंतर पर मिलने का इंतजार है. फूल लाइएगा और पुलिस कर्मियों को दीजिएगा. यह लड़ाई प्रेम और शांति की है!’
जब 6 जून को पहले दिन सुबह 10 बजे अभिजीत जंतर मंतर पहुंचे तो उन्होंने वहां कम से कम 5 बार पूरे जोश के साथ भाषण दिए और धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो के नारे भी लगाए. लेकिन दोपहर होते-होते उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अपना प्रदर्शन खत्म करना पड़ा. उस दिन जंतर मंतर पर भीड़ भी बहुत कम थी. लोगों को ये भी लगने लगा था कि कॉकरोच जनता पार्टी कमजोर साबित होगी
कैसे हुई जंतर मंतर के आंदोलन की शुरूआत?
सोशल मीडिया पर इस आंदोलन ने तेजी पकड़नी शुरू की और फिर देखते ही देखते ये आंदोलन दिल्ली की सड़कों तक भी पहुंच गया. मानसून सत्र के बीच छात्रों ने जमकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की. वहीं, इंस्टाग्राम पर CJP के 2.63 करोड़ फॉलोअर्स हैं. ये फॉलोअर्स भाजपा और कांग्रेस से भी कहीं ज्यादा हैं.
20 जून को फिर शुरू हुआ आंदोलन
20 जून को अभिजीत दिपके एक बार फिर से जंतर मंतर पहुंचे और दूसरे दौर के आंदोलन की शुरुआत की. इस बार अभिजीत वहां अकेले नहीं थे बल्कि उनके साथ मशहूर शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन में शामिल हुए और उन्होंने 28 जून से जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. जिसके बाद इस आंदोलन और अधिक मजबूती मिली. फिर अचानक वांगचुक की तबियत बिगड़ी और 19 जुलाई को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया.
20 जुलाई को हुआ ‘चलो संसद’ मार्च
वहीं, 20 जुलाई को जब चलो संसद मार्च की शुरूआत हुई तो इस दौरान पुलिस ने छात्रों को रोकने के लिए उन पर लाठियां बरसाईं और आंसू गैस के गोले का भी इस्तेमाल किया. इन सबको लेकर दिल्ली पुलिस की भी खूब आलोचना हुई. दिल्ली पुलिस के इस कदम के बाद पूरे देश के युवाओं में गुस्सा और ज्यादा बढ़ गया और फिर जंतर मंतर पर देश के कोने-कोने से युवा पहुंचने लगे और इस आंदोलन का हिस्सा बने. कोई भी पीछे नहीं रहा ना ही लड़के और ना ही लड़कियां. यहां तक कि छोटे-छोटे बच्चे, बूढ़े, नए माता-पिता जिनके बच्चे बहुत छोटे थे… वो भी इस आंदोलन में शामिल हुए. सैंकड़ों की संख्या में मौजूद भीड़ को CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने संबोधित किया और वो इस आंदोलन का मुख्य चेहरा बने. इस दौरान उन्होंने लोगों को शांति पूर्ण धरना करने के साथ ही सरकार पर दबाव बनाए रखने की लोगों से अपील की और खुद भी अनशन पर बैठ गए.
फिर धर्मेंद्र प्रधान को देना पड़ा इस्तीफा
सरकार ने जब इस आंदोलन की लोकप्रियता को देखा तो आखिरकार उसे भी बैकफुट पर आना पड़ा. सरकार ने सीजेपी के लोगों से मुलाकात की और उनकी मांगों पर चर्चा की. साथ ही सरकार ने कुछ अहम मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया.
NEET पेपर लीक मामले के बाद देश के में कम से कम 20 छात्रों ने आत्महत्या की. उनके माता-पिता भी सीजेपी के इस आंदोलन का हिस्सा बने थे. सरकार के साथ मुलाकात के दौरान सीजेपी ने छात्रों से जुड़े आत्महत्या मामलों में उनके परिवार को सहायता राशि और प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज हुए मुकदमे वापस लेने जैसी मांगे रखीं और सरकार के साथ इन मामलों पर सहमति बनी. लेकिन इस बीच सीजेपी की सबसे बड़ी मांग यही रही कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें. जिसके बाद 25 जुलाई शनिवार, 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा सरकार को सौंप दिया.
आंदोलन में दिखा GEN Z का एक नया रुप
वहीं, दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए CJP के इस आंदोलन में बढ़ चढ़कर युवाओं ने हिस्सा लिया. खास कर GEN Z ने. इस आंदोलन में उनका एक अलग ही रूप देखने को मिला. मजाक मस्ती के साथ-साथ इस आंदोलन की सीरियसनेस को भी GEN Z ने समझा. इस आंदोलन और अभिजीत दिपके के लिए सबसे बड़ी सफलता मंत्री का इस्तीफा ही नहीं हैं बल्कि उन्होंने यह भी दिखाया कि आज की GEN Z सिर्फ सोशल मीडिया के ट्रेंड को ही फॉलो नहीं करती है बल्कि जरूरत पड़ने पर वह सड़कों पर उतरेगी और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात भी मनवा लेगी.
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