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बॉलीवुड की चमक धमक भरी लाइफ के पीछे स्टार्स की संघर्ष भरी कहानियां भी होती हैं. कई बार तो कुछ स्टोरीज ऐसी सुनने के लिए मिलती हैं, जो बेहद ही भावुक कर देने वाली होती हैं. फिल्म इंडस्ट्री बाहर से जितनी चकाचौंध भरी दिखती है असल में वह वैसी है नहीं. क्योंकि आउटसाइडर्स के लिए यहां का सफर थोड़ा मुश्किल भरा होता है. कुछ ऐसी ही कहानी अनुपम खेर की है. उन्होंने अपने दम पर इंडस्ट्री में अच्छा मुकाम हासिल किया. लेकिन, वह जब भी अपने संघर्षों के दिनों को याद करते हैं तो उसे सोचकर वह भावुक हो जाते हैं. ऐसे में एक बार उन्होंने पिता के निधन की भावुक यादों को साझा किया था, जिसे बताते-बताते वह खुद भी रो पड़ते हैं. चलिए बताते हैं उन्होंने क्या बताया था.
दरअसल, अनुपम खेर एक बार रजत शर्मा के शो ‘आपकी अदालत’ में पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने अपनी लाइफ के बारे में काफी कुछ शेयर किया था. इसी बातचीत में अभिनेता ने पिता के आखिरी पलों को याद किया था और बताया था कि उनके पिता का निधन भूख की वजह से हो गया था क्योंकि वह एक अजीब बीमारी का शिकार हो गए थे.
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अनुपम खेर नम आंखों से पिता को याद करते हुए बताते हैं कि उनके पिता को एक अजीब बीमारी हो गई थी. खाना उन्हें रेत जैसा लगता था और पानी तेजाब जैसा. अभिनेता बताते हैं कि इसी वजह से उनके पिता सब फेंक देते थे और धीरे-धीरे वह कमजोर होते चले गए. उनके आखिरी समय को याद कर भावुक अनुपम बताते हैं कि उनके पास लिखने की ताकत भी नहीं बची थी. फिर भी उन्होंने कुछ लिखने की कोशिश की और वह कुछ लाइनें ही बना पाए. इस पर उन्होंने इसका सामान्य सा जवाब दिया, ‘हां बिल्कुल.’
इसके साथ ही अनुपम खेर आगे पिता के आखिरी शब्दों को याद करते हुए बताते हैं कि वह थोड़ा निराश दिखे.इसके बाद वो बताते हैं कि पिता ने उन्हें पास में बुलाया. वह उनके पास गए और झुककर कान उनके मुंह के पास ले गए. निधन के 20 मिनट पहले ही अभिनेता से उनके पिता ने कहा था कि जिंदगी जीओ. अनुपम कहते हैं कि ये उनके लिए अविश्वसनीय था. क्योंकि, उनके लग रहा था कि एक मरता हुआ इंसान जिंदगी जीने की सलाह दे रहा था.
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इतना ही नहीं, अनुपम खेर ने इस दौरान अपने स्ट्रगल के बारे में भी बात की थी और बताया था कि उन्होंने 27 दिन मुंबई के बांद्रा स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर गुजारे थे. एक्टर ने बताया था कि संघर्ष के दिन काफी मुश्किल भरे थे और वह 27 दिन तक बांद्रा ईस्ट के प्लेटफॉर्म पर 27 दिन तक सोए थे. पुलिस वाले उन्हें नहीं भगाते थे क्योंकि वह रात में 1.20 बजे सोते थे. उस समय तक आखिरी ट्रेन निकल जाती थी. एक पुलिसवाले की उन्होंने तारीफ भी की और बताया कि उसके बेटे से वह 4 साल तक मिले थे.
अभिनेता ने इंडस्ट्री में काम को लेकर बताया था कि उस समय फिल्मों का माहौल काफी अलग था. काम ना होने के बावजूद डायरेक्टर्स और राइटर्स मिलते थे. इसी बीच एक दिन डायरेक्टर महेश भट्ट से उनकी मुलाकात हुई, जिसके बाद करियर में और दरवाजे खुले. उनकी पहली फिल्म ‘आगमन’ 1982 में आई थी लेकिन, किस्मत साल 1984 में पलटी थी. ये फिल्म थी महेश भट्ट की ‘सारांश’. इसे उनके करियर की पहली हिट फिल्म माना जाता है और ये उनके करियर के लिए टर्निंग प्वॉइंट भी साबित हुई.
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