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Explainer: OTT ने थिएटर को मारा नहीं, एक्टर्स को बचाया है, 5 प्वाइंट्स में जानिए कैसे

OTT vs Theatre: कोविड-19 के बाद से मनोरंजन जगत में ओटीटी प्लेटफॉर्म का दबदबा काफी बढ़ा है. माना जाता है कि इसके आने से अवसर तो मिले लेकिन फिल्मों के बॉक्स ऑफिस पर भी असर पड़ा है.

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OTT vs Theatre: मनोरंजन जगत में ओटीटी का काफी दबदबा देखने के लिए मिलता है. ओटीटी प्लेटफॉर्म को एंटरटेनमेंट का जबरदस्त अड्डा माना जाता है. जहां हर जॉनर की फिल्में, सीरीज, शोज और ऑरिजनल कंटेंट देखने के लिए मिलते हैं. दर्शक आज थिएटर में कम ओटीटी पर ज्यादा फिल्में और सीरीज देखना पसंद करते हैं. इसकी एक वजह कि यहां पर मनोरंजन की वैरायिटी मिलती है. इसे फ्लॉप फिल्मों के लिए भी वरदान माना जाता है. लेकिन इंडस्ट्री का एक तबका ऐसा भी है, जो थिएटर में फिल्मों के ना चलने के पीछे ओटीटी को जिम्मेदार ठहराता है. मगर ऐसा नहीं है. OTT ने थिएटर को मारा नहीं बल्कि एक्टर्स को बचाया है. चलिए 5 प्वॉइंट्स में बताते हैं कैसे.

एक्टर को एक्टर बनने का मौका मिला

ओटीटी ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसने एक कलाकार को एक्टर बनने का मौका दिया है. क्या होता है कि थिएटर पर एक्टर की फेस वेल्यू होती है लेकिन ओटीटी कलाकारों के लिए इस बैरियर को तोड़ता है. एक अच्छे कलाकार को ओटीटी एक्टर बनने का मौका देता है. यहां फिल्में या सीरीर एक्टर देखकर दर्शक नहीं देखता है बल्कि कंटेंट को पसंद किया जाता है. अभिनेता के काम को पसंद किया जाता है. इंडस्ट्री में कई ऐसे कलाकार रहे हैं, जिन्हें ओटीटी से पॉपुलैरिटी मिली है और अब वो थिएटर में भी अच्छा काम कर रहे हैं. वो समय चला गया जब लोग अभिनेता का चेहरा देखकर फिल्मों को देखने के लिए जाते थे लेकिन आज लोग काम और कंटेंट को देखना पसंद करते हैं. ओटीटी के बाद सिनेमा जगत में ये सिनैरियो बदला है.

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नए कलाकारों को मिला मौका

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के प्रचलन की वजह से नए कलाकारों को फिल्मों और सीरीज में काम करने का मौका मिला है. अवसर बढ़े हैं. थिएटर में क्या था कि कलाकारों के लिए जगह सीमित थी लेकिन ओटीटी के बाद से कुछ चीजें बदली हैं. नए कलाकारों को मौके मिलने लगे. कहानियों को ज्यादा पसंद किया गया. नए कलाकारों ने भी अच्छी एक्टिंग की छाप छोड़ी. लोगों ने भी उन्हें खूब सराहा. इसमें हुमा कुरैशी, सोहम शाह, जयदीप अहलावत जैसे कलाकारों के नाम शामिल हैं, जिन्हें ओटीटी पर जबरदस्त रिस्पांस मिला. आलम ये है कि हुमा कुरैशी को तो आज ओटीटी क्वीन के तौर पर जाना जाता है. इस लिस्ट में एक नाम शेफाली शाह का भी है, जिन्हें ओटीटी की वजह से सालों की मेहनत के बाद पॉपुलैरिटी हासिल हुई.

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उम्र, लुक या बॉक्स-ऑफिस के दबाव खत्म

थिएटर में एक बात है कि एक्टर की फेस वैल्यू काफी मायने रखती है. कोई फिल्म हिट या फ्लॉप होती है तो एक्टर के फेस पर. वहां पर एक कलाकार की एक्टिंग ही नहीं बल्कि, लुक्स, उम्र भी काफी मायने रखती है. लेकिन ओटीटी पर ये सभी बैरियर्स टूट जाते हैं. थिएटर पर मेकर्स पर बॉक्स ऑफिस का भी दबाव रहता है, जिसे देखते हुए किरदारों को लिखा और तैयार किया जाता है. यहां पर कलाकार सीमित हो जाता है लेकिन ओटीटी पर कलाकार के लिए ना तो उम्र लुक्स का कोई बैरियर नहीं होती है. साथ ही ना तो मेकर्स पर बॉक्स ऑफिस का दबाव. इसलिए वहां पर छोटे बजट की फिल्में और सीरीज भी हिट हो जाती हैं. ओटीटी पर मामला व्यूअरशिप का होता है.

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टाइपकास्टिंग टूटी

थिएटर पर चीजें सीमित तो होती हैं साथ ही टाइपकास्टिंग का भी डर काफी होता है. गुजरे जमाने में भी कई कलाकार रहे हैं, जिनका टाइपकास्ट होने की वजह से करियर खतरे में आ गया. उन्हें उसी तरह के रोल करने के लिए मिलते रहे हैं, जिसमें दर्शकों ने पसंद किया है. लेकिन ओटीटी इस बैरियर को भी तोड़ता है. यहां पर कलाकारों के पास करने के लिए काफी कुछ होता है. ओटीटी के आने के बाद से एक टिपिकल हीरो वाला कॉन्सेप्ट भी खत्म हो गया.

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कंटेंट और परफॉर्मेंस को मिली अहमियत

ओटीटी प्लेटफॉर्म के आने के बाद कंटेंट और परफॉर्मेंस को अहमियत दी गई है. थिएटर में देखा गया है कि अक्सर फिल्मों का कोई ना कोई रीमेक वर्जन होता है लेकिन, ओटीटी के आने के बाद से फिल्मों और सीरीज के जरिए ऑरिजनल कंटेंट पर काम किया गया, कलाकारों की एक्टिंग और उनकी परफॉर्मेंस को अहमियत दी गई.

फाइनल वर्डिक्ट

कोविड 19 के बाद से मनोरंजन जगत में एक बड़ा बदलाव देखने के लिए मिला है. ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को मनोरंजन का एक अच्छा जरिया माना गया है, जिस पर सभी वर्ग के लिए कंटेंट और एंटरटेनमेंट उपलब्ध है. ओटीटी की वजह से कलाकारों को अवसर ज्यादा मिले हैं. नए और छोटे कलाकारों के लिए एक नया प्लेटफॉर्म मिला है, जिसके जरिए वो अपनी स्किल को दिखा पाए हैं. ऐसे में ओटीटी को एक अवसर के तौर पर देख सकते हैं.

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First published on: Feb 10, 2026 05:28 PM

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About the Author

Rahul Yadav

राहुल यादव एक अनुभवी डिजिटल जर्नलिस्ट हैं, जो News24 Hindi में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वह यहां पर एंटरटेनमेंट डेस्क को लीड करते हैं. उन्हें मनोरंजन जगत की खबरें लिखने का 9 सालों का अनुभव है. राहुल खबरें और फीचर्स लिखते हैं. खासकर भोजपुरी सिनेमा में उनकी अच्छी पकड़ है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से जनसंचार में स्नातकोत्तर (MA in Mass Communication) किया है.

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Rahul Yadav

राहुल यादव एक अनुभवी डिजिटल जर्नलिस्ट हैं, जो News24 Hindi में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वह यहां पर एंटरटेनमेंट डेस्क को लीड करते हैं. उन्हें मनोरंजन जगत की खबरें लिखने का 9 सालों का अनुभव है. राहुल खबरें और फीचर्स लिखते हैं. खासकर भोजपुरी सिनेमा में उनकी अच्छी पकड़ है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से जनसंचार में स्नातकोत्तर (MA in Mass Communication) किया है.

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