Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
Read More---विज्ञापन---
बांग्लादेश के वोटर्स गुरुवार को आम चुनाव के लिए वोटिंग करेंगे. शेख हसीना की सरकार के तख्ता पलट के बाद बांग्लादेश में पहली बार आम चुनाव हो रहे हैं. साल 2024 में छात्रों के प्रदर्शन के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी, उन्हें अपना देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी. बांग्लादेश में मंगलवार सुबह चुनावी प्रचार समाप्त हो गया.
वोटिंग सुबह 7:30 बजे से शुरू होगी, जो कि शाम 4:30 बजे तक चलेगी. 300 सीटों के लिए 64 जिलों में 42,761 पोलिंग सेंटर बनाए गए हैं.
यह भी पढ़ें अमेरिका-बांग्लादेश ट्रेड डील से भारत को झटका, जीरो टैरिफ बनेगा बड़ी चुनौती?
31 अक्टूबर 2025 तक कुल 12,77,11,793 वोटर्स रजिस्टर्ड हैं. बांग्लादेश में पहली बार पोस्टल वोटिंग होगी, जिससे करीब 1.5 करोड़ प्रवासी श्रमिकों को फायदा होगा. 300 सदस्यों को मतदान के जरिए चुना जाता है. बाकी 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं. ये आरक्षित सीटें पार्टियों को उनके परिणाम के हिसाब से बांटी जाती हैं. यहां बहुमत का आंकड़ा 151 सीटें हैं.

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी: बीएनपी 10 दलों के गठबंधन का नेतृत्व कर रही है. इसका नेतृत्व खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान कर रहे हैं. वह 17 साल के निर्वासन के बाद दिसंबर में लंदन से लौटे हैं. इस पार्टी की विचारधारा ‘बांग्लादेशी राष्ट्रवाद’ पर आधारित है. पार्टी को तारिक रहमान के पिता जियाउर रहमान ने बनाया था. जियाउर रहमान की हत्या के बाद उनकी पत्नी खालिदा जिया ने पार्टी का नेतृत्व किया. 1991 से 1996 और 2001 से 2006 तक दो बार खालिया जिया बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं. उस दौरान जमात-ए-इस्लामी पार्टी बीएनपी की सहयोगी पार्टी थी.
यह भी पढ़ें बांग्लादेश में बदलाव की आहट, सर्वे ने दिखाया नई सरकार का रोडमैप, पता चल गया जनता का मूड
साल 2009 में शेख हसीना की सरकार आ गई. 2018 में खालिदा जिया को भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराकर नजरबंद कर दिया गया. 2024 में तख्ता पलट के बाद खालिदा जिया को बरी कर दिया गया. शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से बीएनपी बड़ी पार्टी बनकर उभरी है.
जमात-ए-इस्लामी : ‘जमात’ 11-पार्टी गठबंधन का नेतृत्व कर रही है, जिसमें नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) भी शामिल है जमात ने कभी बीएनपी का साथ दिया था, लेकिन अब वह उसकी सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी है. गैर-मुस्लिमों का समर्थन पाने के लिए जमात ने पहली बार एक हिंदू उम्मीदवार, कृष्ण नंदी को मैदान में उतारा है.

जमात की स्थापना साल 1941 में अब्दुल आला मौदूदी ने की थी. अभी इसका नेतृत्व शफीकुर्रहमान कर रहे हैं. यह वही पार्टी है, जिसने 1971 में पाकिस्तान से आजादी का विरोध किया था. हालांकि, आजादी के बाद इस पार्टी को बैन कर दिया गया था. बाद में 1979 में बैन हटा दिया गया. बीएनपी का साथ पाने के बाद जमात मजबूत पार्टी बन गई.
दिसंबर 2025 के एक सर्वे के मुताबिक, बीएनपी को 33 फीसदी और जमात को 29 फीसदी समर्थन मिलने का अनुमान है. यह सर्वे अमेरिका की इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट ने करवाया था.
इस बार बड़ी संख्या में ‘जेन-जी’ वोटर्स पहली बार वोट डालेंगे, जो हसीना सरकार को हटाने वाले आंदोलन में सबसे आगे थे. यह चुनाव तय करेगा कि बांग्लादेश धर्मनिरपेक्षता की ओर बढ़ेगा या इस्लामी पार्टियों का वर्चस्व बढ़ेगा.

इससे पहले जनवरी 2024 में आम चुनाव हुए थे, जब मुख्य विपक्षी दल बीएनपी ने चुनाव का बहिष्कार किया था. इसके साथ ही इन चुनाव को इंटरनेशनल लेवल पर निष्पक्ष नहीं माना गया था. जुलाई 2024 में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें 1,400 लोग मारे गए और 20,000 घायल हुए. शेख हसीना को देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी. नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस ने अगस्त 2024 में अंतरिम नेता के रूप में कार्यभार संभाला. इसके बाद हसीना की पार्टी ‘अवामी लीग’ पर चुनाव लड़ने से बैन कर दिया गया.
न्यूज 24 पर पढ़ें Explainer, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।